21 जून 2017 को शनिदेव वृश्चिक राशि में वक्री हो जाएंगे| वह इस राशि में 24 अगस्त 2017 तक वक्री अवस्था में रहेंगे| तब वह मार्गी होकर 26 अक्टूबर 2017 तक इसी राशि में रहेंगे| इस गोचर के दौरान शनि अपनी शत्रु राशि वृश्चिक में रहेंगे तथा ज्येष्ठा नक्षत्र से गोचर करेंगे| इस नक्षत्र का स्वामी स्वामी का मित्र है| इसलिए आप इस कार्मिक ग्रह के मिलेजुले प्रभाव इस राशि में गोचर के दौरान अनुभव करेंगे|
शनि की 65 दिनों की वक्री व 62 दिनों की मार्गी अवस्था के दौरान आप अधिक परिवर्तन, चिकित्सा में नए आविष्कार तथा राजनीतिक परिवर्तन की उम्मीद कर सकते हैं। दृढ़ता व धैर्य बढाने हेतु यह अवधि उत्तम है| यही वह समय है जहां आप अपने अध्यात्मिक विकास की अधिकतम वृद्धि कर सकते हैं तथा आत्मज्ञान प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं, परोपकार के कार्यों में भाग ले सकते हैं या पीडि़त लोगों के लिए काम कर सकते हैं।
खोए हुए अवसरों को पुनः प्राप्त करने हेतु यह अवधि सर्वोत्तम है| यह एक ऐसी अवधि है जहां शनि आपको जीवन की वास्तविकता दिखा सकते हैं। आपको अपने व्यंग्यात्मक भाषण, अविवेकी तथा आवेगी प्रकृति के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता है। किसी भी जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचने या किसी भी महत्वपूर्ण जीवन को बदलने के फैसले लेने से पहले ध्यान से सोचना बेहतर है।
धनु से वृश्चिक राशि में वक्री अवस्था के दौरान, शनि मूल नक्षत्र से वृश्चिक राशि के अंतर्गत ज्येष्ठा नक्षत्र में वक्री गति से प्रवेश करेंगे, जिसे वैदिक ज्योतिष में गंडांत बिंदु के रूप में जाना जाता है। जलतत्व राशि में अंतिम चरण तथा अग्नितत्व राशि में प्रथम चरण, जिसे गंडांत कहा जाता है, को ग्रहों के लिए बुरा माना जाता है क्योंकि ग्रह जलतत्व राशि से अग्नि तत्व राशि में गोचर करते समय सहज नहीं होते हैं| हालांकि, इस बिंदु पर कुछ अच्छे प्रभाव भी देखे जाते हैं क्योंकि केतु और शनि जैसे ग्रह आध्यात्मिक और रहस्यमय अनुभव दे सकते हैं।
वृश्चिक राशि में शनि का वक्री होना खोए हुए अवसरों को पुनः प्राप्त करने हेतु एक सर्वोत्तम अवधि है| यह एक ऐसी अवधि है जहां शनि आपको जीवन की वास्तविकता दिखा सकते हैं। आपको अपने व्यंग्यात्मक भाषण, अविवेकी तथा आवेगी प्रकृति के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता है। किसी भी जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचने या किसी भी महत्वपूर्ण जीवन को बदलने के फैसले लेने से पहले ध्यान से सोचना बेहतर है। उपचारात्मक अनुष्ठानों में भाग लेकर शनि ग्रह को शांत करके इस अवधि को आप आसानी से पार कर सकते हैं।
आप क्या प्राप्त करेंगे?
आपको पवित्र विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।
डॉ. पिल्लै के अनुसार
यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।
कृपया ध्यान दें – इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिया जाने वाला प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिया जाएगा। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।
वास्तविक गोचर होने से 2 महीने पहले आप शनि के गोचरीय प्रभावों को देखना शुरू करेंगे। भगवान विष्णु और शिव के आध्यात्मिक मिलन से उत्पन्न हुए भगवान अयप्पा में शनि की बुरा प्रभावों को नियंत्रित करने की अनोखी शक्तियां हैं।
भगवान अयप्पा और शनि के बीच यह संबंध ही भगवान अयप्पा से संबंधित व्यक्तिगत यज्ञ अनुष्ठान का आधार है| जो लोग शनि की साढ़ेसाती, शनि की अष्टम व चतुर्थ भाव में स्थिति तथा अन्य किसी भी शनिदोष से पीड़ित हैं, वे इस अनुष्ठान के माध्यम से शनि ग्रह के दुष्प्रभावों से बच सकते हैं|
आपकी जन्मकुंडली में शनि के इस गोचर प्रभाव का विश्लेषण करने के बाद आपकी सुविधानुसार इस व्यक्तिगत यज्ञ का समय सुनिश्चित किया जाएगा| अपने इस व्यक्तिगत अयप्पा यज्ञ अनुष्ठान पैकेज को अवश्य आर्डर करें | भगवान अयप्पा के आवाहन व उनकी कृपा द्वारा आप शनि ग्रह के दुष्प्रभावों को नियंत्रित कर सकते हैं|
आप क्या प्राप्त करेंगे?
