शतभिषा (कुंभ राशि के 6°40′ से 20°00′ तक) कुंभ राशि के अंतर्गत धुंधले तारों का एक समूह शतभिषा नक्षत्र का निर्माण करता है। रात्रि के आकाश में जब इस नक्षत्र समूह पर गौर किया जाता है तब सदलाच्बिया (गामा एक्वरी) नामक तारा सबसे उज्जवल प्रतीत होता है। शतभिषा का अर्थ “100 चिकित्सक” है तथा यह […]
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धनिष्ठा (23°20′ मकर राशि से 6°40′ कुंभ राशि तक) धनिष्ठा नक्षत्र डेल्फिनी तारा समूह के अंतर्गत आने वाले चार तारों से मिलकर बना है| आकाश में अल्फा, बीटा, गामा व डेल्टा डेल्फिनी नामक तारे एक प्रकार की समुद्री मछली डॉल्फ़िन का सिर बनाते हैं| ज्योतिष में धनिष्ठा नक्षत्र मकर व कुंभ राशि के अंतर्गत आता […]
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श्रवण (मकर राशि में 10°00′ – 23°20′ तक) श्रवण नक्षत्र में अल्टेएर, अलशेन और ताराज़ेड नामक तारे शामिल हैं जो रात्रि को आकाश में दिखाई देते हैं| श्रवण शब्द का अर्थ ‘सुनना’ है तथा इस नक्षत्र के प्रतीक कान हैं| यह नक्षत्र सुनने और सीखने से संबंधित है। जैसे प्राचीन संस्कृति में मौखिक परंपराओं के […]
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उत्तराषाढ़ा (26°40′ धनु राशि से 10°00′ मकर राशि तक) ज्योतिष में उत्तराषाढ़ा नक्षत्र धनु व मकर राशि के अंतर्गत आता है| रात्रि को आकाश में उत्तराषाढ़ा नक्षत्र सिग्मा, ताऊ, फी व जीटा सगीट्टारी तारों के रूप में दिखाई देता है| उत्तराषाढ़ा नक्षत्र मानवता के लिए गहन ईमानदारी व लगाव रखता है| इस नक्षत्र के अधिपति […]
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पूर्वाषाढ़ा (धनु राशि में 13°20′ – 26°40′ तक) पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र कौस ऑस्ट्रलिस , कौस बोरेलिस और कौस मीडिया नामक तीन तारों से मिलकर बना है तथा यह धनु राशि के मध्य भाग में स्थित है। ये तारे रात्रि को आकाश में आसानी से दिखाई देते हैं तथा एक पंखें के सदृश लगते हैं| इस नक्षत्र […]
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