मूल (धनु राशि में 0°00 -13°20′ तक) बिच्छू की पूंछ मूल नक्षत्र का प्रतिनिधित्व करती है जिसमें एप्सिलोन, म्यू, जीटा, एटा, थीटा, लोटा , कापा, अपसिलॉन और लैम्ब्डा स्कॉर्पिओनिस नामक नौ तारे शामिल हैं| यह नक्षत्र हमारी आकाशगंगा के बाईं ओर स्थित है जोकि मूल नक्षत्र की प्रकृति का सूचक है। इस नक्षत्र में उत्पन्न […]
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उत्तराभाद्रपद (मीन राशि में 3°20′ से 16°40′ तक) उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में गामा पेगासी व अल्फा एंड्रोमेडेई नामक दो तारे शामिल हैं जो आधुनिक खगोल विज्ञान में पेगासस और एंड्रोमेडा नामक दो तारों को आपस में जोड़ते हैं। अंतिम संस्कार की खाट का पिछला भाग उत्तराभाद्रपद का प्रतीक है जिसे यह पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के साथ साझा […]
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पूर्वाभाद्रपद (20°00 कुंभ राशि से 3°20′ मीन राशि तक) पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र पेगासस तारा समूह में स्थित है| इसमें मर्काब (अल्फा पेगास) व स्कीट (बीटा पेगासी) नामक दो तारों का समावेश है| अंतिम संस्कार की खाट के अग्रिम पैर पूर्वाभाद्रपद के प्रतीक हैं जो इस नक्षत्र का अग्नि तत्व के साथ एक मजबूत संबंध इंगित करते […]
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शतभिषा (कुंभ राशि के 6°40′ से 20°00′ तक) कुंभ राशि के अंतर्गत धुंधले तारों का एक समूह शतभिषा नक्षत्र का निर्माण करता है। रात्रि के आकाश में जब इस नक्षत्र समूह पर गौर किया जाता है तब सदलाच्बिया (गामा एक्वरी) नामक तारा सबसे उज्जवल प्रतीत होता है। शतभिषा का अर्थ “100 चिकित्सक” है तथा यह […]
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धनिष्ठा (23°20′ मकर राशि से 6°40′ कुंभ राशि तक) धनिष्ठा नक्षत्र डेल्फिनी तारा समूह के अंतर्गत आने वाले चार तारों से मिलकर बना है| आकाश में अल्फा, बीटा, गामा व डेल्टा डेल्फिनी नामक तारे एक प्रकार की समुद्री मछली डॉल्फ़िन का सिर बनाते हैं| ज्योतिष में धनिष्ठा नक्षत्र मकर व कुंभ राशि के अंतर्गत आता […]
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