आपको पवित्र विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।
डॉ. पिल्लै के अनुसार
यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।
कृपया ध्यान दें – इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिया जाने वाला प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिया जाएगा। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।
2017 के सबसे महत्वपूर्ण गोचरों में से एक शनि का धनु राशि में गोचर है| आपका जन्मकुंडली और आशीष अद्वितीय हैं और हमारे विशेषज्ञ ज्योतिषी के साथ यह व्यक्तिगत लाइव ज्योतिष परामर्श आपको यह समझने में मदद कर सकता है कि शनि की अवधि आपके जीवन के विभिन्न क्षेत्रों पर कैसे प्रभाव डालती है। इस सेवा के माध्यम से आपको ग्रहों के दुष्प्रभावों को कम करने और ग्रहों की अनुकूलतम ऊर्जा से सर्वोत्तम लाभ लेने हेतु उपचार सहित विशिष्ट विवरण प्रदान किए जाएंगे।
अभिमंत्रित घोड़े की नाल को जन्मकुंडली में शनि के प्रतिकूल प्रभाव को कम करने हेतु एक प्रभावी उपाय के रूप में जाना जाता है। यह आपको लाभ पहुंचा सकती है, खासकर यदि आप साढ़ेसाती(जो शनि की साढ़ेसात वर्ष की अवधि है), या अष्टम शनि (जब शनि चंद्रमा से अष्टम भाव में स्थित होता है|) या शनि महादशा( जो शनि की प्रमुख अवधि होती है) या शनि भुक्ति(जो शनि की छोटी अवधि है) आदि से से गुजर रहे हैं|
किसी भी वस्तु को अपने मालिक की चेतना प्राप्त होती है जब उसका प्रयोग लंबी अवधि के लिए किया जाता है| घोड़े की नाल इसी आध्यात्मिक सिद्धांत पर काम करती है| घोड़े की इस नाल को जब किसी भी घर के मुख्य द्वार के उपाय चंद्राकार अवस्था में लगाया जाता है, तब यह शनि ग्रह जनित दुर्भाग्य तथा नकारात्मकताओं का शमन करती है|
आप क्या प्राप्त करेंगे?
आपको पवित्र विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।
आपकी ओर से एक प्रतिनिधि व्यक्ति 1008 बार मंत्र लिखेगा, जिससे शनि ग्रह की ऊर्जा का आह्वान होता है। मंत्र लेखन एकाग्रता को बढाता है तथा इसकी लगातार पुनरावृत्ति प्रायोजक की चेतना को बदलने के लिए जानी जाती है। साथ ही प्रायोजक को मंत्र लेखकों की आजीविका का समर्थन करने हेतु अच्छे परिणाम प्राप्त होते हैं।
| चन्द्र राशि | शनि 2017-2020 में आपको कैसा लाभ देगा? |
|---|---|
| मेष | इस अवधि में शनि आपके जन्मकालीन चन्द्र से नवम भाव में रहेंगे जिसके फलस्वरूप आप काम-धंधे को लेकर लंबी दूरी की यात्राएं कर सकते हैं. भाग्य भी पूरी तरह से आपका साथ देगा और आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत बनेगी. |
| वृष | इस अवधि में शनि आपके जन्मकालीन चन्द्र से अष्टम भाव में रहेंगे. जिससे आपके कार्यक्षेत्र में कुछ बदलाव आएंगे. पैत्रिक संपति का लाभ आपको मिल सकता है. पिता को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां उठानी पड़ सकती हैं. गूढ़ विद्याओं के प्रति आपका रुझान बढ़ सकता है. |
| मिथुन | इस अवधि में शनि आपके जन्मकालीन चन्द्र से सप्तम भाव में गोचर करेंगे. व्यावसायिक साझेदारी से आपको लाभ मिल सकता है. जीवनसाथी, रिश्तों व आर्थिक स्थिति के लिए भी यह समय ख़ुशहाल रह सकता है. विवाह के इच्छुक लोगों का विवाह होना संभव है. |
| कर्क | इस अवधि में शनि आपके जन्मकालीन चन्द्र से छठे भाव में गोचर करेंगे. व्यापार को बढाने के लिए आप लोन ले सकते हैं. जीवनसाथी को स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहना होगा. कार्यक्षेत्र में आपकी काफी प्रगति होने के संकेत हैं. |
