सनातन परंपरा में पूजा का विशेष महत्व है। प्रतिदिन भगवान की पूजा करने के कुछ नियम भी होते हैं, जिनका पालन प्रत्येक साधक को अवश्य करना चाहिए। मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए और शुभ फल पाने के लिए भगवान की पूजा का आसन, हवन की विधि, पूजा का मंत्र और उसे पढ़ने की विधि, अपने देवता के सामने दीपक जलाने या आरती करने का नियम आदि होता है। एक साधक को इस बात की जानकारी होनी चाहिए। आइए जानते हैं कि भगवान की पूजा करते समय हमें किन खास बातों का ध्यान रखना चाहिए।

– भगवान की नित्य पूजा स्नान और ध्यान के बाद हमेशा शुद्ध और प्रसन्न मन से करनी चाहिए।
– हमें सदैव पवित्र एवं पवित्र भूमि पर आसन बिछाकर ईश्वर की साधना करनी चाहिए, जमीन पर ऊनी आसन पर बैठकर पूजा करनी चाहिए।
– भगवान की नित्य पूजा हमेशा निश्चित समय और निश्चित स्थान पर करनी चाहिए।
– अपनी मूर्ति की पूजा हमेशा पूर्व, उत्तर या ईशान कोण की ओर मुख करके करनी चाहिए। पूजा करते समय हमारी पीठ कभी भी देवता की ओर नहीं होनी चाहिए।
– चंदन को तांबे के बर्तन में नहीं रखना चाहिए और न ही देवी-देवताओं को पतला चंदन लगाना चाहिए।
– भगवान के लिए दीपक जलाने के लिए चावल को दीपक के नीचे रखना चाहिए। पूजा के समय कभी भी दीपक से दीपक नहीं जलाना चाहिए।
– पंचदेव- सूर्य, श्री गणेश, दुर्गा, शिव और श्री विष्णु भगवान की नित्य पूजा अवश्य करनी चाहिए।
– नित्य पूजा में भगवान की सुबह शाम आरती करनी चाहिए। हो सके तो इसे पांच बार भी कर सकते हैं। वैसे तो दिन में कम से कम एक बार आरती जरूर करनी चाहिए।
– आरती हमेशा खड़े होकर करें और पहले चार बार अपने प्रिय भगवान के चरणों की ओर, फिर दो बार नाभि की ओर और अंत में एक बार मुख की ओर ले जाएं। ऐसा कुल मिलाकर सात बार करें। आरती करने के बाद उसमें से जल डालें और प्रसाद के रूप में सभी लोगों पर छिड़कें। आरती के बाद इसे हमेशा दोनों हाथों से ग्रहण करें।
– बिना आसन के पूजा नहीं करनी चाहिए। पूजा के बाद अपने आसन के नीचे दो बूंद जल डालकर माथे पर लगाएं, तभी उठे, नहीं तो आपकी पूजा का फल देवराज इंद्र को जाता है।