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बुरे कर्मों का शमन करने, नकारात्मकता को नष्ट करने व दैवीय बुद्धि प्राप्त करने के

वैकासी विसाकम: भगवान मुरुगा का जन्मदिवस आपको रोकने वाले नकारात्मक प्रभावों को नष्ट करें

लिए वैदिक कार्यपद्धति

सीधा प्रसारण 27 मई 2018 को सांयकाल 5:30 बजे (पैसेफिक मानक समयानुसार)/ रात्रि 8:30 बजे (ईस्टर्न मानक समयानुसार)/ 28 मई 2018 को प्रातः 6:00 बजे (भारतीय मानक समयानुसार)

भगवान मुरुगा का जन्मदिवस: आपको रोकने वाले नकारात्मक प्रभावों को नष्ट करें
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“यह मेरा निमंत्रण है, बल्कि यह भगवान मुरुगा का निमंत्रण है ताकि आप अपने जीवन को बदलने के लिए इस विशेष समय का उपयोग करें।”

-डॉ. पिल्लै

भगवान मुरुगा का जन्मदिवस:
आपको रोकने वाले नकारात्मक प्रभावों को नष्ट करें

भगवान के जन्मदिन विशेष होते हैं क्योंकि उस दिन भगवान पृथ्वी के निकट होते हैं| यह दिवस आपको संबंधित देवता के साथ एक गहन संबंध स्थापित करने का अवसर प्रदान करता है। भगवान मुरुगा की उत्पत्ति शक्तिशाली नकारात्मक उर्जाओं से इस संसार को बचाने के लिए हुई थी जो मनुष्यों को गुलाम बनाने की धमकी देते थे तथा किसी के लिए भी उन्हें हरा पाना असंभव था|

जीवन से नकारात्मक प्रभावों को नष्ट करने के लिए भगवान मुरुगा के जन्मदिवस पर उनकी उर्जा आपके लिए उपलब्ध है| बुरी नज़र, शाप भ्रम, अवसाद, व बीमारियों को उत्पन्न करने वाली अन्य नकारात्मक शक्तियों का शमन किया जा सकता है| भगवान मुरुगा की उर्जा आपको यथार्थ सोच, साहस, शक्ति व आत्मविश्वास प्रदान कर सकती है। वह आपको विजयी चेतना प्रदान कर सकते हैं तथा विशेष रूप से आपको अपने कार्यक्षेत्र में सशक्त बना सकते हैं|

भगवान मुरुगा के जन्मदिवस से जुड़ी पौराणिक कथा

माना जाता है कि भगवान मुरुगा का जन्म 6 अलग-अलग बच्चों के रूप में शिवजी की तीसरी आँख से हुआ था ताकि दुनिया में व्यापक रूप से तबाही मचाने वाले राक्षस सुरापद्मन को वे जीत सकें। 6 पालक माताओं द्वारा पाले गए भगवान मुरुगा को देवी पार्वती ने छह मुख वाला एक एकल शरीर प्रदान किया तथा उन्हें शक्तिशाली ‘”बरछा” भी आशीर्वाद स्वरुप दिया| मुरुगा ने सुरापद्मन सहित उसके बुरे कर्मों को जड़ से उखाड़ दिया, जो अंततः अपनी पहचान छुपाने के लिए स्वयं को एक पेड़ के रूप में प्रस्तुत करता था| भगवान मुरुगा ने वृक्ष स्वरुप धारी सुरापद्मन को दो भागों में विभाजित करके नष्ट कर दिया तथा इस प्रकार उन्होंने संसार को बुरी शक्तियों से मुक्त किया| वृक्ष स्वरुप धारी सुरापद्मन को मारने के बाद उस वृक्ष का आधा हिस्सा भगवान मुरुगा का वाहन मयूर बना और दूसरा आधा भाग मुर्गा बन गया, जोकि उनके झंडे में प्रतीक चिन्ह के रूप में विराजमान है|

भगवान शनमुगा (मुरुगा) के छह मुख छह गुणों का प्रतिनिधित्व करते हैं। वे गुण ज्ञान (ज्ञान), वैराग्य (विरक्ति), बल (शक्ति), कीर्ति (यश), श्री (संपति) व ऐश्वर्य (दिव्य शक्तियाँ) आदि हैं।

