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एस्ट्रोवेद ब्लॉग्स

चंद्र राशि कुंभ के लिए राहु-केतु का गोचर भविष्यफल

Rahu Ketu Gochar 2017 Kumbha Chandra Rashi Small

राहु : इस अवधि में राहु आपकी चंद्र राशि से छठे भाव में गोचर करेगा। आप उन प्रयासों में सफल होंगे जिनका पीछा कर रहे हैं। आप अपनी क्षमताओं का अहसास करने में सक्षम रहेंगे। इस गोचर के दौरान आपकी सोच रचनात्मक रहेगी जोकि आपके प्रयासों को सफल बनाने में आपकी मदद करेगी। आप मुश्किल […]

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चंद्र राशि मिथुन के लिए राहु-केतु का गोचर भविष्यफल

Rahu Ketu Gochar 2017 Mithun Chandra Rashi Small

राहु : इस अवधि में राहु आपकी चंद्र राशि से द्वितीय भाव में गोचर करेगा तथा केतु अष्टम भाव में रहेगा।द्वितीय भाव परिवार, आर्थिक स्थिति, बातचीत करने का तरीका, व्यवहार, मित्रता तथा आहार आदि से संबंधित है जबकि अष्टम भाव आयु, आकस्मिक परिवर्तन व बाधा, टैक्स, पैतृक संपति तथा कार्यक्षेत्र में परिवर्तन आदि का प्रतीक […]

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चंद्र राशि वृषभ के लिए राहु-केतु का गोचर भविष्यफल

Rahu Ketu Gochar 2017 Vrish Chandra Rashi Small

राहु : इस अवधि में राहु आपकी चंद्र राशि से तृतीय भाव में गोचर करेगा तथा केतु नवम भाव में रहेगा।तृतीय भाव छोटे भाई-बहन, संचार, छोटी यात्राएँ तथा साहस आदि से संबंधित है जबकि नवम भाव उच्च शिक्षा, लंबी यात्राएँ, भाग्य तथा धर्म का प्रतीक है। इस अवधि में राहु आपकी चंद्र राशि से तीसरे […]

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चंद्र राशि मेष के लिए राहु-केतु का सामान्य भविष्यफल

Rahu Ketu Gochar 2017 Mesh Chandra Rashi Small

राहु : इस गोचर के दौरान राहु आपकी चंद्र राशि से चतुर्थ भाव में गोचर करेगा। राहु की यह स्थिति अच्छे-बुरे परिणामों के लिए सम रहेगी। पारिवारिक जीवन के मामलों में आपको कम प्रयासों से ही सभी प्रकार की सुख-सुविधाएँ प्राप्त होंगी। भू-संपति की ख़रीददारी आपको संतुष्टि प्रदान कर सकती है परंतु ख़रीददारी करने से […]

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द्वादश भाव

Dwadash Bhav Ke Baare Mein Small

द्वादश भाव का परिचय- द्वादश भाव कुंडली का अंतिम भाव होने से मनुष्य जीवन का भी अंतिम भाग है| प्रथम भाव(लग्न) से गणना करने पर द्वादश भाव सबसे आख़िरी भाव है अतः एक प्रकार से यह जीवनचक्र का अंत दर्शाता है| जो कुछ भी प्रारंभ हुआ है, उसे एक न एक दिन समाप्त होना है, […]

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एकादश भाव

Ekadash Bhav Ke Baaremein

एकादश भाव का परिचय- एकादश स्थान ही वह स्थान है जिससे मनुष्य को जीवन में प्राप्त होने वाले सभी प्रकार के लाभ ज्ञात हो सकते हैं| इसलिए इसे लाभ स्थान भी कहा जाता है| एकादश भाव दशम स्थान(कर्म) से द्वितीय है| अतः कर्मों से प्राप्त होने वाले लाभ या आय एकादश भाव से देखे जाते […]

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दशम भाव

Dasham Bhav Ke Baaremein

दशम भाव का परिचय दशम भाव कुंडली के केंद्र भावों में से एक केंद्र स्थान है| यह अन्य दो केन्द्रों(चतुर्थ तथा सप्तम भाव) से अधिक बली भाव है| इस भाव से मुख्य रूप से कर्म, व्यवसाय, व राज्य का विचार किया जाता है| इन विषयों के अतिरिक्त सम्मान, पद-प्राप्ति, आज्ञा, अधिकार, यश, ऐश्वर्य, कीर्ति, अवनति, […]

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नवम भाव

Navam Bhav Ke Baaremein

नवम भाव का परिचय नवम भाव भाग्य, धर्म व यश का भाव होने के कारण किसी भी व्यक्ति के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है| भाग्य पूर्व संचित कर्मों का परिणाम है| नवम भाव त्रिकोण स्थान कहलाता है| यह पंचम भाव से अधिक बलशाली होता है, अतः नवमेश, पंचमेश की अपेक्षा अधिक बलशाली माना जाता है| त्रिकोण […]

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अष्टम भाव

Ashtam Bhav Ke Baaremein

अष्टम भाव का परिचय अष्टम भाव से व्यक्ति की आयु व मृत्यु के स्वरुप का विचार किया जाता है| इस दृष्टि से अष्टम भाव का महत्व किसी भी प्रकार से कम नही है| क्योंकि यदि मनुष्य दीर्घजीवी ही नही तो वह जीवन के समस्त विषयों का आनंद कैसे उठा सकता है? अष्टम भाव त्रिक(6, 8, […]

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सप्तम भाव

Saptam Bhav Ke Baaremein

सप्तम भाव का परिचय कुंडली में सप्तम भाव केंद्र भावों में से एक है| इसे जाया, कलत्र, काम, भार्या आदि नामों से भी पुकारा जाता है| फारसी में इस भाव को हफ्तमखाने, जनखाने, हमलखाने कहते हैं| लग्न भाव जीवन व जीवनारंभ दर्शाता है तो सप्तम भाव लग्न के विपरीत होने से जीवन का अंत दर्शाता […]

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