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श्रवण नक्षत्र

श्रवण (मकर राशि में 10°00′ – 23°20′ तक)

श्रवण नक्षत्र में अल्टेएर, अलशेन और ताराज़ेड नामक तारे शामिल हैं जो रात्रि को आकाश में दिखाई देते हैं| श्रवण शब्द का अर्थ ‘सुनना’ है तथा इस नक्षत्र के प्रतीक कान हैं| यह नक्षत्र सुनने और सीखने से संबंधित है। जैसे प्राचीन संस्कृति में मौखिक परंपराओं के माध्यम से ज्ञान दिया जाता था वैसे ही श्रवण नक्षत्र में पैदा हुए लोगों में सुनकर ज्ञान प्राप्त करने की एक महान क्षमता होती है। मीडिया और संचार संबंधी क्षेत्र भी इस नक्षत्र से जुड़े हुए हैं। श्रवण नक्षत्र में उत्पन्न लोग लगातार ज्ञान की ख़ोज करते रहते हैं तथा अपनी शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए प्रायः विदेश यात्रा करते हैं। ऐसे लोग अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने व उन समस्त परियोजनाओं को पूर्ण करने के लिए काफी केन्द्रित होते हैं जिन्हें वे प्रारंभ करते हैं।

सामान्य विशेषताएँ: समृद्ध, विद्वान, उदार, समझदार जीवनसाथी, धनी और व्यापक रूप से प्रसिद्ध
अनुवाद: सुनना, वह जो लंगडाकर चलता है (भगवान विष्णु के तीन चरणों को दर्शाता है|)
प्रतीक: एक कान, असमान पंक्ति में तीन पदचिह्न, एक त्रिशूल
पशु प्रतीक: एक बंदरिया
अधिपति देव: भगवान विष्णु, ब्रह्मांड के संरक्षक
शासक ग्रह: चंद्र
चंद्र ग्रह के अधिपति देव: पार्वतीजी
प्रकृति: देव (देव तुल्य)
ढंग: दब्बू
संख्या: 22 (यह संख्या नई शुरुआत से संबंधित है|)
लिंग: पुरुष
दोष: कफ
गुण: राजसिक
तत्व: वायु
प्रकृति: चर
पक्षी: तीतर
सामान्य नाम: आक
वानस्पतिक नाम: कैलोट्रॉपिस जाइगैंटिया
बीज ध्वनि: खी, खू, खे, खा
ग्रह से संबंध: मकर राशि के स्वामी के रूप में शनि इस नक्षत्र से संबंधित है जो दृढ़ता देता है|

shravana-nakshatra

प्रत्येक नक्षत्र को चार चरणों में विभाजित किया जाता है जिन्हें पद कहते हैं| श्रवण नक्षत्र के विभिन्न पदों में जन्म लेने वाले लोगों के अधिक विशिष्ट लक्षण होते हैं:

पद:

प्रथम पद मकर राशि का 10°00′ – 13°20′ भाग मंगल ग्रह द्वारा
शासित
ध्वनि: खी
सूचक शब्द: महत्वाकांक्षा
द्वितीय पद मकर राशि का 13°20′ – 16°40′ भाग शुक्र ग्रह द्वारा
शासित
ध्वनि: खू
सूचक शब्द: कूटनीति
तृतीय पद मकर राशि का 16°40′ – 20°00′ भाग बुध ग्रह द्वारा
शासित
ध्वनि: खे
सूचक शब्द: संचार
चतुर्थ पद मकर राशि का 20°00′ – 23°20′ भाग चंद्र ग्रह द्वारा
शासित
ध्वनि: खा
सूचक शब्द: ग्रहणशील

शक्ति: व्यापार में सौहार्दपूर्ण, बुद्धिमान, विदेश में सफल, एक समृद्धशाली जीवन जीने वाला, संतुलित और साधारण जीवन, नैतिक, शास्त्रों और प्राचीन ज्ञान का अध्ययन करने वाला, दयालु, सामाजिक और मानवीय कारणों के लिए काम करने वाला, उत्तम लेखक व शिक्षक, दूसरों का जीवन बदलने में मदद करने वाला, एक उत्तम दाम्पत्य जीवन व एक उपयोगी जीवनसाथी, उत्तम वक्ता, जग प्रसिद्ध, धनी, रचनात्मक, त्वरित रूप से सीखने वाला, कृपालु

कमजोरियाँ: उदार प्रकृति, जिसके कारण ऋण और गरीबी की ओर उन्मुख हो सकता है, बहुत खुले विचारों वाला, ज़िद्दी प्रकृति, नैतिकता के बारे में चरम दृष्टिकोण रखने वाला, विरोध या विपत्तियों को जन्म देने वाला, अतिसंवेदनशील, ईर्ष्या के कारण शत्रुता, बातूनी

कार्यक्षेत्र: शिक्षक, भाषाविद्, भाषण चिकित्सक, वाणी अनुवादक, कहानीकार, धार्मिक विद्वान, शिक्षक, राजनेता, व्यापार, शोधकर्ता, भूविज्ञानी, टेलीफोन प्रचालक, प्राचीन परंपराओं का संरक्षण, हास्य अभिनेता, संगीत उद्योग, समाचार प्रसारक, सलाहकार, मनोचिकित्सक, मनोवैज्ञानिक, ज्योतिषी, रेडियो प्रचालक, परिवहन, पर्यटन, होटल व रेस्तरां उद्योग, चिकित्सक, समग्र चिकित्सा, सामान्य चिकित्सा व्यवसाय, दानकर्ता

