44 तर्पण अनुष्ठान+ 36 एक वर्षीय सहायक अनुष्ठान= जीवन की समस्याओं को हल करने के लिए 80 दिव्य मंगलाचरण
4 शास्त्रों द्वारा निर्देशित 4 महान शक्तिस्थल: काशी, रामेश्वरम, थिलाथार्पनापुरी व केरल
तक की छूट प्राप्त करें:20% 1 वर्षीय तर्पण अनुष्ठान कार्यक्रम पर
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“अगर मुझे हम सभी को हमारी समस्याओं (चाहे वह आर्थिक, सम्बन्ध या स्वास्थ्य आदि किसी भी क्षेत्र से जुड़ी हुई हो )से मुक्ति हेतु किसी एक समाधान की सिफारिश करनी हो तो वह हमारे पूर्वजों को समर्पित तर्पण अनुष्ठान होगा। इस अनुष्ठान को विधिवत संपादित करने के बाद चमत्कार अवश्य होते हैं।”-
डॉ. पिल्लैतर्पण प्रत्येक समस्या को हल करने के लिए एक अनिवार्य अनुष्ठान है तथा यही वह सबसे महान कार्य है जिसके द्वारा आप अपने पूर्वजों को मुक्ति के मार्ग पर अग्रसर कर सकते हैं और अपनी संतान को नकारात्मक पैतृक प्रभावों द्वारा उत्पन्न समस्याओं से मुक्त कर सकते हैं। एस्ट्रोवेद ने इस 1 वर्षीय तर्पण अनुष्ठान कार्यक्रम को उन्नत किया है जिसमें शास्त्रों द्वारा अनुमोदित 4 महान शक्तिस्थलों पर तर्पण अनुष्ठान संपन्न किए जाएंगे| यह अपनी ही तरह का अनोखा 1 वर्षीय व्यापक कार्यक्रम है जिसमें बुरे पैतृक कर्मों से मुक्ति तथा पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त करने हेतु वर्ष के सर्वाधिक शुभ दिवसों पर 44 तर्पण अनुष्ठान व 36 सहायक अनुष्ठान संपन्न किए जाएंगे| जीवन के लक्ष्यों को पाने के लिए आपके पूर्वजों का आशीर्वाद महान उपकारी सिद्ध हो सकता है|
काशी (गया) पूर्वजों के निमित तर्पण (पैतृक अनुष्ठान) करने के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण स्थलों में से एक है। पद्म पुराण के स्वर्ग खंड के तृतीय काण्ड में काशी को मोक्ष की नगरी के रूप में चित्रित किया गया है| महान महाकाव्य महाभारत में पैतृक आत्माओं को मुक्त करने के लिए इस पवित्र शक्तिस्थल की पवित्रता व शक्ति का वर्णन है|
महान महाकाव्य रामायण के अनुसार रामेश्वरम तमिलनाडु का एक पवित्र स्थल है जहां भगवान राम ने अपनी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ शिवलिंग की स्थापना करके पूजा-अर्चना की थी| संत और कवि तुलसीदास की महान रचना रामचरित मानस में भी इस स्थल के महत्व पर प्रकाश डाला गया है| इस पवित्र ग्रंथ के अनुसार इस पवित्र शक्तिस्थल पर तर्पण अनुष्ठान संपन्न करने से पैतृक आत्माओं का मुक्ति का मार्ग प्रशस्त हो सकता है तथा उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है|
यह तमिलनाडु में स्थित एक और पवित्र शक्तिस्थल है। इस शक्तिस्थल से जुड़ी पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान राम ने अपने दिवंगत पिता राजा दशरथ के निमित यहाँ तर्पण अनुष्ठान किया था इसलिए इस स्थल को मुक्तिक्षेत्र भी कहा जाता है (वह स्थान जहां पैतृक आत्माएं मोक्ष प्राप्त करती हैं|)
केरल के इस विशेष शक्तिस्थल से जुड़ी पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम जी ने यहां उन क्षत्रियों(योद्धाओं) के निमित तर्पण अनुष्ठान किया था जिनका उन्होंने वध किया| इसके अलावा यह शक्तिस्थल नदी के किनारे स्थित है जिसे ‘दक्षिण गंगा’ कहा (वैदिक ग्रंथों में गंगा नदी को समस्त नदियों में सबसे पवित्र माना जाता है) जाता है इसलिए तर्पण अनुष्ठानों को संपन्न करने हेतु इस शक्तिस्थल की पवित्रता अधिक है| इसके अलावा तर्पण अनुष्ठान पूर्ण करने के बाद कोई भी व्यक्ति यहाँ स्थित त्रिशक्तियों (ब्रह्मा, विष्णु, और शिव) के पवित्र मंदिरों के दर्शन कर सकता है।
