कर्मों का शुद्धिकरण करके अपने सपनों को साकार करें|
25 जून 2018 (भारतीय मानक समयानुसार)
आगामी त्रयोदशी तिथि को सोम प्रसाद के नाम से जाना जाता है क्योंकि यह सोमवार 11 व 25 जून 2018 (भारतीय मानक समयानुसार) को आएगी| प्रदोष जीवन के सभी क्षेत्रों जैसे स्वास्थ्य, वित्त व संबंध आदि से जुड़े नकारात्मक कर्मों को नष्ट करने का समय है। सोम प्रदोष चंद्रमा से संबंधित उन सभी पीडाओं को दूर करने के लिए प्रभावी है जो मानसिक पीड़ा का कारण बन सकती हैं|
चंद्र ग्रह ज्योतिष में महत्वपूर्ण है क्योंकि यह आपके दिमाग और भावनाओं को नियंत्रित करता है। सूर्यास्त से डेढ़ घंटे पूर्व प्रारंभ होने वाले प्रदोषकाल के दौरान ध्यान अवस्था में रहें| सोम प्रदोष अनुष्ठानों में भाग लें तथा बुरे कर्मों का शमन करने वाले ‘थिरु नील कंठ’ मंत्र का जाप करें|
सोमवार को पड़ने वाले प्रदोषकाल को बहुत शुभ माना जाता है क्योंकि यह जन्म-जन्मांतरों के संचित बुरे कर्मों के प्रभाव को कम कर सकता है। 11 जून को चंद्रमा शुक्र द्वारा शासित भरणी नक्षत्र में होगा तथा मेष राशि से गोचर करेगा| चंद्रमा गुरु से दृष्ट होगा| 25 जून को चंद्रमा शनि द्वारा शासित अनुराधा में होगा तथा वृश्चिक राशि से गोचर करेगा| इस दिन की नक्षत्रीय ऊर्जा व ग्रहों की स्थिति में निर्माण करने की क्षमता है इसलिए यह दिवस धन को आकर्षित करने में बाधक समस्याओं को नष्ट करने हेतु उत्तम है| सोम प्रदोष दूसरों को चोट पहुंचाने तथा विचारों और भावनाओं द्वारा उत्पन्न बुरे कर्मों से मुक्ति पाने के लिए एक श्रेष्ठ दिन है|
दो सोम प्रदोष हेतु आवश्यक अनुष्ठानों में अवश्य भाग लें| आपके दुर्भाग्य को दूर करने और जीवन में आकर्षक अवसर लाने के लिए यह प्रदोष अनुष्ठान सहायक हो सकते हैं।
इन अनुष्ठानों में आपकी तरफ से सोम प्रदोष दिवस पर त्रयोदशी तिथि के दिन बुरे कर्मों को निरस्त करने हेतु भगवान शिव तथा उनके पवित्र बैल नंदी से संबंधित लघुन्यास रूद्र प्रासनम व चमाकम प्रासनम मंत्र पाठ द्वारा जलाभिषेक अनुष्ठान एस्ट्रोवेद के उपचारात्मक केंद्र में किया जाता है| लघुन्यास महान्यास का लघु रूप है जिसका अर्थ ‘महान शुद्धीकरण’ होता है| यह रुद्र जलाभिषेक करने से पूर्व मन, शरीर व आत्मा को शुद्ध करने हेतु वेदिक मंत्रों का एक समूह है।
इस अनुष्ठान में 11 व 25 जून 2018 को एस्ट्रोवेद के यज्ञ अनुष्ठान व उपचारात्मक केंद्र में रूद्र त्रिशती(भगवान रूद्र के 300 नाम) का मंत्रोच्चारण करते हुए भगवान शिव से संबंधित बिल्व पत्र अर्चना भी की जाएगी| रूद्र त्रिशती अर्चना भगवान रूद्र से संबंधित है जिसमें श्री रुद्रम के श्लोकों का पाठ करते हुए पूजा-अर्चना की जाती है| यह वेदों में वर्णित भगवान रुद्र (शिव) की अर्चना करने का एकमात्र रूप है। इस अर्चना का मुख्य आकर्षण भगवान रुद्र को 300 बिल्वपत्र अर्पित करना है| भगवान शिव को बिल्वपत्र अर्पित करने से सबसे भयानक कर्म भी नष्ट हो जाते हैं|
आप क्या प्राप्त करेंगे?-
आपको पवित्र विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।
