नज़रदोष, शारीरिक कष्ट तथा बुरे कर्मों से संबंधित बाधाओं
को नष्ट करने हेतु दृष्टि दुर्गा यज्ञ, कटक प्रासनम परायण तथा मृतसंजीवनी यज्ञ|
अब वैदिक कार्यपद्धति द्वारा नकारात्मकता, शारीरिक रोग तथा कार्यक्षेत्र में आने वाली बाधाओं का शमन करें|
सीधा प्रसारण 17 जून 2017 को प्रातः 4.:30 बजे (पैसेफिक मानक समयानुसार)/प्रातः7:30 बजे (ईस्टर्न मानक समयानुसार)/
सांयकाल 5:00 बजे (भारतीय मानक समयानुसार)
पहली बार, एस्ट्रोवेद ने त्रिपक्षीय कृपा व आशीर्वाद प्रदान करने वाले एक समारोह का आयोजन किया है, जो कि आपके जीवन से नकारात्मक ऊर्जा, नज़र दोष, शारीरिक पीड़ा / रोग तथा गतिहीन कैरियर जैसी समस्त बाधाओं को नष्ट करने के लिए बनाए गए अनुष्ठानों का एक दुर्लभ संयोजन है। प्रत्येक अनुष्ठान को पवित्र वैदिक ग्रंथों तथा पुराणों से सावधानीपूर्वक चुना गया है और इनसे अनूठा आशीर्वाद प्राप्त होता है|
तिगुनी कृपा व सुरक्षा प्रदान करने वाले इन पैकजों के तीन घटक हैं- मुत्तारुक्कल( शक्तिस्थल से संबंधित एक केरलीय उपचारात्मक अनुष्ठान), कटक प्रासनम परायण(वैदिक मंत्रोच्चारण से संबंधित अनुष्ठान) तथा दृष्टि दुर्गा व मृतसंजीवनी यज्ञ(देवी दुर्गा व भगवान शिव से संबंधित यज्ञ अनुष्ठान)
मुत्तारुक्कल – एस्ट्रोवेद द्वारा भारत के दक्षिण-पश्चिमी राज्य केरल में आपकी तरफ से शक्तिशाली शक्तिस्थल पर यह अनुष्ठान किया जाएगा| मुत्तारुक्कल शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है- ‘मुत्तू’ का अर्थ बाधा है और ‘अरुक्कल’ का अर्थ है-छुटकारा पाना| इस अनुष्ठान में आपकी तरफ से नकारात्मकता व बुरी नजर, शारीरिक बीमारियों तथा करियर में आने वाली बाधाओं से छुटकारा पाने के लिए देवी भगवती (सर्वोच्च दिव्य स्त्री ऊर्जा की प्रतीक) के शक्तिस्थल पर नारियल फोड़े जाएंगे|
कटक प्रासनम परायण – कटक प्रासनम परायण का अर्थ कृष्ण यजुर्वेद में पाए गए मंत्रों का जाप करना है ताकि आपको बुरे कर्मों, पीड़ाओं से छुटकारा मिले और आप एक नई शुरुआत कर सकें| इस जप अनुष्ठान का मुख्य आकर्षण यह है कि यह अनुष्ठान मौलिक ध्वनि मंत्र ओम के साथ समाप्त होता है| इसके अतिरिक्त, जप को सुनने मात्र से भी वेदों में वर्णित 3 उत्कृष्ट व शक्तिशाली यज्ञों(नासिकेधा यज्ञ, पसुपंधा यज्ञ व वैस्वस्रुजा यज्ञ) का फल प्राप्त हो सकता है|
दृष्टि दुर्गा यज्ञ – इस अनुष्ठान में देवी द्रष्टि दुर्गा का आवाह्न करके सभी नकारात्मक ऊर्जा और बुरी नज़र का शमन किया जाता है जो आपके जीवन में लक्ष्यों को प्राप्त करने में बाधक बन रहे हैं| शास्त्रों के मुताबिक, उनका आवाह्न करके नकारात्मक ऊर्जा का शमन किया जा सकता है चाहे वह आपके व्यक्तिगत जीवन से जुड़ी हुई हों या व्यावसायिक जीवन से संबंधित हो।
मृतसंजीवनी यज्ञ – ऋग व यजुर्वेद में पाया जाने वाला मृतसंजीवनी सूक्तम यज्ञ अनुष्ठान के दौरान किया जाने वाला एक ऐसा स्तोत्र है जो रोगों से मुक्ति तथा मृत्युभय से छुटकारा दिला सकता है| साथ ही यह आपको फिर से जीवंत स्वास्थ्य प्रदान करता है| पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव की कड़ी तपस्या के पश्चात ऋषि शुक्राचार्य (शुक्र ग्रह के प्रतीक) को इस मंत्र के माध्यम से मृत व्यक्तियों को जीवित करने की शक्ति प्राप्त हुई।
Muttarukkal
Vedi Valipaadu
यजुर्वेद, जोकि द्वितीय प्राचीन वेद है तथा वैदिक ग्रंथों के अनुसार मुत्तारुक्कल, कटक प्रासनम परायण व दृष्टि दुर्गा तथा मृतसंजीवनी यज्ञ आदि अनुष्ठानों में समिल्लित होने से जिसमें देवी दुर्गा के विभिन्न रूपों तथा भगवान शिव का आवाहन किया जाता है, निम्नलिखित आशीर्वाद प्राप्त हो सकते हैं-
त्रिपक्षीय कृपा व सुरक्षात्मक पैकेज की विशेषताएं
त्रिपक्षीय कृपा व सुरक्षा उत्कृष्ट पैकेज
एस्ट्रोवेद ने त्रिपक्षीय कृपा व आशीर्वाद प्रदान करने वाले एक समारोह का आयोजन किया है, जो कि आपके जीवन से नकारात्मक ऊर्जा, नज़र दोष, शारीरिक पीड़ा / रोग तथा गतिहीन कैरियर जैसी समस्त बाधाओं को नष्ट करने के लिए बनाए गए अनुष्ठानों का एक दुर्लभ संयोजन है। देवी दुर्गा व भगवान शिव से संबंधित इस अनुष्ठान में भाग लेकर उनके आवाहन व त्रिगुणात्मक कृपा द्वारा नकारात्मकता, शारीरिक रोग तथा कार्यक्षेत्र में आने वाली बाधाओं का शमन करें|
आप क्या प्राप्त करेंगे?