श्रवण नक्षत्र में जन्में प्रसिद्ध लोग: हेनरी फोर्ड, मोहम्मद अली, जॉर्ज लुकास, चार्ल्स मानसन, ब्रूस विल्लिस, जेसिका लेंगे

अनुकूल गतिविधियां: नए उद्यम प्रारंभ करना, परामर्श, सुनना, यात्रा, संपत्ति ख़रीदना, चिकित्सीय उपचार, सामाजिककरण, सीखना, भाषाओँ का अध्ययन करना, पढ़ना व लिखना, संगीत, दर्शन, ध्यान, धार्मिक गतिविधियाँ, राजनीति, मानवीय कार्य

प्रतिकूल गतिविधियां:
आक्रामकता से जुड़े क्रियाकलाप, मुक़दमा, लड़ाई या युद्ध, जोखिम लेना, वचन देना, शपथ लेना, कार्य को पूर्ण करना, धन उधार देना, विवाह, गोद लेना

पवित्र मंदिर: थिरुप्पारकदल श्री अलरमेल मंगाई सामेधा श्री प्रसन्ना वेंकटेश पेरुमल मंदिर

श्रवण नक्षत्र की ऊर्जा से जुड़ा यह पवित्र मंदिर भारत में तमिलनाडु के थिरुप्पारकदल गांव में स्थित है। थिरुप्पारकदल शब्द देवाहार व अमृत का प्रतिनिधित्व करता है जो क्षीर सागर से उत्पन्न होता है| यह नाम भगवान विष्णु की ऊर्जा से निकलता है जो श्रवण नक्षत्र के अधिपति हैं| इस मंदिर में भगवान विष्णु श्री प्रसन्ना वेंकटेश पेरुमल के रूप में अपनी पत्नी श्री अलरमेल मंगाई सहित प्रकट हुए थे|

यह देव दुर्लभ हैं क्योंकि यह भगवान विष्णु व भगवान शिव दोनों के स्वरुप का प्रतीक हैं। थिरुप्पारकदल मंदिर में दैनिक रूप से अमृत कलश के लिए एक पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है| इस पात्र का मुख भगवान विष्णु तथा कंठ भगवान शिव का प्रतिनिधित्व करता है| यह चढ़ावा उन लोगों की सहायता करता है जिनका ईश्वरीय शक्ति पर से विश्वास उठ गया है।

श्रवण नक्षत्र में जन्म लेने के अतिरिक्त जो लोग अन्य नक्षत्रों में पैदा हुए हैं उन्हें भी यहां आकर पूजा-अर्चना करनी चाहिए। इस पवित्र स्थल पर दूध, शहद, घी व चीनी द्वारा पूजा-अर्चना व अभिषेक करना चाहिए। इससे इच्छाओं की पूर्ति हेतु आशीर्वाद प्राप्त होगा| जो लोग थिरुप्पारकदल में आकर श्री प्रसन्ना वेंकटेश पेरुमल के दर्शन करते हैं उन्हें भगवान विष्णु के समस्त अवतारों की भरपूर ऊर्जा प्राप्त होगी। जो लोग अपनी संतान की शिक्षा में उन्नति चाहते हैं उन्हें तृतीया तिथि पर यहाँ आकर दर्शन करने चाहिए|

जो लोग बधिरता या श्रवण संबंधी समस्याओं से पीड़ित हैं उन्हें श्रवण नक्षत्र दिवस पर थिरुप्पारकदल मंदिर में जाकर वाद्य यंत्र बजाना चाहिए| पवित्र ध्वनियों की ऊर्जा की पूजा करने से दैवीय कृपा प्राप्त होती है तथा किसी भी व्यक्ति की श्रवण क्षमता बढ़ सकती है| यह मंदिर उन चिकित्सकों के लिए भी शुभ है जो कान, नाक व गले संबंधी रोगों के विशेषज्ञ हैं।

श्रवण नक्षत्र में जन्में लोगों के लिए वेदों द्वारा निर्धारित धूप अर्क नामक जड़ी-बूटी से निर्मित है|

इस धूप को जलाना उस विशिष्ट नक्षत्र हेतु एक लघु यज्ञ अनुष्ठान करने के समान है| एक विशिष्ट जन्मनक्षत्र के निमित किए गए इस लघु अनुष्ठान द्वारा आप अपने ग्रहों की आन्तरिक उर्जा से जुड़कर सकारात्मक परिणाम प्राप्त करने में सक्षम होंगे|

एक विशिष्ट नक्षत्र दिवस पर अन्य नक्षत्र धूपों को जलाने से आप उस दिन के नक्षत्र की ऊर्जा से जुड़कर अनुकूल परिणाम प्राप्त करते हैं| आपको यह सलाह दी जाती है कि आप कम से कम अपने व्यक्तिगत नक्षत्र से जुड़ी धूप को प्रतिदिन जलाएं ताकि आपको उस नक्षत्र से जुड़ी सकारात्मक उर्जा प्राप्त होती रहे|

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