मघा (शक्तिशाली) (सिंह राशि में 0°00 – 13°20′ तक) रात्रि के आकाश में सिंह राशि में रेगुलस (अल्फा-लियोनिस) नामक सबसे उज्जवल तारे के अंतर्गत मघा नक्षत्र चमकता हुआ दिखाई देता है| मघा का अर्थ “भव्य” है तथा शाही सिंहासन इसका प्रतीक है| मघा नक्षत्र में पैदा हुए लोग अपने उच्चतम लक्ष्यों को प्राप्त करने के […]
अधिक पढ़ें →
रेवती (मीन राशि में 16°40′ – 30°00′ तक) रेवती सत्ताईसवाँ व अंतिम नक्षत्र है। रात्रि के आकाश में रेवती नक्षत्र मीन राशि के अंतर्गत आने वाले तारा समूहों में दिखाई देता है| इस तारा समूह का सबसे उज्जवल तारा जीटा पिसाईम है| इस नक्षत्र के अधिपति देव पूषा हैं जो पोषण प्रदान करके किसी भी […]
अधिक पढ़ें →
उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र (सिंह राशि के 26°40′ से कन्या राशि 10°00′ तक) सिंह राशि में उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के अंतर्गत डेनेबोला अर्थात बीटा-लियोनिस (एक उज्जवल तारा) व 93-लियोनिस(एक धुंधला तारा) नामक दो तारे निहित हैं| उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के प्रतीक एक चारपाई के पिछले दो पाए हैं जोकि विश्राम व कायाकल्प को दर्शाते हैं| लेकिन यह नक्षत्र पूर्वाफाल्गुनी […]
अधिक पढ़ें →
हस्त नक्षत्र (हाथ) (कन्या राशि में 10°00′ से 23°20′ तक) हस्त नक्षत्र में अल्फा, बीटा, डेल्टा, गामा व एपिसिलोन-कोरवी नामक पांच तारे होते हैं। कोरवी तारा स्पाइका नामक उज्ज्वल तारे के नीचे रात्रि के आकाश में दिखाई देता है| ज्योतिष में हस्त नक्षत्र संपूर्ण रूप से कन्या राशि में आता है| हस्त शब्द का अर्थ […]
अधिक पढ़ें →
चित्रा नक्षत्र (चमकदार) (कन्या राशि के 23°20′ से तुला राशि के 6°40′ तक) चित्रा नक्षत्र स्पाइका (अल्फा-वर्जिनिस) नामक एक एकल तारे द्वारा प्रदर्शित होता है जो कन्या राशि में आता है| यह आकाश में सबसे उज्जवल तारों में से एक है। चित्रा का अर्थ “चमकदार” है। ज्योतिष में चित्रा नक्षत्र कन्या व तुला राशि के […]
अधिक पढ़ें →
स्वाति (पुजारी, तलवार) (तुला राशि में 6°40 से 20°20′ तक) रात्रि के आकाश में स्वाति नक्षत्र अर्क्टरस (अल्फा-बूटिस) नामक एक एकल तारे द्वारा प्रदर्शित होता है| यह बूटिस तारा समूह के अंतर्गत मुख्य तारा है| ज्योतिष शास्त्र में स्वाति नक्षत्र संपूर्ण रूप से तुला राशि में आता है| स्वाति का अर्थ “स्वतंत्र ” है। इस […]
अधिक पढ़ें →
ज्येष्ठा (वृश्चिक राशि में 16°40′ – 30°00′ तक) ज्येष्ठा नक्षत्र रात्रि के आकाश में चमकदार लाल रंग के एंटारेस नामक तारे के रूप में पहचान योग्य होता है| यह नक्षत्र वृश्चिक राशि के केंद्र में स्थित है तथा हमारे सूर्य से कई गुना अधिक विशाल है। ज्येष्ठा का अर्थ “सबसे बड़ा” है तथा यह वरिष्ठता […]
अधिक पढ़ें →
अनुराधा (वृश्चिक राशि में 3°20′ से 16°40′ तक) अनुराधा नक्षत्र में बीटा, डेल्टा व पाई स्कॉर्पिओनिस नामक तारे शामिल हैं। ये तीन तारे रात्रि को आकाश में दिखाई देते हैं क्योंकि ये एंटारेस नामक उज्ज्वल लाल तारे के ठीक ऊपर एक सीधी रेखा में नज़र आते हैं| अनुराधा नक्षत्र के अधिपति देव मित्र हैं जो […]
अधिक पढ़ें →
मूल (धनु राशि में 0°00 -13°20′ तक) बिच्छू की पूंछ मूल नक्षत्र का प्रतिनिधित्व करती है जिसमें एप्सिलोन, म्यू, जीटा, एटा, थीटा, लोटा , कापा, अपसिलॉन और लैम्ब्डा स्कॉर्पिओनिस नामक नौ तारे शामिल हैं| यह नक्षत्र हमारी आकाशगंगा के बाईं ओर स्थित है जोकि मूल नक्षत्र की प्रकृति का सूचक है। इस नक्षत्र में उत्पन्न […]
अधिक पढ़ें →
उत्तराभाद्रपद (मीन राशि में 3°20′ से 16°40′ तक) उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में गामा पेगासी व अल्फा एंड्रोमेडेई नामक दो तारे शामिल हैं जो आधुनिक खगोल विज्ञान में पेगासस और एंड्रोमेडा नामक दो तारों को आपस में जोड़ते हैं। अंतिम संस्कार की खाट का पिछला भाग उत्तराभाद्रपद का प्रतीक है जिसे यह पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के साथ साझा […]
अधिक पढ़ें →