भगवान मुरुगा के छह मुख छह तरीकों से संसार को आशीर्वाद देते हैं

भगवान मुरुगा के छह मुख निम्नलिखित दिव्य कार्यों का पालन करते हैं:

  • प्रथम मुख: यह मुख अंधकार को नष्ट करने हेतु दिव्य प्रकाश प्रदान करता है जिससे संसार की रक्षा होती है|
  • द्वितीय मुख: यह कृपापूर्ण मुख उन भक्तों को वर प्रदान करता है जो प्रेम व प्रसन्नता के साथ उनकी स्तुति करते हैं|
  • तृतीय मुख: यह मुख परंपराओं से विचलित हुए बिना वैदिक संस्कार करने वाले ब्राह्मणों पर कृपा करता है|
  • चतुर्थ मुख: एक पूर्ण चंद्रमा की तरह यह मुख समस्त संसार को उज्जवल करता है व ऋषि-मुनियों को प्रबुद्ध करके उन्हें गुप्त सत्यों की खोज करने में सक्षम बनाता है|
  • पंचम मुख: यह मुख एक उग्र स्वरुप का प्रतीक है जो युद्ध करता है तथा बुराइयों को नष्ट करता है
  • षष्ठ मुख: यह मुख अपनी युवा पत्नी वल्ली पर प्रेमपूर्ण मुस्कान रखता है जो शिकारी जनजाति के शासक की सुंदर पुत्री हैं|

मुरुगा: कुंडलिनी शक्ति के स्वामी

भगवान शिव सर्वोच्च चेतना व ज्ञान के देवता हैं तथा यदि कोई भगवान हैं जो भगवान शिव के गुरु हैं तो वह मुरुगा हैं, जिन्हें स्कंद, सुब्रमन्य व कार्तिकेय के नाम से भी जाना जाता है। भगवान शिव ने मुरुगा को अद्वितीय साहस व ज्ञान सहित एक आदर्श दैवीय व्यक्तित्व के रूप में उत्पन्न किया| मुरुगा कुंडलिनी शक्ति के स्वामी हैं तथा जीवन में पूर्णता प्राप्त करने के लिए अपने भक्तों का मार्गदर्शन करते हैं|

ग्रह कैसे भगवान मुरुगा के जन्मदिवस पर उनकी कृपा प्राप्त करने में आपकी मदद करते हैं?

Muruga's Birthday

28 मई 2018 को चंद्रमा गुरु द्वारा शासित विशाखा नक्षत्र में होगा| चंद्रमा शुक्र की तुला राशि में गोचर करेगा| विशाखा नक्षत्र ‘व्यापन शक्ति’ से संबंधित है जिसका अर्थ है कि आप जो चाहते हैं उसे प्रकट करने की शक्ति इस नक्षत्र में निहित है। इस प्रकार यह ग्रह स्थिति इस दिन को भगवान मुरुगा की पूजा करने के लिए एक शक्तिशाली दिवस बनाती है।

इसके अलावा गुरु की चंद्रमा से युति भगवान मुरुगा से जुड़ने के लिए इस दिन की ऊर्जा को बढ़ाती है तथा नकारात्मकता को नष्ट करके सकारात्मकता व प्रचुरता जैसे गुणों में वृद्धि करती है|

चंद्रमा का राशि अधिपति शुक्र चंद्र से त्रिकोण में रहेगा तथा बुध के साथ राशि परिवर्तन करेगा तथा यह ग्रह स्थिति दुर्भाग्य का शमन करने में आपकी सहायता कर सकती है| इस दिन ग्रहों की यह अनुकूल ऊर्जा नकारात्मक भावनाओं को दूर करने, शत्रुओं पर विजय पाने तथा अपने सपनों को साकार करने में आपकी मदद कर सकती है|

वैकासी विसाकम अनुष्ठानों की व्याख्या

भगवान मुरुगा के जन्मदिवस पर उनकी अनोखी कृपा प्राप्त करने हेतु एस्ट्रोवेद इस महान योद्धा के निमित एक विशेष यज्ञ व अनुष्ठानों का आयोजन करने जा रहा है| इन अनुष्ठानों की जानकारी व उनसे प्राप्त होने वाले लाभ निम्नलिखित हैं:

Chanting

शनमुगा माला मंत्र के 108 बार उच्चारण द्वारा यज्ञ (बुरे कर्म व नकारात्मकता के शमन हेतु यज्ञ)

