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मूल नक्षत्र

मूल (धनु राशि में 0°00 -13°20′ तक)

बिच्छू की पूंछ मूल नक्षत्र का प्रतिनिधित्व करती है जिसमें एप्सिलोन, म्यू, जीटा, एटा, थीटा, लोटा , कापा, अपसिलॉन और लैम्ब्डा स्कॉर्पिओनिस नामक नौ तारे शामिल हैं| यह नक्षत्र हमारी आकाशगंगा के बाईं ओर स्थित है जोकि मूल नक्षत्र की प्रकृति का सूचक है। इस नक्षत्र में उत्पन्न लोगों के पास एक जिज्ञासु मस्तिष्क होता है जो उन्हें चीजों की जड़ तक पहुंचने में सक्षम बनाता है। ऐसा व्यक्ति मूल रूप से जड़ी-बूटियों व चिकित्सा संबंधी विज्ञान का कुशल जानकार हो सकता है| यह नक्षत्र अनुसंधान, अन्वेषण व ख़ोज का समर्थन करता है। इस नक्षत्र की अधिपति देवी निरृति हैं जो इस नक्षत्र को हानि और विनाश की ऊर्जा प्रदान करती हैं| गहरे स्तर पर इस विनाशकारी उर्जा का प्रयोग आत्मसमर्पण व परिवर्तन के लिए किया जा सकता है।

सामान्य विशेषताएँ: गहरी दार्शनिक प्रकृति तथा एक जिज्ञासु मनोवृत्ति, किसी भी विषय की जड़ तक खोज करने वाला, अति आत्मविश्वासी, समृद्ध सुखी, दूसरों को चोट पहुंचाने का इच्छुक नहीं, दृढ़ और स्थिर विचारों वाला, विलासितापूर्ण जीवन जीने वाला|
अनुवाद: एक जड़, वाम, गुप्त मर्म
प्रतीक: जड़ों का बंधा गुच्छा या शेर की पूँछ
पशु प्रतीक: कुता
अधिपति देव: प्रजापति
शासक ग्रह: केतु
केतु ग्रह के अधिपति देव: गणेश जी
प्रकृति: राक्षस (दानव)
ढंग: सक्रिय
संख्या: 19 (प्रारंभ व अंत से संबंधित है|)
लिंग: नपुंसक
दोष: वात
गुण: तामसिक
तत्व: वायु
प्रकृति: तीव्र व भयानक
पक्षी: लाल गिद्ध
सामान्य नाम: अंजन, कम्मारा
वानस्पतिक नाम: हार्डविकिआ बिनाटे
बीज ध्वनि: ये, यो, भा, भी
ग्रह से संबंध: धनु राशि के स्वामी के रूप में गुरु इस नक्षत्र से संबंधित है जो परिवर्तन और विस्तार से जुड़ा है|

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प्रत्येक नक्षत्र को चार चरणों में विभाजित किया जाता है जिन्हें पद कहते हैं| मूल नक्षत्र के विभिन्न पदों में जन्म लेने वाले लोगों के अधिक विशिष्ट लक्षण होते हैं:

पद:

प्रथम पद धनु राशि का 00°00′ – 03°20′ भाग मंगल ग्रह द्वारा
शासित
ध्वनि: ये
सूचक शब्द: अन्वेषण
द्वितीय पद धनु राशि का 03°20′ – 06°40′ भाग शुक्र ग्रह द्वारा शासित
ध्वनि: यो
सूचक शब्द: रचनात्मकता
तृतीय पद धनु राशि का 06°40′ – 10°00′ भाग बुध ग्रह द्वारा शासित
ध्वनि: भा
सूचक शब्द: अभिव्यक्ति
चतुर्थ पद धनु राशि का 10°00′ – 13°20′ भाग चंद्र ग्रह द्वारा शासित
ध्वनि: भी
सूचक शब्द: भावना

शक्ति: अहंकारी, रूपवान, लोगों को बहलाकर या फुसलाकर अपनी जरूरतें पूर्ण करने वाला, उत्तम राजनेता, सावधान, चतुर, आरामदायक जीवन जीने में सक्षम, उत्तम भाग्य वाला, सफलता हेतु दृढ संकल्पित, विद्वान, वाक् कुशल, आध्यात्मिक सलाहकार, उदार, सफल, दृढ निश्चयी, विदेश में भाग्य उदय, उत्तम जीवन जीने का शौक़ीन, शांतिप्रिय, साहसी, बहादुर, खोजकर्ता, धैर्य के साथ प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करने वाला|

कमजोरियाँ: असुरक्षित, दूसरों का विश्वासपात्र नहीं, लक्ष्य के प्रति केंद्रित, दूसरों की परवाह न करने वाला, अभिमानी, स्वयं के लिए विनाशकारी, जिद्दी, अपनी उपलब्धियों का नाश करने वाला, अनेक असफल प्रेम व वैवाहिक संबंधों वाला, बोरियत के प्रति अल्प सहनशील, स्वयं के लिए असुरक्षाएं पैदा करने वाला, दुविधाग्रस्त, संबंधों के प्रति चंचल, अभिमानी, स्वार्थी, वासना और क्रोध से भरा, बहुत अधिक लेता है और बहुत कम लौटता है|

