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एस्ट्रोवेद ब्लॉग्स

द्वादश भाव

Dwadash Bhav Ke Baare Mein Small

द्वादश भाव का परिचय- द्वादश भाव कुंडली का अंतिम भाव होने से मनुष्य जीवन का भी अंतिम भाग है| प्रथम भाव(लग्न) से गणना करने पर द्वादश भाव सबसे आख़िरी भाव है अतः एक प्रकार से यह जीवनचक्र का अंत दर्शाता है| जो कुछ भी प्रारंभ हुआ है, उसे एक न एक दिन समाप्त होना है, […]

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एकादश भाव

Ekadash Bhav Ke Baaremein

एकादश भाव का परिचय- एकादश स्थान ही वह स्थान है जिससे मनुष्य को जीवन में प्राप्त होने वाले सभी प्रकार के लाभ ज्ञात हो सकते हैं| इसलिए इसे लाभ स्थान भी कहा जाता है| एकादश भाव दशम स्थान(कर्म) से द्वितीय है| अतः कर्मों से प्राप्त होने वाले लाभ या आय एकादश भाव से देखे जाते […]

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दशम भाव

Dasham Bhav Ke Baaremein

दशम भाव का परिचय दशम भाव कुंडली के केंद्र भावों में से एक केंद्र स्थान है| यह अन्य दो केन्द्रों(चतुर्थ तथा सप्तम भाव) से अधिक बली भाव है| इस भाव से मुख्य रूप से कर्म, व्यवसाय, व राज्य का विचार किया जाता है| इन विषयों के अतिरिक्त सम्मान, पद-प्राप्ति, आज्ञा, अधिकार, यश, ऐश्वर्य, कीर्ति, अवनति, […]

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नवम भाव

Navam Bhav Ke Baaremein

नवम भाव का परिचय नवम भाव भाग्य, धर्म व यश का भाव होने के कारण किसी भी व्यक्ति के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है| भाग्य पूर्व संचित कर्मों का परिणाम है| नवम भाव त्रिकोण स्थान कहलाता है| यह पंचम भाव से अधिक बलशाली होता है, अतः नवमेश, पंचमेश की अपेक्षा अधिक बलशाली माना जाता है| त्रिकोण […]

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अष्टम भाव

Ashtam Bhav Ke Baaremein

अष्टम भाव का परिचय अष्टम भाव से व्यक्ति की आयु व मृत्यु के स्वरुप का विचार किया जाता है| इस दृष्टि से अष्टम भाव का महत्व किसी भी प्रकार से कम नही है| क्योंकि यदि मनुष्य दीर्घजीवी ही नही तो वह जीवन के समस्त विषयों का आनंद कैसे उठा सकता है? अष्टम भाव त्रिक(6, 8, […]

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सप्तम भाव

Saptam Bhav Ke Baaremein

सप्तम भाव का परिचय कुंडली में सप्तम भाव केंद्र भावों में से एक है| इसे जाया, कलत्र, काम, भार्या आदि नामों से भी पुकारा जाता है| फारसी में इस भाव को हफ्तमखाने, जनखाने, हमलखाने कहते हैं| लग्न भाव जीवन व जीवनारंभ दर्शाता है तो सप्तम भाव लग्न के विपरीत होने से जीवन का अंत दर्शाता […]

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षष्ठ भाव

Chathe Bhav Kebaaremein

छठे भाव का परिचय– छठा भाव एक अशुभ स्थान माना जाता है| तीन सर्वाधिक अशुभ स्थानों, अर्थात षष्ठ, अष्टम व द्वादश स्थान में षष्ठ भाव द्वितीय स्तर पर आता है| अष्टम स्थान सर्वाधिक अशुभ है, इसके पश्चात षष्ठ तथा अंत में द्वादश स्थान अशुभ होता है| इसलिए छठे भाव को दुष्ट स्थान अर्थात अशुभ स्थान […]

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पूर्णिमा व्रत और उसके लाभ

Purnima Vrat Ka Mehatva

पूर्णिमा व्रत परिचय- प्रत्येक मास के शुक्लपक्ष की पूर्णिमा तिथि को पूर्णिमा का व्रत करने का शास्त्रादेश है| हिन्दू पंचांग के अनुसार पूर्णिमा शुक्लपक्ष की अंतिम 15वीं तिथि होती है| इस दिन चंद्रमा आकाश में पूर्ण रूप से दिखाई देता है| इस दिन का हिन्दू धर्म में अत्यंत महत्व हैं। इस तिथि पर चन्द्रमा पक्षबली […]

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विवाह मिलान में विचारणीय 10 महत्वपूर्ण तत्व

Vivah Milaan Mein Vicharniya 10mehatvpurn Tatva

विवाह मानव जीवन के लिए अपरिहार्य संस्कार है। विवाह ही एक युवक व युवती को दंपति के रूप में साथ रहने की की वैधता व सामाजिक मान्यता प्रदान करता है। विवाह के पश्चात अनजाने परिवारों(कुलों) के दो सदस्य दाम्पत्य जीवनरूपी नौका में सवार होते हैं। जीवन भर दोनों को एक-दूसरे के पूरक के रूप में […]

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गणेश जी की विभिन्न सूंड वाली आकृतियों का रहस्य

Vibhinn Sundh Wali Ganesh Akartiyon Ka Rahasya New

गणेश शब्द की परिभाषा व गणेश जी का परिचय- गणेश शब्द ग, ण तथा ईश शब्द से मिलकर बना है| ग शब्द ज्ञानार्थ वाचक है| ज्ञान से बुद्धि की वृद्धि होती है| ण शब्द निर्वाण वाचक है| अंतिम शब्द ईश स्वामी वाचक है| इस प्रकार संपूर्ण गणेश शब्द का अर्थ हुआ- ज्ञान-बुद्धि तथा निर्वाण के […]

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