सामान्य अवलोकन इस माह सफलता प्राप्त करने के लिए आध्यात्मिक भागीदारी आपके लिए महत्वपूर्ण रहेगी| यद्यपि माह के पहले भाग में आप बेहतर महसूस करेंगे परंतु फिर भी आपको कुछ कमी महसूस हो सकती है| माह के उत्तरार्द्ध में आपको अधिक बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है जो आपके आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकती […]
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मंगल दोष का परिचय मंगल दोष को बहुत भयावह ज्योतिषीय पीड़ा के रूप में देखा जाता है। यह विवाह प्रस्ताव प्राप्त होने के बाद कुंडली मिलाते समय सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक होता है जिसके प्रति लोग चिंतित रहते हैं| ‘मंगल’ मंगल ग्रह का संस्कृत नाम है तथा ‘दोष’ का मतलब पीड़ा है| इस […]
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पूर्वाफाल्गुनी (सिंह राशि में 13°20′ – 26°30′ तक) पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में ज़ोस्मा (डेल्टा लेओनिस) व चेर्टन (थीटा लेओनिस) नामक दो उज्ज्वल तारों का समावेश है| ये तारे सिंह राशि के नक्षत्र-मंड़ल में आते हैं जो रेगुलस नामक एक उज्ज्वल तारे के बाईं ओर स्थित हैं। पूर्वाफाल्गुनी के प्रतीक एक चारपाई के अगले दो पाए हैं […]
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अश्विनी (0°00′ – 13°30′ मेष) प्रत्येक नक्षत्र जो हम रात को आकाश में देखते हैं, एक जलता हुआ सूर्य है जो हमारे सूर्य से मिलता-जुलता है| खगोल विज्ञान में जिन जुड़वाँ नक्षत्रों से अश्विनी नक्षत्र का निर्माण होता है उन्हें अल्फा अरिएटीस और बीटा एरिटिस कहते हैं। वास्तव में वैदिक ज्योतिष में अश्विनी नक्षत्र के […]
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भरणी (संजोना, सहायक व पोषण) (13°20′ – 26°40′ मेष) आधुनिक खगोल विज्ञान के अनुसार मेष राशि में आने वाले भरणी नक्षत्र में तीन तारों का समावेश है जिनके नाम 35-एरीटिस, 39-एरीटिस और 41-एरीटिस हैं। भरणी एक बहुत ही गर्म नक्षत्र है जिसमें भारी मात्रा में अग्नि ऊर्जा विद्यमान है। वैदिक परंपरा में अग्नि तत्व के […]
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पुनर्वसु (मिथुन राशि में 20°00′ से 3°20′ कर्क राशि तक) पुनर्वसु नक्षत्र में दो उज्ज्वल तारों का समावेश है जिन्हें कास्टर (अल्फा-जेमिनोरियम) व पोलक्स (बीटा-जेमिनोरियम) कहा जाता है। ये दो तारे पुनर्वसु नक्षत्र के अंतर्गत पैदा होने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि जीवन की शिक्षाएं अक्सर जोड़ों में घटित होती हैं| ज्योतिष में […]
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पुष्य (पोषण प्रदाता) (कर्क राशि में 3°20′ से 16°40′ कर्क राशि तक) पुष्य नक्षत्र संपूर्ण रूप से कर्क राशि में स्थित है तथा इसमें थीटा, गामा व एटा- कंक्री नामक तारों का समावेश है| पुष्य का अर्थ “पोषण प्रदाता” है जो इस नक्षत्र के सार को अभिव्यक्त करता है। इस नक्षत्र का प्रतीक एक गाय […]
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आश्लेषा (कर्क राशि में 16°40′ से 30°00′ तक) आश्लेषा नक्षत्र, डेल्टा, मू, रो, सिग्मा व जीटा-हाइड्रा आदि तारों के वृत्त द्वारा प्रदर्शित होता है| ज्योतिष में आश्लेषा नक्षत्र कर्क राशि के अंतर्गत आता है| इस नक्षत्र का प्रतीक एक कुंडली मारा हुआ सर्प है| इस नक्षत्र के अधिपति देव नाग हैं जो ज्ञान से संबंधित […]
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मघा (शक्तिशाली) (सिंह राशि में 0°00 – 13°20′ तक) रात्रि के आकाश में सिंह राशि में रेगुलस (अल्फा-लियोनिस) नामक सबसे उज्जवल तारे के अंतर्गत मघा नक्षत्र चमकता हुआ दिखाई देता है| मघा का अर्थ “भव्य” है तथा शाही सिंहासन इसका प्रतीक है| मघा नक्षत्र में पैदा हुए लोग अपने उच्चतम लक्ष्यों को प्राप्त करने के […]
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रेवती (मीन राशि में 16°40′ – 30°00′ तक) रेवती सत्ताईसवाँ व अंतिम नक्षत्र है। रात्रि के आकाश में रेवती नक्षत्र मीन राशि के अंतर्गत आने वाले तारा समूहों में दिखाई देता है| इस तारा समूह का सबसे उज्जवल तारा जीटा पिसाईम है| इस नक्षत्र के अधिपति देव पूषा हैं जो पोषण प्रदान करके किसी भी […]
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