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शतभिषा नक्षत्र

शतभिषा (कुंभ राशि के 6°40′ से 20°00′ तक)

कुंभ राशि के अंतर्गत धुंधले तारों का एक समूह शतभिषा नक्षत्र का निर्माण करता है। रात्रि के आकाश में जब इस नक्षत्र समूह पर गौर किया जाता है तब सदलाच्बिया (गामा एक्वरी) नामक तारा सबसे उज्जवल प्रतीत होता है। शतभिषा का अर्थ “100 चिकित्सक” है तथा यह चिकित्सा व आरोग्य प्रदायक क्षमताओं से संबंधित है। इस नक्षत्र में पैदा लोग स्वतंत्र होते हैं तथा पहेलियाँ, शोध व चीजों की गहराई तक जाँच करने में रूचि लेते हैं| इस नक्षत्र का प्रतीक एक खाली चक्र है जो रहस्यों की ख़ोज व अज्ञात चीजों से जुड़े दर्शन को इंगित करता है। शतभिषा एक गुप्त प्रवृति वाला नक्षत्र है जिसका ध्यान जीवन की गुप्त शक्तियों पर रहता है| यह गुण इस नक्षत्र में उत्पन्न जातकों को वैराग्यपूर्ण जीवन जीने की ओर अग्रसर कर सकता है इसलिए ऐसे लोगों को अवसाद व अकेलेपन के प्रति सतर्क रहना चाहिए। कुल मिलाकर शतभिषा नक्षत्र एक सच्चा, अनुभवी व महत्वाकांक्षी स्वभाव प्रदान करता है|

सामान्य विशेषताएँ: कटु भाषी परंतु सत्यवादी, दुःख से पीड़ित लेकिन शत्रुओं पर विजय प्राप्त करता है| अविवेकी व स्वतंत्र तरीके से कार्य करता है|
अनुवाद: “सौ चिकित्सक”, “सौ दवाएं”, “सौ चिकित्सकों के गुणों से युक्त”
प्रतीक: एक बैल गाड़ी, एक चक्र या गोल आकर्षण।
पशु प्रतीक: एक घोड़ी
अधिपति देव: वर्षा व ब्रह्मांडीय जल के देवता भगवान वरुण
शासक ग्रह: राहु
राहु ग्रह के अधिपति देव: दुर्गा
प्रकृति: राक्षस (दानव)
ढंग: सक्रिय
संख्या: 24
लिंग: नपुंसक
दोष: वात
गुण: तामसिक
तत्व: आकाश
प्रकृति: चर
पक्षी: काला कौआ
सामान्य नाम: कदंब
वानस्पतिक नाम: एंथोसेफालस कदंबो
बीज ध्वनि: गो, सा, सी, सू
ग्रह से संबंध: कुंभ राशि के स्वामी के रूप में शनि इस नक्षत्र से संबंधित है जो व्यावहारिकता देता है|

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प्रत्येक नक्षत्र को चार चरणों में विभाजित किया जाता है जिन्हें पद कहते हैं| शतभिषा नक्षत्र के विभिन्न पदों में जन्म लेने वाले लोगों के अधिक विशिष्ट लक्षण होते हैं:

पद:

प्रथम पद कुंभ राशि का 06°40′ – 10°00′ भाग गुरु ग्रह द्वारा
ध्वनि: गो
सूचक शब्द: उत्साह
द्वितीय पद कुंभ राशि का 10°00′ – 13°20′ भाग शनि ग्रह द्वारा
शासित
ध्वनि: सा
सूचक शब्द: व्यावहारिक
तृतीय पद कुंभ राशि का 13°20′ – 16°40′ भाग शनि ग्रह द्वारा
शासित
ध्वनि: सी
सूचक शब्द: दूरदर्शी
चतुर्थ पद कुंभ राशि का 16°40′ – 20°00′ भाग गुरु ग्रह द्वारा
शासित
ध्वनि: सू
सूचक शब्द: कल्पना

शक्ति: ईमानदार, तीव्र बुद्धि, अनुभवी, भावनात्मक रूप से नियंत्रित, चीजों के गहन स्तर तक जाकर ख़ोज करने में रूचि, समृद्ध, किफायती, चतुर, स्वयं का बचाव करने में सक्षम, उद्यमी, ज्योतिष और अन्य रहस्यमय विषयों में रुचि रखने वाला, पहेली हल करने में रूचि, उत्तम सेवाएं प्रदान करता है, स्वयं के भीतर खुशी खोजने वाला, दृढ सिद्धांतों वाला, दानी, लेखन कला में कुशल, उत्तम याददाश्त, साहसी, निर्भीक, कलात्मक प्रकृति, शत्रुओं को पराजित करने वाला

कमजोरियाँ: अकेलापन, विषादपूर्ण, आत्मविश्वास का अभाव, प्रतिबंधित, चुप, ठग कलाकार, अस्थिर, तार्किक, अल्पभाषी, वास्तविक इरादे छुपाने वाला, कंजूस, अपनी आवश्यकताओं को पूर्ण करने के लिए दूसरों पर निर्भर, रिश्ते में समस्याएं, बेहद अधीन या मानसिक रूप से पीड़ा महसूस करता है, संतान व भाई-बहनों के साथ समस्यापूर्ण संबंध, गुप्त – स्वयं को कमजोर समझने वाला, आत्मविश्वास से हीन, जिद्दी

