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धनिष्ठा नक्षत्र

धनिष्ठा (23°20′ मकर राशि से 6°40′ कुंभ राशि तक)

धनिष्ठा नक्षत्र डेल्फिनी तारा समूह के अंतर्गत आने वाले चार तारों से मिलकर बना है| आकाश में अल्फा, बीटा, गामा व डेल्टा डेल्फिनी नामक तारे एक प्रकार की समुद्री मछली डॉल्फ़िन का सिर बनाते हैं| ज्योतिष में धनिष्ठा नक्षत्र मकर व कुंभ राशि के अंतर्गत आता है| यह नक्षत्र एक संगीतमय ढ़ोल व स्वर समता से संबंधित है| इस नक्षत्र में उत्पन्न हुए लोगों में संगीत के प्रति प्राकृतिक योग्यता होती है तथा जीवन के समस्त पहलुओं से उनका उत्तम तालमेल होता है| ऐसे लोगों की साहसिक प्रकृति होती है तथा वे यात्राएं करने में रूचि रखते हैं| धनिष्ठा नक्षत्र के अधिपति अष्ट वसु इस नक्षत्र में पैदा लोगों को विभिन्न प्रकार के व्यक्तित्व गुण प्रदान करते हैं जो एक अच्छा और समृद्ध जीवन जीने के लिए आवश्यक हैं। धनिष्ठा नक्षत्र में पैदा लोग व्यावहारिक व दानी होते हैं तथा एक समान उद्देश्य के लिए लोगों को एकजुट करने की क्षमता रखते हैं।

सामान्य विशेषताएँ: उदार, अमीर व्यक्ति, साहसी और संगीत के शौकीन
अनुवाद: “सर्वाधिक धनी”, “सर्वाधिक लाभकारी”, “सर्वाधिक सुना जाने वाला”, “सर्वाधिक प्रसिद्ध”
प्रतीक: संगीतमय ढोल
पशु प्रतीक: एक शेरनी
अधिपति देव: अष्ट वसु, ऊर्जा और प्रकाश के सौर देवता
शासक ग्रह: मंगल
मंगल ग्रह के अधिपति देव: मुरुगा
प्रकृति: राक्षस (दानव)
ढंग: सक्रिय
संख्या: 23 (यह संख्या पूर्णता की प्रतीक है|)
लिंग: स्त्री
दोष: पित
गुण: तामसिक
तत्व: आकाश
प्रकृति: चर
पक्षी: सुनहरी मधुमक्खी
सामान्य नाम: खेजड़ी
वानस्पतिक नाम: प्रोसोपिस सेनेरिया
बीज ध्वनि: गा, गी, गू, गे
ग्रह से संबंध: मकर व कुंभ राशि के स्वामी के रूप में शनि इस नक्षत्र से संबंधित है जो अनुशासन प्रदान करता है| राहु मीडिया से संबंधित है|

dhanishtha-nakshatra

प्रत्येक नक्षत्र को चार चरणों में विभाजित किया जाता है जिन्हें पद कहते हैं| धनिष्ठा नक्षत्र के विभिन्न पदों में जन्म लेने वाले लोगों के अधिक विशिष्ट लक्षण होते हैं:

पद:

प्रथम पद मकर राशि का 23° 20’ – 26° 40′ भाग सूर्य ग्रह द्वारा
शासित
ध्वनि: गा
सूचक शब्द: महत्त्वाकांक्षी
द्वितीय पद मकर राशि का 26° 40’ – 30° 00’ भाग बुध ग्रह द्वारा
शासित
ध्वनि: गीघ
सूचक शब्द: निपुण
तृतीय पद कुंभ राशि का 0° 00’ – 3° 20’ भाग शुक्र ग्रह द्वारा शासित
ध्वनि: गू
सूचक शब्द: आशावादी
चतुर्थ कुंभ राशि का 3° 20’ – 6° 40’ भाग मंगल ग्रह द्वारा
शासित
ध्वनि: गे
सूचक शब्द: आक्रामक

शक्ति: अनुभवी, उत्तम जीवन जीने वाला, दानी, बहादुर, विदेश में उत्तम प्रदर्शन करने वाला, आध्यात्मिक और भौतिक दोनों स्तरों पर जीने वाला, उदारवादी, दयालु, निर्भीक, उत्तम बातूनी, संगीत और नृत्य का आनंद लेने वाला, उत्तम संगठनात्मक क्षमताओं वाला, महत्वाकांक्षी, ज्योतिष में कुशल, प्राचीन और रहस्यमय लेख पसंद करने वाला

कमजोरियाँ: आक्रामक, क्रूर, अविवेकी, चिंताग्रस्त, दूसरों को चोट पहुँचाने वाला, कहानियां बनाने वाला, झूठा, तार्किक, बहुत बातूनी, असंगत साथी का चयन करने वाला, लापरवाह, यौन समस्याओं से ग्रसित, विलंब से विवाह करने वाला या अविवाहित, स्वयं के लिए सब कुछ चाहने वाला, स्व अवशोषित, आत्मासक्त

कार्यक्षेत्र: संगीतकार, नर्तक, कलाकार, चिकित्सक, शल्य चिकित्सक, अचल संपत्ति प्रतिनिधि, संपत्ति प्रबंधन, वैज्ञानिक, शोधकर्ता, भौतिक विज्ञानी, अभियांत्रिकी, खनन, दान कार्य, कवि, मनोरंजन व्यवसाय, गीतकार, संगीत वाद्ययंत्र के निर्माता, गायक, रत्न विक्रेता, खिलाड़ी, सैन्य कर्मी, ज्योतिषी, मनोविज्ञान, समग्र चिकित्सक