| सिंह | जन्मकालीन चन्द्र से पंचम भाव में शनि का यह गोचर संतान को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें दे सकता है. बिजनेस में आप नई बुलंदियाँ छू सकते हैं. आपके विवाह की बात कहीं पक्की हो सकती है. |
| कन्या | जन्मकालीन चन्द्र से चौथे भाव में शनि का यह गोचर आपके शत्रुओं पर भारी पड़ेगा. आप कर्जमुक्त हो सकते हैं. कार्यक्षेत्र में कड़ी मेहनत के बाद ही सफलता आपके हाथ लगेगी व रोग से मुक्त होकर स्वास्थ्य लाभ होगा. |
| तुला | जन्मकालीन चन्द्र से तीसरे भाव में शनि का यह गोचर आपकी भाग्यवृद्धि करेगा. आपको प्रचुर मात्रा में धनलाभ होगा. सेहत अच्छी रहेगी व शत्रुओं पर शानदार विजय प्राप्त होगी. कुल-मिलाकर यह समय आपके लिए काफी उत्तम रहेगा. |
| वृश्चिक | जन्मकालीन चन्द्र से दूसरे भाव में शनि का यह गोचर आपकी आर्थिक स्थिति और समृद्धि में वृद्धि करेगा. ज़मीन-जायदाद व प्रॉपर्टी से जुड़े मामलों में आपको लाभ मिलेगा. इस दौरान आप नया घर या वाहन भी ख़रीद सकते हैं. |
| धनु | इस अवधि में शनि आपके जन्मकालीन चन्द्र के ऊपर से गोचर करेंगे. जिसके फलस्वरूप आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी. छोटे भाई-बहनों का सहयोग आपको प्राप्त होगा. आप अपने कार्यक्षेत्र में आ रही बाधाओं से मुक्ति पा सकेंगे. |
| मकर | जन्मकालीन चन्द्र से बाहरवें भाव में शनि का यह गोचर आपके ख़र्चों में वृद्धि कर सकता है. आपको शैय्या सुख प्राप्त होने की संभावना रहेगी. आप किसी तीर्थ यात्रा पर जा सकते हैं अथवा अपने निवास स्थान से दूर रह सकते हैं. |
| कुंभ | जन्मकालीन चन्द्र से ग्याहवें भाव में शनि का यह गोचर आपको अनेक प्रकार के लाभ देने वाला हो सकता है. कार्यक्षेत्र में आपको मान-सम्मान की प्राप्ति होगी. सेहत उत्तम रहेगी. आपकी आर्थिक स्थिति दिनों-दिन मजबूत बनेगी. बड़े अधिकारियों का सहयोग आपको प्राप्त होगा और हर तरफ से आपको सहयोग व ख़ुशी हासिल होगी. |
| मीन | जन्मकालीन चन्द्र से दसवें भाव में शनि का यह गोचर आपके कार्यक्षेत्र, आय में कुछ बदलाव लेकर आ सकता है. जिस समृद्धि व सम्मान के लिए आप वर्षों से कड़ी मेहनत कर रहे थे वह इस अवधि में आपको प्राप्त हो सकता है. |
| अवधि | गति | नक्षत्र | राशि |
|---|---|---|---|
| 27 जनवरी 2017 से 05 अप्रैल 2017 तक | मार्गी | केतु | धनु |
| 06 अप्रैल 2017 से 20 जून 2017 तक | वक्री | केतु | धनु |
| 21 जून 2017 से 24 अगस्त 2017 तक | वक्री | बुध | वृश्चिक |
| 25 अगस्त 2017 से 26 अक्टूबर 2017 तक | मार्गी | बुध | वृश्चिक |
| 27 अक्टूबर 2017 से 02 मार्च 2018 तक | मार्गी | केतु | धनु |
| 03 मार्च 2018 से 17 अप्रैल 2018 तक | मार्गी | शुक्र | धनु |
| 18 अप्रैल 2018 से 05 जून 2018 तक | वक्री | शुक्र | धनु |
| 06 जून 2018 से 06 सितम्बर 2018 तक | वक्री | केतु | धनु |
| 07 सितम्बर 2018 से 27 नवंबर 2018 तक | मार्गी | केतु | धनु |
| 28 नवंबर 2018 से 29 अप्रैल 2019 तक | मार्गी | शुक्र | धनु |
| 30 अप्रैल 2019 से 17 सितम्बर 2019 तक | वक्री | शुक्र | धनु |
| 18 सितम्बर 2019 से 26 दिसम्बर 2019 तक | मार्गी | शुक्र | धनु |
| 27 दिसम्बर 2019 से 24 जनवरी 2020 तक | मार्गी | सूर्य | धनु |