पापों का शमन करके समृद्धि व शुद्धिकरण का आशीर्वाद प्राप्त करने हेतु वैदिक कार्यपद्धति
पापों के शमन हेतु ऋग वैदिक स्तोत्र
उर्वरता व शुद्धीकरण प्रदाता यज्ञ
सीधा प्रसारण 8 मार्च 2018
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8 मार्च 2018 को एस्ट्रोवेद 4 पुजारियों द्वारा एक विशेष भव्य यज्ञ अनुष्ठान व मंत्रोच्चारण का आयोजन करने जा रहा है ताकि शरीर व मन की शुद्धि तथा जीर्णोद्धार हेतु आपको भगवान वरुण की कृपा प्राप्त हो सके| इस विशेष अनुष्ठान में अघमर्षण सूक्तम (पाप व अशुद्धियों को नष्ट करने हेतु स्तोत्र) का पाठ व वरुण यज्ञ(उर्वरता व शुद्धीकरण प्रदाता यज्ञ) शामिल है ताकि समस्त आंतरिक व बाहरी अशुद्धियाँ नष्ट होकर आपको समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त हो सके|
‘अघ’ शब्द का अर्थ अशुद्धता व ‘मर्षण’ का मतलब नष्ट करना या शुद्ध करना है| मंत्रों का आभूषण कहलाये जाने वाले इस पवित्र स्तोत्र का नाम ऋषि अघमर्षण के नाम पर रखा गया है जो इसके रचियता थे| अघमर्षण सूक्तम का वर्णन ऋग्वेद के 10वें मंडल में पाया जाता है जोकि सभी 4 वेदों में सबसे प्राचीन है। अघमर्षण सूक्तम का पाठ आमतौर पर स्नान करने से पहले किया जाता है तथा यह स्तोत्र जल के देवता भगवान वरुण को समर्पित है। मान्यता है कि इस स्तोत्र का पाठ करने से आपके द्वारा संचित व गैरकानूनी कृत्यों से निर्मित समस्त पाप तथा आंतरिक व बाहरी अशुद्धियाँ नष्ट हो जाती हैं|
वरुण यज्ञ एक पवित्र यज्ञ अनुष्ठान है जो कि अकाल को नष्ट करने, प्रचुर वर्षा सुनिश्चित करने, जल संबंधी प्रतिकूल परिस्थितियों से बचने तथा समृद्धि व शांति पाने हेतु जल के देवता भगवान वरण के निमित किया जाता है| आत्म शुद्धि व जाने-अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति हेतु वरुण यज्ञ के दौरान अघमर्षण सूक्तम का पाठ किया जाता है|
यह पवित्र अनुष्ठान अघमर्षण सूक्तम के पाठ व वरुण यज्ञ के द्वारा जल के देवता भगवान वरुण का आवाहन करता है| यह अनुष्ठान आपके समस्त पापों को नष्ट कर सकता है तथा आंतरिक व बाहरी अशुद्धियों का शुद्धिकरण करके समृद्धि प्रदान कर सकता है।
शक्तिस्थल पर त्रिमूर्तियों (ब्रह्मा, विष्णु व शिव) के निमित इस विशेष पूजा-अर्चना द्वारा आपकी इच्छाओं की पूर्ति होकर संयुक्त आशीर्वाद प्राप्त हो सकता है|
8 मार्च 2018 को एस्ट्रोवेद 4 पुजारियों द्वारा एक विशेष भव्य यज्ञ अनुष्ठान व मंत्रोच्चारण का आयोजन करने जा रहा है ताकि शरीर व मन की शुद्धि तथा जीर्णोद्धार हेतु आपको भगवान वरुण की कृपा प्राप्त हो सके| समृद्धि व शुद्धिकरण का आशीर्वाद प्राप्त करने हेतु इन शक्ति अनुष्ठानों में अवश्य भाग लें|
आप क्या प्राप्त करेंगे?
आपको पवित्र विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा
डॉ. पिल्लै के अनुसार-
” यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।”
कृपया ध्यान दें- इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिया जाने वाला प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिया जाएगा। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।
भगवान वरुण की कृपा द्वारा अपनी समस्त आंतरिक व बाहरी अशुद्धियों का शुद्धिकरण करने हेतु 8 मार्च 2018 को होने वाले व्यक्तिगत अघमर्षण सूक्तम मंत्रोच्चारण व वरुण यज्ञ हेतु अपना पंजीकरण करवाएं| इस अनुष्ठान में भाग लेने से आपके द्वारा संचित व गैरकानूनी कृत्यों से निर्मित समस्त पाप तथा आंतरिक व बाहरी अशुद्धियाँ नष्ट हो सकती हैं|
आप क्या प्राप्त करेंगे?
आपको पवित्र विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।
डॉ. पिल्लै के अनुसार-
“यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।”
कृपया ध्यान दें- इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिया जाने वाला प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिया जाएगा। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।