इन शक्तिस्थलों पर तर्पण अनुष्ठान करने से किसी भी बुरे पैतृक कर्म को नष्ट किया जा सकता है तथा आपके पूर्वजों की आत्माओं को मुक्ति प्राप्त हो सकती है जो आपकी तरफ से उनके निमित किया गया सबसे महान कार्य हो सकता है। तर्पण अनुष्ठान करने से आपको अपने पूर्वजों की कृपा प्राप्त हो सकती है तथा आपकी संतान व आगामी पीढ़ी स्वास्थ्य, धन और समग्र प्रचुरता का आनंद लेने ले सकती है|
इस विशेष 1 वर्षीय तर्पण कार्यक्रम में महालय के दिनों को छोड़कर वर्ष के सबसे शुभ और शक्तिशाली 30 दिवसों पर आपकी तरफ से पैतृक अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं| इन शक्तिशाली दिवसों पर तर्पण अनुष्ठान करना आपके पूर्वजों की आत्माओं को तृप्त करने व उन्हें मोक्ष मार्ग पर अग्रसर करने का सबसे प्रभावशाली माध्यम है।
सूर्य का एक राशि से निकलकर अगली राशि में गोचर आगामी तमिल माह की शुरुआत का दिन होता है। वैदिक ज्योतिष ग्रंथों के अनुसार सूर्य आत्मकारक (आत्मा का प्रतिनिधि) है और जीवन को पोषण देता है| इसलिए इन 12 दिनों में तर्पण अनुष्ठान करना अपने पूर्वजों को मुक्त करने के लिए शुभ माना जाता है
वेदों के अनुसार नव चंद्र दिवस या अमावस्या अपने पूर्वजों के साथ संबंध स्थापित करने हेतु एक शक्तिशाली समयकाल है। ऐसा माना जाता है कि अमावस्या पर तर्पण अनुष्ठान करने से आपके जीवन के समस्त पहलुओं में रुकी हुई उर्जा, नकारात्मकता व मुश्किलों का शमन होता है|
ग्रहण काल को पुण्य काल माना जाता है जिसका अर्थ है कि इस समय के दौरान किए गए अच्छे कर्म आपको सकारात्मक परिणाम प्रदान कर सकते हैं। ग्रहण दिवस अर्थात जब सूर्य ओर चंद्रमा एक ही सतह पर पंक्तिबद्ध होते हैं तब पूर्वजों के निमित तर्पण अनुष्ठान करके उन्हें मोक्ष प्राप्त करने में सहायता करना बहुत पवित्र माना जाता है|
डॉ पिल्लै विष्णुपति दिवस पर तर्पण अनुष्ठान करने की अनुशंसा करते हैं क्योंकि यह दिवस भगवान विष्णु की ऊर्जा से परिपूर्ण होता है तथा आपको भौतिक प्रचुरता में बाधक समस्याओं को दूर करने में सहायता मिल सकती है| विष्णुपति दिवस पर समस्त आत्माओं के निमित तर्पण अनुष्ठान करने से आपके बुरे कर्म व कार्मिक पीडाओं का शमन हो सकता है|
महालय पक्ष एक ऐसा विशेष पक्ष है जब आपके पैतृक वंशजों की आत्माएं आपके भोग को ग्रहण करने तथा आपको आशीर्वाद देने के लिए पृथ्वी के धरातल पर आती हैं|
वेदों के अनुसार पवित्र शक्तिस्थल काशी में आदि अमावस्या (तमिल माह आदि की अमावस्या) और थाई अमावस्या (तमिल माह थाई की अमावस्या) दिवसों पर तर्पण अनुष्ठान संपन्न करने से आपके दिवंगत पूर्वजों की आत्मा को मुक्ति मिल सकती है तथा वे आपको समृद्धि और प्रसन्नता का आशीर्वाद प्रदान कर सकते हैं|
महाकाव्य रामायण के अनुसार रामेश्वरम काशी के समान ही एक पवित्र शक्तिस्थल है जो अपने पूर्वजों के निमित तर्पण अनुष्ठान करके उनकी कृपा द्वारा आनंददायक और शांतिपूर्ण जीवन प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है|
ऐसी मान्यता है कि विष्णुपति वह पवित्र दिन है जब भगवान विष्णु आपकी पैतृक आत्माओं को मुक्त कर सकते हैं| थिलाथार्पनापुरी शक्तिस्थल पर तर्पण अनुष्ठान संपन्न करने से आपके दिवंगत पूर्वजों की आत्मा तृप्त हो सकती है तथा आपको शांति व प्रसन्नता का आशीर्वाद मिल सकता है|
