नगुला चविथी परिचय नाग पूजा (सर्प पूजा) अनुष्ठान करने के लिए नगुला चविथी को शुभ दिन माना जाता है। हिंदू माह ‘कार्तिक’ के दौरान अमावस्या (नया चंद्रमा) के बाद आने वाली चतुर्थी तिथि पर यह पर्व मनाया जाता है। नाग चतुर्थी के पश्चात् नाग पंचमी और नाग षष्ठी पर्व मनाए जाते हैं। नगुला चविथी के […]
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पूर्वाफाल्गुनी (सिंह राशि में 13°20′ – 26°30′ तक) पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में ज़ोस्मा (डेल्टा लेओनिस) व चेर्टन (थीटा लेओनिस) नामक दो उज्ज्वल तारों का समावेश है| ये तारे सिंह राशि के नक्षत्र-मंड़ल में आते हैं जो रेगुलस नामक एक उज्ज्वल तारे के बाईं ओर स्थित हैं। पूर्वाफाल्गुनी के प्रतीक एक चारपाई के अगले दो पाए हैं […]
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अश्विनी (0°00′ – 13°30′ मेष) प्रत्येक नक्षत्र जो हम रात को आकाश में देखते हैं, एक जलता हुआ सूर्य है जो हमारे सूर्य से मिलता-जुलता है| खगोल विज्ञान में जिन जुड़वाँ नक्षत्रों से अश्विनी नक्षत्र का निर्माण होता है उन्हें अल्फा अरिएटीस और बीटा एरिटिस कहते हैं। वास्तव में वैदिक ज्योतिष में अश्विनी नक्षत्र के […]
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भरणी (संजोना, सहायक व पोषण) (13°20′ – 26°40′ मेष) आधुनिक खगोल विज्ञान के अनुसार मेष राशि में आने वाले भरणी नक्षत्र में तीन तारों का समावेश है जिनके नाम 35-एरीटिस, 39-एरीटिस और 41-एरीटिस हैं। भरणी एक बहुत ही गर्म नक्षत्र है जिसमें भारी मात्रा में अग्नि ऊर्जा विद्यमान है। वैदिक परंपरा में अग्नि तत्व के […]
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पुनर्वसु (मिथुन राशि में 20°00′ से 3°20′ कर्क राशि तक) पुनर्वसु नक्षत्र में दो उज्ज्वल तारों का समावेश है जिन्हें कास्टर (अल्फा-जेमिनोरियम) व पोलक्स (बीटा-जेमिनोरियम) कहा जाता है। ये दो तारे पुनर्वसु नक्षत्र के अंतर्गत पैदा होने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि जीवन की शिक्षाएं अक्सर जोड़ों में घटित होती हैं| ज्योतिष में […]
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