कार्यक्षेत्र: चिकित्सक, आरोग्य प्रदाता, शल्य चिकित्सक, एक्स-रे तकनीशियन, खगोलविद, ज्योतिषी, अभियंता, वैमानिकी, अंतरिक्ष अभियंता, विमान-चालक, परमाणु भौतिकज्ञ, शोधकर्ता, विद्युत्कार, लेखक, लिपिकीय कार्य, सचिव, फिल्म और टेलीविजन, दवा संबंधी कार्य, औषधि संबंधी कार्य, दवा विक्रेता, अपशिष्ट निपटान, मोटर-संबंधी उद्योग, अन्वेषक, ज़ेन चिकित्सक

शतभिषा नक्षत्र में जन्में प्रसिद्ध लोग: पॉल न्यूमैन, रॉबिन विलियम्स, एल्विस प्रेस्ली, जे एडगर हूवर, पॉल क्ली, जो डिमैगियो

अनुकूल गतिविधियां: व्यापारिक सौदे व अनुबंध पर हस्ताक्षर करना, जमीन व संपत्ति का सौदा, शिक्षा, यात्रा, बाइक की सवारी, नए वाहनों का संग्रह, मनोरंजक उद्यम, ध्यान, यौन क्रिया, खगोल विज्ञान व ज्योतिष, दवा, चिकित्सा, मीडिया आयोजन, तकनीकी कार्यकलाप, समुद्र / महासागर की यात्रा

प्रतिकूल गतिविधियां: विवाह, प्रसव, प्रजनन उपचार, मुक़दमा, तर्क, नकारात्मक कार्रवाई, सामान्य रूप से नई शुरुआत, बहुत अधिक सामाजिककरण, वित्तीय मसले, वस्त्र या गहने खरीदना, घरेलू कार्य

पवित्र मंदिर: थिरुप्पुहालूर कृपापूर्ण करुणधारकूजहि सामेधा श्री अग्निश्वर मंदिर

शतभिषा नक्षत्र से संबंधित यह मंदिर भारत में तमिलनाडु राज्य के थंजावुर जिले में थिरुप्पुहालूर में स्थित है| कृपापूर्ण करुणधारकूजहि सामेधा श्री अग्निश्वर नाम से प्रसिद्ध इस मंदिर में दिव्य ऊर्जा समाहित है जो भूत, वर्तमान व भविष्य को प्रकट करने में सक्षम है।

शतभिषा नक्षत्र दिवस पर इस नक्षत्र में उत्पन्न लोगों को भगवान शिव के श्री अग्निश्वर रूप का तिल के तेल व चंदन लेप से अभिषेक करना चाहिए| यदि शतभिषा नक्षत्र शनिवार को आए तब उन्हें यह अनुष्ठान विशेष रूप से करना चाहिए| भगवान श्री अग्निश्वर के निमित जलाभिषेक, पूजा-अर्चना व यज्ञ अनुष्ठान करना भी शुभ होता है| इन अनुष्ठानों को संपन्न करने से रोगों से उभरने में सहायता मिलती है| इस मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना करने से शनि ग्रह के दुष्प्रभावों से उत्पन्न समस्याओं को काबू करने में सहायता मिलती है।

इस पवित्र स्थल पर दूध व चावल से बने खाद्य पदार्थ के दान के अतिरिक्त अर्धचन्द्राकार रूप में तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करके अर्पित करना शुभ माना जाता है| परोपकारी या मानव कल्याण से जुड़े कार्यों में भाग लेना भी लाभकारी है| अन्य नक्षत्रों में जन्मे लोग भी यहाँ पूजा-अर्चना व अभिषेक करके भगवान शिव की कृपा प्राप्त कर सकते हैं| चित्तिरई माह (15 अप्रैल से 14 मई) के दौरान शतभिषा नक्षत्र आने पर यह अनुष्ठान करना विशेष रूप से शक्तिशाली है। इस मंदिर की यात्रा करने से उत्तम स्वास्थ्य व दीर्घायु की प्राप्ति होती है|

यह मान्यता है कि शतभिषा नक्षत्र दिवस पर प्रथम चंदन वृक्ष उत्पन्न हुआ था| इस पवित्र स्थल पर स्वयं के हाथों से चंदन को पीसना एक शुभ सेवा माना जाता है। कोई भी व्यक्ति इस चंदन के लेप द्वारा देवता का अभिषेक करके मन की शांति व आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त कर सकता है। यदि चंदन के लेप को प्रसाद के रूप में बाँटा जाए या मस्तक पर लगाया जाए तो इससे चिंता कम हो जाती है व दिव्य ऊर्जा प्राप्त होती है।

शतभिषा नक्षत्र में जन्में लोगों के लिए वेदों द्वारा निर्धारित धूप कदंब नामक जड़ी-बूटी से निर्मित है|

इस धूप को जलाना उस विशिष्ट नक्षत्र हेतु एक लघु यज्ञ अनुष्ठान करने के समान है| एक विशिष्ट जन्मनक्षत्र के निमित किए गए इस लघु अनुष्ठान द्वारा आप अपने ग्रहों की आन्तरिक उर्जा से जुड़कर सकारात्मक परिणाम प्राप्त करने में सक्षम होंगे|

एक विशिष्ट नक्षत्र दिवस पर अन्य नक्षत्र धूपों को जलाने से आप उस दिन के नक्षत्र की ऊर्जा से जुड़कर अनुकूल परिणाम प्राप्त करते हैं| आपको यह सलाह दी जाती है कि आप कम से कम अपने व्यक्तिगत नक्षत्र से जुड़ी धूप को प्रतिदिन जलाएं ताकि आपको उस नक्षत्र से जुड़ी सकारात्मक उर्जा प्राप्त होती रहे|

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