आपको पवित्र विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।
डॉ. पिल्लै के अनुसार
“यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।”
कृपया ध्यान दें – इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिया जाने वाला प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिया जाएगा। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।
त्रिपक्षीय कृपा व सुरक्षा आवश्यक पैकेज
इस आवश्यक अनुष्ठान पैकेज में अवश्य भाग लें क्योंकि इसमें होने वाले प्रत्येक अनुष्ठान को पवित्र वैदिक ग्रंथों तथा पुराणों से सावधानीपूर्वक चुना गया है और इनसे अनूठा आशीर्वाद प्राप्त होता है| यह शक्तिशाली अनुष्ठान आपके जीवन पर विभिन्न सकारात्मक प्रभाव डालकर नकारात्मकता, शारीरिक बीमारियों और कार्यक्षेत्र की बाधाओं को दूर कर सकते हैं। देवी दुर्गा व भगवान शिव से संबंधित इस अनुष्ठान में भाग लेकर उनके आवाहन व त्रिगुणात्मक कृपा द्वारा नकारात्मकता, शारीरिक रोग तथा कार्यक्षेत्र में आने वाली बाधाओं का शमन करें|
आप क्या प्राप्त करेंगे?
आपको पवित्र विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।
डॉ. पिल्लै के अनुसार –
“यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।”
कृपया ध्यान दें – इस आवश्यक अनुष्ठान पैकेज की समाप्ति के उपरांत आपको कोई भी प्रसाद नहीं भेजा जाएगा|
अनुशंसित व्यक्तिगत यज्ञ अनुष्ठान
व्यक्तिगत दृष्टि दुर्गा यज्ञ
दृष्टि दुर्गा यज्ञ अनुष्ठान में अवश्य भाग लें क्योंकि इस अनुष्ठान में देवी द्रष्टि दुर्गा का आवाह्न करके सभी नकारात्मक ऊर्जा और बुरी नज़र का शमन किया जाता है जो आपके व प्रियजनों के जीवन में लक्ष्यों को प्राप्त करने में बाधक बन रहे हैं| शास्त्रों के मुताबिक, उनका आवाह्न करके नकारात्मक ऊर्जा का शमन किया जा सकता है चाहे वह आपके व्यक्तिगत जीवन से जुड़ी हुई हों या व्यावसायिक जीवन से संबंधित हो।
आप क्या प्राप्त करेंगे?
आपको पवित्र विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।
डॉ. पिल्लै के अनुसार –
“यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।”
कृपया ध्यान दें – इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिया जाने वाला प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिया जाएगा। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।
व्यक्तिगत मृतसंजीवनी यज्ञ
मृतसंजीवनी यज्ञ अनुष्ठान में अवश्य भाग लें क्योंकि इस अनुष्ठान में भगवान शिव का आवाह्न करके आप व आपका परिवार रोगमुक्ति, मृत्युभय व उत्तम स्वास्थ्य की पुनः प्राप्ति कर सकता है| पवित्र ग्रंथों के अनुसार, शक्तिशाली मृतसंजीवनी मंत्र में मृतकों को पुनर्जीवित करने की क्षमता थी और यह माना जाता है कि भगवान शिव की कड़ी तपस्या करने के बाद ऋषि शुक्राचार्य ने इसे प्राप्त किया था।
आप क्या प्राप्त करेंगे?
आपको पवित्र विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।
डॉ. पिल्लै के अनुसार-
“यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।”
कृपया ध्यान दें – इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिया जाने वाला प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिया जाएगा। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।