वैदिक नववर्ष 2018 (सूर्य का मेष राशि में प्रवेश): सूर्य की उर्जा द्वारा अपने जीवन को ऊर्जावान बनाएं|
14 अप्रैल 2018
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“सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करने से तमिल नववर्ष प्रारंभ होता है। इस गोचर के दौरान बहुत अधिक परिवर्तनकारी ऊर्जा उपलब्ध रहती
है। आप अपने अंदर स्थित सूर्य ऊर्जा को सशक्त बना सकते हैं। यही वह काल है जिसमे आप अपने समय को बदल
सकते हैं। व्यापार तथा घरेलु जीवन में सफल हो सकते हैं। भाग्य में हुए बदलाव को महसूस कर सकते हैं। इस
समय परिवर्तन व चमत्कार करने के लिए कुछ विचित्र ग्रहीय संयोग भी उपलब्ध होंगे जो कि अपने आप में एक
अनोखा अवसर हैं।”
–डॉ. पिल्लै के अनुसार-
14 अप्रैल 2018 को सूर्य मेष राशि में गोचर करेगा| यह समय नए कार्यों को शुरू करने तथा सूर्य की उर्जा का उपयोग करके धन, स्वास्थ्य व समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त करने हेतु अत्यंत शुभ माना जाता है। वैदिक ज्योतिष में सूर्य को सबसे ज्यादा शक्तिशाली तब माना जाता है जब वह अपनी उच्च राशि मेष में होता है। वैदिक नववर्ष की शुरुआत से संबंधित इस शुभ दिवस पर एस्ट्रोवेद भगवान गणेश, नवग्रह व देवी सुन्दरा महालक्ष्मी जी की कृपा प्राप्त करने हेतु संपूर्ण वर्ष 3 भव्य यज्ञ अनुष्ठानों का आयोजन करेगा|
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इस दिन चंद्रमा उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा जो शनि द्वारा शासित है| चंद्रमा मीन राशि में बुध से युति करेगा| उत्तराभाद्रपद नक्षत्र युद्ध से संबंधित है तथा इसमें स्थिरता प्रदान करने की क्षमता है। कार्यक्षेत्र और संपति की स्थिरता हेतु यह दिवस सूर्यदेव की पूजा-अर्चना व प्रार्थना करने के लिए एक आदर्श दिन है| इस दिन सूर्य गुरु व शुक्र से युति करेगा जिससे यह दिवस प्रचुरता, सुख व विलासिता की प्राप्ति हेतु प्रार्थना करने के लिए एक शक्तिशाली दिन है|
डॉ पिल्लै कहते हैं कि प्रत्येक को स्वयं से यह पूछना चाहिए कि वे इस वैदिक नववर्ष की शुरुआत में अपने जीवन की संरचना किस प्रकार करना चाहते हैं तथा इस समयावधि के दौरान इस प्रकार की योजना बनाना बहुत ही शुभ है|
वैदिक नववर्ष आपके सभी सपनों व आकांक्षाओं को पूर्ण करने का दिन है। इस दिन की ज्योतिषीय स्थिति के आधार पर एस्ट्रोवेद ने आपके समस्त बुरे कर्मों व बाधाओं का शमन करने तथा संपूर्ण वर्ष सफलता व इच्छाओं की पूर्ति और 64 प्रकार की संपत्ति प्राप्त करने हेतु देवी सुन्दरा महालक्ष्मी जी का आवाहन करने के लिए लक्षित सेवाओं पर आधारित निम्नलिखित शक्तिशाली अनुष्ठानों का निर्माण किया है-
शुभ कार्यों का प्रारंभ करने के लिए भगवान गणेश का आवाहन किया जाता है| यह व्यापक रूप से प्रसिद्ध है कि किसी भी कार्य की शुरुआत करने से पहले भगवान गणेश की पूजा-अर्चना समस्त बाधाओं का शमन करके सफलता प्रदान कर सकती है| वैदिक नववर्ष पर भगवान गणेश के निमित इस 2000 वर्षीय प्राचीन शक्तिस्थल पर पवित्र यज्ञ करने से आपको सफलता व उच्च आत्मविश्वास की प्राप्ति हो सकती है तथा शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक, आर्थिक व आध्यात्मिक आदि समस्त स्तरों पर आने वाली बाधाएं नष्ट हो सकती हैं|
इस शक्तिस्थल से जुड़ी पौराणिक कथाओं के अनुसार सूर्य कूटीश्वर के रूप में भगवान शिव ने इस पवित्र शक्तिस्थल पर अपनी शक्तियों को पुनः प्राप्त किया था। वैदिक नववर्ष पर इस शक्तिस्थल में 9 ग्रहों के निमित 9 अग्नि कुंड बनाकर एक भव्य यज्ञ अनुष्ठान द्वारा आपको नवग्रहों की संयुक्त कृपा प्राप्त हो सकती है तथा आप अपने दुखों से राहत प्राप्त कर सकते हैं|
