पुष्य (पोषण प्रदाता) (कर्क राशि में 3°20′ से 16°40′ कर्क राशि तक) पुष्य नक्षत्र संपूर्ण रूप से कर्क राशि में स्थित है तथा इसमें थीटा, गामा व एटा- कंक्री नामक तारों का समावेश है| पुष्य का अर्थ “पोषण प्रदाता” है जो इस नक्षत्र के सार को अभिव्यक्त करता है। इस नक्षत्र का प्रतीक एक गाय […]
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आश्लेषा (कर्क राशि में 16°40′ से 30°00′ तक) आश्लेषा नक्षत्र, डेल्टा, मू, रो, सिग्मा व जीटा-हाइड्रा आदि तारों के वृत्त द्वारा प्रदर्शित होता है| ज्योतिष में आश्लेषा नक्षत्र कर्क राशि के अंतर्गत आता है| इस नक्षत्र का प्रतीक एक कुंडली मारा हुआ सर्प है| इस नक्षत्र के अधिपति देव नाग हैं जो ज्ञान से संबंधित […]
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मघा (शक्तिशाली) (सिंह राशि में 0°00 – 13°20′ तक) रात्रि के आकाश में सिंह राशि में रेगुलस (अल्फा-लियोनिस) नामक सबसे उज्जवल तारे के अंतर्गत मघा नक्षत्र चमकता हुआ दिखाई देता है| मघा का अर्थ “भव्य” है तथा शाही सिंहासन इसका प्रतीक है| मघा नक्षत्र में पैदा हुए लोग अपने उच्चतम लक्ष्यों को प्राप्त करने के […]
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रेवती (मीन राशि में 16°40′ – 30°00′ तक) रेवती सत्ताईसवाँ व अंतिम नक्षत्र है। रात्रि के आकाश में रेवती नक्षत्र मीन राशि के अंतर्गत आने वाले तारा समूहों में दिखाई देता है| इस तारा समूह का सबसे उज्जवल तारा जीटा पिसाईम है| इस नक्षत्र के अधिपति देव पूषा हैं जो पोषण प्रदान करके किसी भी […]
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उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र (सिंह राशि के 26°40′ से कन्या राशि 10°00′ तक) सिंह राशि में उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के अंतर्गत डेनेबोला अर्थात बीटा-लियोनिस (एक उज्जवल तारा) व 93-लियोनिस(एक धुंधला तारा) नामक दो तारे निहित हैं| उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के प्रतीक एक चारपाई के पिछले दो पाए हैं जोकि विश्राम व कायाकल्प को दर्शाते हैं| लेकिन यह नक्षत्र पूर्वाफाल्गुनी […]
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