अब वैदिक कार्यपद्धति से ज्ञान, समृद्धि तथा शक्तिशाली आशीर्वाद प्राप्त करें।
28 मार्च 2017 से 5 अप्रैल 2017 तक
“नारी शक्ति सबसे शक्तिशाली ऊर्जा है। सुंदरता, विस्तार, उर्वरता, हर्ष, प्रचुरता यह सब स्त्री की विशेषताएँ हैं। यह सब विशेषताएँ केवल निश्चित आकाशीय समय में ही उपलब्ध होती हैं। योगी बेसब्री से इस समय की प्रतीक्षा करते हैं ताकि वे माँ दुर्गा की शक्ति से सामंजस्य स्थापित कर सकें।”

संस्कृत में वसंत शब्द का अर्थ “बसंत ऋतु” से और नवरात्रि का अर्थ “नौ रातों” से है। वसंत नवरात्रि को ग्रीष्म अयनांत के दौरान चैत्र मास(मार्च-अप्रैल) में मनाया जाता है। नवरात्रि शक्तिशाली अनुष्ठानों में भाग लेने हेतु एक बहुत महत्वपूर्ण समय होता है क्योंकि आदर्शरूप देवी की शक्ति ज्ञान, समृद्धि तथा शक्ति प्रदान करने के लिए प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होती है।
संस्कृत में देवी शीतला का अर्थ है “जो शीतलता प्रदान करे।” देवी शीतला को “वसंत की देवी” के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इनकी पूजा इस ऋतु में की जाती है। पवित्र ग्रंथ देवी महात्मय के अनुसार शीतला देवी माँ दुर्गा का ही रूप हैं। यह देवी नकारात्मकता का नाश करके रोग मुक्ति हेतु आशीर्वाद प्रदान करने के लिए प्रसिद्ध हैं।
यह देवी उन नकारात्मक ऊर्जाओं का शमन करती हैं जोकि जीवन में प्रतिकूल परिस्थितियों का कारण हैं। देवी शीतला अंधकार का नाश करके जीवन में आपको समृद्धि तथा ज्ञान प्रदान करती है।
एस्ट्रोवेद ने एक ऐसे अनोखे पैकेज का निर्माण किया है जोकि आपके जीवन में देवी के आशीर्वाद द्वारा आपकी चेतना में परिवर्तन करेगा। साथ ही इन अनुष्ठानों के माध्यम से आप अपने जीवन उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए अधिक शक्तिशाली बन जाएंगे। शास्त्रों के अनुसार वसंत नवरात्रि के शुभावसर पर शीतला देवी की कृपा से आप निम्नलिखित आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं-
वसंत नवरात्रि के शुभावसर पर इस पवित्र अनुष्ठान में भाग लेकर शीतला देवी के आवाहन द्वारा नकारात्मकता का नाश करके ज्ञान, समृद्धि तथा शक्ति हेतु आशीर्वाद प्राप्त करें। एस्ट्रोवेद ने इस अनोखे पैकेज का निर्माण किया है जोकि आपके जीवन में देवी के आशीर्वाद द्वारा आपकी चेतना में परिवर्तन करेगा। साथ ही इस अनुष्ठान के माध्यम से आप अपने जीवन उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए अधिक शक्तिशाली बन जाएंगे।
आप क्या प्राप्त करेंगे?
आपको अभिमंत्रित उत्पाद के अतिरिक्त पवित्र यज्ञ से प्राप्त विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।
डॉ. पिल्लै इसे इस प्रकार समझाते हैं:
यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।”
कृपया ध्यान दें: इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिए जाने वाले उत्पाद तथा प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिए जाएंगे। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।
संस्कृत में वसंत शब्द का अर्थ “बसंत ऋतु” से और नवरात्रि का अर्थ “नौ रातों” से है। वसंत नवरात्रि को ग्रीष्म अयनांत के दौरान चैत्र मास(मार्च-अप्रैल) में मनाया जाता है। देवी शीतला को “वसंत की देवी” के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इनकी पूजा इस ऋतु में की जाती है। इस पवित्र अनुष्ठान में भाग लेकर शीतला देवी के आवाहन द्वारा नकारात्मकता का नाश करके ज्ञान, समृद्धि तथा शक्ति हेतु आशीर्वाद प्राप्त करें।
आप क्या प्राप्त करेंगे?
आपको अभिमंत्रित उत्पाद के अतिरिक्त पवित्र यज्ञ से प्राप्त विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।
डॉ. पिल्लै इसे इस प्रकार समझाते हैं:
यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।”
कृपया ध्यान दें:इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिए जाने वाले उत्पाद तथा प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिए जाएंगे। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।
शीतला देवी के आवाहन द्वारा नकारात्मकता का नाश करके ज्ञान, समृद्धि तथा शक्ति हेतु आशीर्वाद प्राप्त करें। पवित्र ग्रंथ देवी महात्मय के अनुसार शीतला देवी माँ दुर्गा का ही रूप हैं। यह देवी नकारात्मकता का नाश करके रोग मुक्ति हेतु आशीर्वाद प्रदान करने के लिए प्रसिद्ध हैं। इस पवित्र अनुष्ठान में भाग लेकर अंधकार का नाश करके जीवन में समृद्धि तथा ज्ञान हेतु शक्ति प्राप्त करें।
आप क्या प्राप्त करेंगे?
आपको पवित्र यज्ञ से प्राप्त विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।
डॉ. पिल्लै इसे इस प्रकार समझाते हैं:
यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।”
कृपया ध्यान दें: इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिया जाने वाला प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिया जाएगा। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।