मुख पृष्ठ> मुफ्त उपकरण> रोहिणी नक्षत्र रोहिणी (10°00′ to 23°20′ वृषभ) रोहिणी नक्षत्र पूरी तरह से वृषभ राशि में समाविष्ट है| रात के समय आकाश में यह एक उज्ज्वल तारे जिसे अल्देबारन(अल्फा-टौरी) कहा जाता है के अंतर्गत चमकता नज़र आता है| रोहिणी शब्द का अर्थ “लाल वर्ण वाला” है जो इस नक्षत्र की तीव्र व […]
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मुख पृष्ठ> मुफ्त उपकरण>मुखपृष्ठ>मृगशिरा नक्षत्र मृगशिरा(हिरण का मुख) (23°20′ वृषभ राशि से 6°40′ मिथुन राशि तक) रात्रि के आकाश में मृगशिरा नक्षत्र के चार तारे ओरियन नामक सितारे के अंतर्गत चमकते हुए दिखाई देते हैं| इन चार तारों के नाम बेलाट्रिक्स (गामा-ओरियनिस), पी.आई 2, पी. आई 3 व पी. आई 4-ओरियनिस हैं| बेलाट्रिक्स इन तारों […]
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मुख पृष्ठ> मुफ्त उपकरण>आर्द्रा नक्षत्र आर्द्रा (नम) (मिथुन राशि में 6°40′ से 20°00′ तक) रात्रि के आकाश में आर्द्रा ओरियन के अंतर्गत बीटलगुएज़ (अल्फा-ओरियन) नामक सबसे उज्जवल नक्षत्र के रूप में चमकता हुआ दिखाई देता है| ज्योतिष में आर्द्रा नक्षत्र संपूर्ण रूप से मिथुन राशि के अंतर्गत आता है| इस नक्षत्र का प्रतीक अश्रु है […]
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द्वादश भाव का परिचय- द्वादश भाव कुंडली का अंतिम भाव होने से मनुष्य जीवन का भी अंतिम भाग है| प्रथम भाव(लग्न) से गणना करने पर द्वादश भाव सबसे आख़िरी भाव है अतः एक प्रकार से यह जीवनचक्र का अंत दर्शाता है| जो कुछ भी प्रारंभ हुआ है, उसे एक न एक दिन समाप्त होना है, […]
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एकादश भाव का परिचय- एकादश स्थान ही वह स्थान है जिससे मनुष्य को जीवन में प्राप्त होने वाले सभी प्रकार के लाभ ज्ञात हो सकते हैं| इसलिए इसे लाभ स्थान भी कहा जाता है| एकादश भाव दशम स्थान(कर्म) से द्वितीय है| अतः कर्मों से प्राप्त होने वाले लाभ या आय एकादश भाव से देखे जाते […]
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