सीधा प्रसारण 28 मई 2018 को प्रातः 6:00 बजे (भारतीय मानक समयानुसार)- भगवान मुरुगा के जन्मदिवस पर होने वाले इस अनोखे यज्ञ अनुष्ठान को ‘शनमुगा माला मंत्र’ के 108 बार उच्चारण व पवित्र भोगार्पण द्वारा संपन्न किया जाएगा| पवित्र पाठ प्रपंचसरा संग्रह के अनुसार इस मंत्र के मंत्रोच्चारण द्वारा इस यज्ञ को संपन्न करने से आप अपने शत्रुओं, बुरी नजर व काले जादू आदि का शमन कर सकते हैं, अपने बुरे कर्मों को नष्ट कर सकते हैं तथा दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य व आनंदमय जीवन प्राप्त कर सकते हैं।

Kukuta Homa

कुकुट यज्ञ- सीधा प्रसारण 28 मई 2018 को प्रातः 9:00 बजे (भारतीय मानक समयानुसार)

मुर्गा, जोकि भगवान मुरुगा के झंडे का चिन्ह है, बुराई पर विजय का प्रतीक माना गया है| कुकुट यज्ञ भगवान मुरुगा के जन्मदिवस पर किया जाता है| यह आपको संसार का सामना करने हेतु आत्मविश्वास प्रदान कर सकता है| ऐसा माना जाता है कि इस अनुष्ठान से उत्पन्न आध्यात्मिक ऊर्जा आपके ज्ञान को उन्नत कर सकती है तथा नकारात्मकता को नष्ट करके आपकी आभा को शुद्ध कर सकती है|

Muruga

भगवान मुरुगा के 3 शक्तिस्थलों पर पूजा-अर्चना

इन शक्तिस्थलों से जुड़ी पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान मुरुगा के जन्मदिवस पर उनकी पूजा-अर्चना करने से आप अपने शत्रुओं व मुश्किलों से मुक्ति पा सकते हैं, वैवाहिक सुख, उत्तम संतान, पारिवारिक कल्याण, दीर्घायु, समृद्धि, उत्तम शिक्षा, ज्ञान, अच्छी नौकरी व पदोन्नति आदि की प्राप्ति हो सकती है तथा प्रयासों में आने वाली बाधाएं नष्ट हो सकती हैं|

Powerspots

थिरुपरंकुन्द्रम शक्तिस्थल पर विशेष पूजा-अर्चना

इस शक्तिस्थल से जुड़ी पौराणिक कथा के अनुसार भगवान मुरुगा के जन्मदिवस पर उनकी पूजा-अर्चना करने से आपकी वैवाहिक समस्याएं दूर होती हैं तथा आपकी संतान का कल्याण हो सकता है|

Subramanya Pancharatnam

एस्ट्रोवेद के उपचारात्मक केंद्र में सुब्रमन्य पंचरत्नम स्तोत्र का पाठ व पूजा-अर्चना

‘सुब्रमन्य पंचरत्नम’ (भगवान मुरुगा से संबंधित पांच प्रार्थनाएं) भगवान मुरुगा को समर्पित एक पवित्र स्तोत्र है जो उनकी सुंदरता व शक्तियों का वर्णन करता है। शास्त्रों के मुताबिक भगवान मुरुगा के जन्मदिवस पर उनकी पूजा-अर्चना के दौरान इस पवित्र मंत्र का उच्चारण करने से आपकी समस्त इच्छाएं व सांसारिक सुखों की पूर्ति हो सकती है|

Milk Abishekam

भगवान मुरुगा के बरछे का दुग्ध अभिषेक (भगवान मुरुगा के बरछे का दूध से अभिषेक)-

डॉ. पिल्लै के अनुसार भगवान मुरुगा का यह दिव्य अस्त्र कुंडलिनी शक्ति का प्रतीक है तथा यह भगवान मुरुगा की दिव्य कृपा प्राप्त करने में आपकी सहायता करता है| वह नकारात्मकता व बुरे कर्मों का शमन करने तथा भगवान मुरुगा की दिव्य कृपा प्राप्त करने के लिए इस दिव्य अस्त्र का दूध से अभिषेक करने की दृढ़ता से अनुशंसा करते हैं|