ऐसा माना जाता है कि ग्रहण वह विशेष दिवस होता है जब सूर्य और चंद्रमा एक ही सतह पर पंक्तिबद्ध होते हैं| ग्रहण काल (ग्रहण अवधि) को ‘पुण्य काल’ भी कहा जाता है (वह शुद्ध समय अवधि जो आपके अच्छे कर्मों के प्रभाव को बढ़ा सकती है|)। ग्रहण दिवसों पर रामेश्वरम के समुद्री तट पर तर्पण अनुष्ठान करना अपने पूर्वजों को मुक्ति प्राप्त करने में मदद करने के लिए बहुत पवित्र माना जाता है|
पवित्र ग्रंथ धर्म शास्त्र के अनुसार महालय पक्ष अपने दिवंगत पूर्वजों के निमित तर्पण करने हेतु 15 दिनों की एक अनोखी व आदर्श समयावधि है| इन 15 चंद्र तिथियों में से प्रत्येक तिथि पर तर्पण अनुष्ठान करने से आपको अपने पूर्वजों से 15 अनोखे आशीर्वाद प्राप्त हो सकते हैं|
शास्त्रों के अनुसार अन्नदान करके ग़रीब और जरूरतमंद लोगों की सेवा करने से आप अपने पूर्वजों को प्रसन्न कर सकते हैं और उनकी प्रचुर कृपा प्राप्त कर सकते हैं|
पवित्र ग्रंथों के अनुसार गायों को अगाथी पत्तियों का चारा खिलाने से आपको कामधेनु (इच्छाओं की पूर्ति करने वाली गौमाता) का आशीर्वाद प्राप्त हो सकता है|
पवित्र ग्रंथों के अनुसार अमावस्या दिवसों पर गोकर्ण भागवत सप्ताह का पाठ (पवित्र वैदिक पाठ) करने से उस आत्मा को मुक्ति मिल सकती है जिसने घोर पाप कर्म किए हैं|
तर्पण एक ऐसा अति आवश्यक अनुष्ठान है जो कि हर एक समस्या को दूर करने में सक्षम है। यह ऐसा महान कार्य है, जिसके द्वारा आप अपने पूर्वजों को मुक्ति प्रदान करने के साथ-साथ अपनी संतान को भी नकारात्मक पैतृक प्रभावों से बचा सकते हैं। अपने बुरे पैतृक कर्मों का शमन करने तथा संपूर्ण वर्ष के लिए अपने पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त करने हेतु काशी, रामेश्वरम, थिलाथार्पनापुरी और विशेष केरल शक्तिस्थल पर संपन्न होने वाले हमारे इस मौलिक 1 वर्षीय तर्पण अनुष्ठान कार्यक्रम में अवश्य भाग लें|
जब हम आपकी तरफ से गायों को चारा खिलाते हैं तब यह कामधेनु (इच्छाओं की पूर्ति करने वाली गौ माता) का आशीर्वाद प्राप्त करने हेतु एक अतिरिक्त अवसर होता है तथा अन्नदान द्वारा ग़रीबों और ज़रूरतमंदों की सेवा होती है।
अमावस्या दिवसों पर गोकर्ण भागवत सप्ताह का पाठ (पवित्र वैदिक पाठ) करने से उस आत्मा को मुक्ति मिल सकती है जिसने घोर पाप कर्म किए हैं|
कृपया ध्यान दें- तर्पण अनुष्ठान पूरा होने के बाद हम कोई भी प्रसाद नहीं भेजेंगे क्योंकि इस प्रकिया के उपरांत प्रसाद को अपने पास रखना सामान्यतः अशुभ समझा जाता है।
तर्पण एक ऐसा अति आवश्यक अनुष्ठान है जो कि हर एक समस्या को दूर करने में सक्षम है। यह ऐसा महान कार्य है, जिसके द्वारा आप अपने पूर्वजों को मुक्ति प्रदान करने के साथ-साथ अपनी संतान को भी नकारात्मक पैतृक प्रभावों से बचा सकते हैं। अपने बुरे पैतृक कर्मों का शमन करने तथा संपूर्ण वर्ष के लिए अपने पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त करने हेतु काशी, रामेश्वरम, थिलाथार्पनापुरी और विशेष केरल शक्तिस्थल पर संपन्न होने वाले हमारे इस प्रधान 1 वर्षीय तर्पण अनुष्ठान कार्यक्रम में अवश्य भाग लें|
जब हम आपकी तरफ से गायों को चारा खिलाते हैं तब यह कामधेनु (इच्छाओं की पूर्ति करने वाली गौ माता) का आशीर्वाद प्राप्त करने हेतु एक अतिरिक्त अवसर होता है तथा अन्नदान द्वारा ग़रीबों और ज़रूरतमंदों की सेवा होती है।
अमावस्या दिवसों पर गोकर्ण भागवत सप्ताह का पाठ (पवित्र वैदिक पाठ) करने से उस आत्मा को मुक्ति मिल सकती है जिसने घोर पाप कर्म किए हैं|
कृपया ध्यान दें तर्पण अनुष्ठान पूरा होने के बाद हम कोई भी प्रसाद नहीं भेजेंगे क्योंकि इस प्रकिया के उपरांत प्रसाद को अपने पास रखना सामान्यतः अशुभ समझा जाता है।