धनिष्ठा नक्षत्र में जन्में प्रसिद्ध लोग: ऑरसन वेलेस, रिचर्ड निक्सन, मर्लिन मोनरो, वुडी एलन, राजकुमारी डायना, रेनर मैरी रिलके

अनुकूल गतिविधियां: संगीत, नृत्य, उत्सव, संगीत, समारोह, यात्रा, रचनात्मक गतिविधियाँ, धार्मिक अनुष्ठान, धन उधार देना, वित्तीय लेन देन, ध्यान, योग, बागवानी, रोगों की चिकित्सा, शिक्षा संबंधी कार्य प्रारंभ करना

प्रतिकूल गतिविधियां: विवाह या यौन क्रियाकलाप, प्रतिबंधक व्यवहार, नई साझेदारी, घरेलू कार्य, कुशलता, सरलता या कोमलता संबंधी गतिविधियाँ

पवित्र मंदिर: कोरुक्काई श्री पुष्पवल्ली सामेधा श्री ब्रह्मा ज्ञानपुरीश्वर मंदिर

यह पवित्र मंदिर भारत के तमिलनाडु राज्य में कुंभकोनम के निकट कोरुक्काई में स्थित है। इस मंदिर में भगवान शिव श्री ब्रह्मा ज्ञानपुरीश्वर के रूप में प्रकट हुए तथा उन्होंने भगवान ब्रह्मा को आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान किया था| श्री ब्रह्मा ज्ञानपुरीश्वर की कृपा द्वारा आपकी संतान को शिक्षा में सफलता मिलती है तथा उनकी एकाग्रता बढती है। श्री ब्रह्मा व उनकी पत्नी सरस्वती इस मंदिर में नियमित रूप से उपस्थित होते हैं|

भगवान शिव के पवित्र बैल नंदी की स्थिति कोरुक्काई मंदिर का सर्वाधिक महत्वपूर्ण पहलू है| यह श्री ब्रह्मा ज्ञानपुरीश्वर जी के सम्मुख होने के बजाय उनके निकट है| जिन लोगों ने जीवन में गंभीर गलतियां की हैं या जिनको अशांति रहती है उन्हें सुपारी से निर्मित माला नंदी जी को अर्पित करनी चाहिए| माला अर्पित करने के बाद कोई भी व्यक्ति पवित्र बैल के कान में अपनी समस्याओं को बोल सकता है| इसके अलावा मंदिर में गरीब स्त्रियों को माला, ताम्बूल पत्र, सुपारी, हल्दी तथा साड़ी देना भी शुभ माना जाता है। जो लोग इस मंदिर की यात्रा करते हैं उन्हें भगवान शिव, देवी पार्वती व नंदी जी की कृपा से असीम लाभ मिलता है| भगवान शिव आपकी वित्तीय बाधाओं को दूर कर सकते हैं तथा उनकी पूजा संबंधों में चल रही समस्याओं को दूर करने हेतु भी उपयोगी है। शनिवार प्रदोष दिवस पर कोरुक्काई मंदिर की यात्रा करना विशेष रूप से लाभकारी है|

यह मंदिर धनिष्ठा नक्षत्र में उत्पन्न हुए लोगों के लिए एक पवित्र स्थल है क्योंकि इस नक्षत्र में दिव्य ज्ञान से जुड़ने के अनेक आध्यात्मिक संपर्क निहित हैं| आवनी अविट्टम (15 अगस्त से 14 सितंबर तक की समयावधि) के दौरान इस मंदिर की यात्रा करना अनुकूल होता है| इस पवित्र मंदिर की परिक्रमा करने से व्यक्ति की आध्यात्मिक ऊर्जा में वृद्धि होती है| अन्य नक्षत्रों में जन्मे लोग भी कोरुक्काई में श्री ब्रह्मा ज्ञानपुरीश्वर जी की पूजा-अर्चना व अभिषेक करके लाभान्वित हो सकते हैं|

धनिष्ठा नक्षत्र में जन्में लोगों के लिए वेदों द्वारा निर्धारित धूप खेजड़ी नामक जड़ी-बूटी से निर्मित है|

इस धूप को जलाना उस विशिष्ट नक्षत्र हेतु एक लघु यज्ञ अनुष्ठान करने के समान है| एक विशिष्ट जन्मनक्षत्र के निमित किए गए इस लघु अनुष्ठान द्वारा आप अपने ग्रहों की आन्तरिक उर्जा से जुड़कर सकारात्मक परिणाम प्राप्त करने में सक्षम होंगे|

एक विशिष्ट नक्षत्र दिवस पर अन्य नक्षत्र धूपों को जलाने से आप उस दिन के नक्षत्र की ऊर्जा से जुड़कर अनुकूल परिणाम प्राप्त करते हैं| आपको यह सलाह दी जाती है कि आप कम से कम अपने व्यक्तिगत नक्षत्र से जुड़ी धूप को प्रतिदिन जलाएं ताकि आपको उस नक्षत्र से जुड़ी सकारात्मक उर्जा प्राप्त होती रहे|

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