कार्यक्षेत्र: व्यापार, विक्रय, चिकित्सक, औषधि बनानेवाला, दार्शनिक, सार्वजनिक वक्ता, वादी, उपदेशक, लेखक, वकील, राजनेता, आध्यात्मिक शिक्षक, चिकित्सक, औषधि विशेषज्ञ, दंत चिकित्सक, मनोचिकित्सक, तपस्वी, पुलिस अधिकारी, जांचकर्ता, सैनिक, आनुवंशिक शोधकर्ता, खगोलविद , अंत्येष्टि अरथी या जनाजे का प्रबंध करनेवाला, रॉक संगीतकार, तांत्रिक अध्ययन, ख़जाने की ख़ोज करने वाला, खनन उद्योग, विनाशकारी कार्य

मूल नक्षत्र में जन्में प्रसिद्ध लोग: दलाई लामा, अर्नोल्ड श्वार्जनेगर, अल गोर, जुडी गारलैंड, बिली ग्राहम

अनुकूल गतिविधियां: किसी भी मामले की जड़ तक जाँच करना, ज्ञानार्जन, जड़ी-बूटियों और दवाओं का प्रबंध करना, रोपण व बागवानी, कृषि, रूप-रेखा तैयार करना, वक्तृत्व संबंधी गतिविधियाँ, प्रबलता, गतिशीलता, मकान की नीव रखना, निर्माण कार्य, घर ख़रीदना व बेचना, कामुकता व्यक्त करना, चिंतन और ध्यान करना , विज्ञान और ज्योतिष का अध्ययन प्रारंभ करना, साहसिक कार्य करना

प्रतिकूल गतिविधियां:
संतुलन, कुशलता या कूटनीति से जुड़े कार्य, विवाह समारोह, धन उधार देना या लेना, वित्तीय लेन-देन
पवित्र मंदिर: माप्पिडु सुंदर सिंहेश्वर मंदिर

यह सुंदर सिंहेश्वर मंदिर भारत में चेन्नई के निकट ठक्कोलम मार्ग पर माप्पिडु में स्थित है। यह पवित्र मंदिर मूल नक्षत्र की उर्जा से संबंधित है तथा इस नक्षत्र में पैदा लोगों के लिए इसका बहुत महत्व है| तमिल वर्णमाला की ध्वनि माप्पिडु मंदिर से घनिष्ठता से जुड़ी हुई है। भगवान शिव यहाँ श्री सिंहेश्वर के रूप में प्रकट हुए तथा उन्होंने महान संत अगस्थिया को तमिल वर्णमाला का एक पवित्र शब्द ‘नगा’ उपहार में दिया। माप्पिडु मंदिर में अगस्थिया ने यह ज्ञान सुधबुध मुनिवर नामक ऋषि को प्रदान किया जिन्होंने संपूर्ण विश्व के सम्मुख वर्णमाला प्रस्तुत की।

इन पवित्र ध्वनियों के कारण माप्पिडु मंदिर संगीत की पवित्र ऊर्जा से परिपूर्ण है| मूल नक्षत्र दिवस संगीत के देवता श्री सिंहेश्वर जी की पूजा-अर्चना करने के लिए सबसे शुभ दिन है| इस दिवस पर उन्होंने ‘ॐ’ की ध्वनि को सिंह की गर्जना के रूप में उत्पन्न किया| इस मंदिर में श्री अंजनेयर नामक एक भक्त ने श्री सिंहेश्वर जी की पूजा-अर्चना की थी| इसके उपरांत मूल नक्षत्र दिवस पर अंजनेयर को आशीर्वाद प्राप्त हुआ क्योंकि देवी सरस्वती ने उनकी जीभ पर ‘ॐ’ को एक सफेद कमल पुष्प से लिखा था।

मूल नक्षत्र में जन्में लोगों के लिए वेदों द्वारा निर्धारित धूप अंजन नामक जड़ी-बूटी से निर्मित है|

इस धूप को जलाना उस विशिष्ट नक्षत्र हेतु एक लघु यज्ञ अनुष्ठान करने के समान है| एक विशिष्ट जन्मनक्षत्र के निमित किए गए इस लघु अनुष्ठान द्वारा आप अपने ग्रहों की आन्तरिक उर्जा से जुड़कर सकारात्मक परिणाम प्राप्त करने में सक्षम होंगे|

एक विशिष्ट नक्षत्र दिवस पर अन्य नक्षत्र धूपों को जलाने से आप उस दिन के नक्षत्र की ऊर्जा से जुड़कर अनुकूल परिणाम प्राप्त करते हैं| आपको यह सलाह दी जाती है कि आप कम से कम अपने व्यक्तिगत नक्षत्र से जुड़ी धूप को प्रतिदिन जलाएं ताकि आपको उस नक्षत्र से जुड़ी सकारात्मक उर्जा प्राप्त होती रहे|

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