सुन्दरा महालक्ष्मी जी को समस्त प्रकार के वैभव व निधि की देवी कहा जाता है। वह सभी 64 प्रकार की लक्ष्मियों का एकल अवतार हैं| उनके दोनों पैरों में छह उंगलियां हैं जो अंक शास्त्र के अनुसार समृद्धि के कारक ग्रह शुक्र की प्रतीक हैं| वैदिक नववर्ष पर देवी लक्ष्मी के इस अनोखे रूप की पूजा-अर्चना करने से आपको 64 प्रकार की संपति, शुभता व प्रचुरता की प्राप्ति हो सकती है|
अर्चना करने से आपको संतान व भौतिक सुखों की प्राप्ति हो सकती है, दीर्घकालीन रोगों से छुटकारा मिल सकता है, वैवाहिक बाधाएं नष्ट हो सकती हैं, विद्या व ज्ञान की प्राप्ति हो सकती है|
इस शक्तिस्थल से संबंधित प्रधान देवता के निमित विशेष जलाभिषेक व पूजा-अर्चना करने से आपको नेत्र संबंधी रोगों व सूर्य पीडा से मुक्ति मिलकर प्रसन्नता की प्राप्ति हो सकती है|
शक्तिस्थल से संबंधित पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान राम ने इस शक्तिस्थल पर अपने पिता राजा दशरथ जी का तर्पण अनुष्ठान करके उन्हें दूसरे उच्च लोकों में स्थानांतरित करने में मदद की थी। माना जाता है कि इस शक्तिस्थल पर अपने दिवंगत पूर्वजों के निमित तर्पण अनुष्ठान करने से आप पितृ श्राप व पितृ दोष से मुक्त हो सकते हैं तथा मोक्ष प्राप्त करने में अपने पूर्वजों की सहायता कर सकते हैं|
इस शुभ दिवस पर वैदिक मंत्रो (दूसरे सबसे प्राचीन वेद यजुर्वेद में वर्णित महत्वपूर्ण मन्त्रों का संग्रह) का उच्चारण करने से आप नकारात्मक विचारों से मुक्ति पाकर शुद्ध मनःस्थिति प्राप्त कर सकते हैं तथा आपको संपति, यश, उत्तम संतान व एक स्वस्थ दीर्घ जीवन की प्राप्ति हो सकती है|
वैदिक नववर्ष आपके सभी सपनों व आकांक्षाओं को पूर्ण करने का दिन है। वैदिक ज्योतिष में सूर्य को सबसे ज्यादा शक्तिशाली तब माना जाता है जब वह अपनी उच्च राशि मेष में होता है। वैदिक नववर्ष की शुरुआत से संबंधित इस शुभ दिवस पर एस्ट्रोवेद भगवान गणेश, नवग्रह व देवी सुन्दरा महालक्ष्मी जी की कृपा प्राप्त करने हेतु संपूर्ण वर्ष 3 भव्य यज्ञ अनुष्ठानों का आयोजन करेगा| समस्त बुरे कर्म व बाधाओं का शमन करने तथा संपूर्ण वर्ष सफलता व इच्छाओं की पूर्ति तथा 64 प्रकार की संपत्ति प्राप्त करने के लिए हमारे इस अनुष्ठान में अवश्य भाग लें|
आप क्या प्राप्त करेंगे?-
आपको पवित्र विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।
डॉ. पिल्लै के अनुसार-
“ यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।”
कृपया ध्यान दें- इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिया जाने वाला प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिया जाएगा। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।
वैदिक नववर्ष आपके सभी सपनों व आकांक्षाओं को पूर्ण करने का दिन है। वैदिक ज्योतिष में सूर्य को सबसे ज्यादा शक्तिशाली तब माना जाता है जब वह अपनी उच्च राशि मेष में होता है। वैदिक नववर्ष की शुरुआत से संबंधित इस शुभ दिवस पर एस्ट्रोवेद भगवान गणेश, नवग्रह व देवी सुन्दरा महालक्ष्मी जी की कृपा प्राप्त करने हेतु संपूर्ण वर्ष 3 भव्य यज्ञ अनुष्ठानों का आयोजन करेगा| समस्त बुरे कर्म व बाधाओं का शमन करने तथा संपूर्ण वर्ष सफलता व इच्छाओं की पूर्ति तथा 64 प्रकार की संपत्ति प्राप्त करने के लिए हमारे इस अनुष्ठान में अवश्य भाग लें|
आप क्या प्राप्त करेंगे?-
आपको पवित्र विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।
डॉ. पिल्लै के अनुसार-
“ यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।”
कृपया ध्यान दें- इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिया जाने वाला प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिया जाएगा। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।