Basic Muruga Birthday Package

मौलिक मुरुगा जन्मदिवस पैकेज

  • आपकी तरफ से एस्ट्रोवेद के उपचारात्मक केंद्र में कुकुट यज्ञ किया जाएगा जिसका सीधा प्रसारण आप 28 मई 2018 को प्रातः 9:00 बजे (भारतीय मानक समयानुसार) देख सकते हैं|
  • आपकी तरफ से एस्ट्रोवेद के उपचारात्मक केंद्र में शनमुगा माला मंत्र के 108 बार उच्चारण द्वारा यज्ञ (बुरे कर्म व नकारात्मकता के शमन हेतु यज्ञ) किया जाएगा जिसका सीधा प्रसारण आप 28 मई 2018 को प्रातः 6:00 बजे (भारतीय मानक समयानुसार) देख सकते हैं|
  • आपकी तरफ से एस्ट्रोवेद के उपचारात्मक केंद्र में सुब्रमन्य पंचरत्नम स्तोत्र का पाठ व पूजा-अर्चना की जाएगी|
  • आपकी तरफ से भगवान मुरुगा के 3 शक्तिस्थलों पर पूजा-अर्चना की जाएगी|
  • आपकी तरफ से भगवान मुरुगा के बरछे का दुग्ध अभिषेक (भगवान मुरुगा के बरछे का दूध से अभिषेक) किया जाएगा|

जीवन से नकारात्मक प्रभावों को नष्ट करने के लिए भगवान मुरुगा के जन्मदिवस पर उनकी उर्जा आपके लिए उपलब्ध है| बुरी नज़र, शाप भ्रम, अवसाद, व बीमारियों को उत्पन्न करने वाली अन्य नकारात्मक शक्तियों का शमन किया जा सकता है| यथार्थ सोच, साहस, शक्ति व आत्मविश्वास की प्राप्ति हेतु हमारे इस मौलिक मुरुगा जन्मदिवस अनुष्ठान में अवश्य भाग लें|

आप क्या प्राप्त करेंगे?-

आपको पवित्र विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।

डॉ. पिल्लै के अनुसार-

“ यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।”

कृपया ध्यान दें- इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिया जाने वाला प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिया जाएगा। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।

Premier Muruga Birthday Package

प्रधान मुरुगा जन्मदिवस पैकेज

  • आपकी तरफ से एस्ट्रोवेद के उपचारात्मक केंद्र में व्यक्तिगत कुकुट यज्ञ किया जाएगा|
  • आपकी तरफ से एस्ट्रोवेद के उपचारात्मक केंद्र में शनमुगा माला मंत्र के 108 बार उच्चारण द्वारा व्यक्तिगत यज्ञ (बुरे कर्म व नकारात्मकता के शमन हेतु यज्ञ) किया जाएगा|
  • आपकी तरफ से एस्ट्रोवेद के उपचारात्मक केंद्र में सुब्रमन्य पंचरत्नम स्तोत्र का पाठ व पूजा-अर्चना की जाएगी|
  • आपकी तरफ से भगवान मुरुगा के 3 शक्तिस्थलों पर पूजा-अर्चना की जाएगी|
  • आपकी तरफ से भगवान मुरुगा के बरछे का दुग्ध अभिषेक (भगवान मुरुगा के बरछे का दूध से अभिषेक) किया जाएगा|
  • आपकी तरफ से थिरुपरंकुन्द्रम शक्तिस्थल पर विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी|

जीवन से नकारात्मक प्रभावों को नष्ट करने के लिए भगवान मुरुगा के जन्मदिवस पर उनकी उर्जा आपके लिए उपलब्ध है| बुरी नज़र, शाप भ्रम, अवसाद, व बीमारियों को उत्पन्न करने वाली अन्य नकारात्मक शक्तियों का शमन किया जा सकता है| यथार्थ सोच, साहस, शक्ति व आत्मविश्वास की प्राप्ति हेतु हमारे इस प्रधान मुरुगा जन्मदिवस अनुष्ठान में अवश्य भाग लें|

आप क्या प्राप्त करेंगे?-

आपको पवित्र विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।

डॉ. पिल्लै के अनुसार:

“ यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।”

कृपया ध्यान दें- इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिया जाने वाला प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिया जाएगा। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।