डॉ. पिल्लै के अनुसार-
“ यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।”
कृपया ध्यान दें-इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिया जाने वाला प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिया जाएगा। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।
दो सोम प्रदोष हेतु वर्धित अनुष्ठानों में अवश्य भाग लें| आपके दुर्भाग्य को दूर करने और जीवन में आकर्षक अवसर लाने के लिए यह प्रदोष अनुष्ठान सहायक हो सकते हैं।
इन अनुष्ठानों में आपकी तरफ से सोम प्रदोष दिवस पर त्रयोदशी तिथि के दिन बुरे कर्मों को निरस्त करने हेतु भगवान शिव तथा उनके पवित्र बैल नंदी से संबंधित लघुन्यास रूद्र प्रासनम व चमाकम प्रासनम मंत्र पाठ द्वारा जलाभिषेक अनुष्ठान एस्ट्रोवेद के उपचारात्मक केंद्र में किया जाता है| लघुन्यास महान्यास का लघु रूप है जिसका अर्थ ‘महान शुद्धीकरण’ होता है| यह रुद्र जलाभिषेक करने से पूर्व मन, शरीर व आत्मा को शुद्ध करने हेतु वेदिक मंत्रों का एक समूह है।
इस अनुष्ठान में 11 व 25 जून 2018 को एस्ट्रोवेद के यज्ञ अनुष्ठान व उपचारात्मक केंद्र में रूद्र त्रिशती(भगवान रूद्र के 300 नाम) का मंत्रोच्चारण करते हुए भगवान शिव से संबंधित बिल्व पत्र अर्चना भी की जाएगी| रूद्र त्रिशती अर्चना भगवान रूद्र से संबंधित है जिसमें श्री रुद्रम के श्लोकों का पाठ करते हुए पूजा-अर्चना की जाती है| यह वेदों में वर्णित भगवान रुद्र (शिव) की अर्चना करने का एकमात्र रूप है। इस अर्चना का मुख्य आकर्षण भगवान रुद्र को 300 बिल्वपत्र अर्पित करना है| भगवान शिव को बिल्वपत्र अर्पित करने से सबसे भयानक कर्म भी नष्ट हो जाते हैं|
आप क्या प्राप्त करेंगे?-
आपको पवित्र विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।
डॉ. पिल्लै के अनुसार-
“ यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।”
कृपया ध्यान दें-इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिया जाने वाला प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिया जाएगा। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।
दो सोम प्रदोष हेतु उत्कृष्ट अनुष्ठानों में अवश्य भाग लें| आपके दुर्भाग्य को दूर करने और जीवन में आकर्षक अवसर लाने के लिए यह प्रदोष अनुष्ठान सहायक हो सकते हैं।
इन अनुष्ठानों में आपकी तरफ से सोम प्रदोष दिवस पर त्रयोदशी तिथि के दिन बुरे कर्मों को निरस्त करने हेतु भगवान शिव तथा उनके पवित्र बैल नंदी से संबंधित लघुन्यास रूद्र प्रासनम व चमाकम प्रासनम मंत्र पाठ द्वारा जलाभिषेक अनुष्ठान एस्ट्रोवेद के उपचारात्मक केंद्र में किया जाता है| लघुन्यास महान्यास का लघु रूप है जिसका अर्थ ‘महान शुद्धीकरण’ होता है| यह रुद्र जलाभिषेक करने से पूर्व मन, शरीर व आत्मा को शुद्ध करने हेतु वेदिक मंत्रों का एक समूह है।
इस अनुष्ठान में 11 व 25 जून 2018 को एस्ट्रोवेद के यज्ञ अनुष्ठान व उपचारात्मक केंद्र में रूद्र त्रिशती(भगवान रूद्र के 300 नाम) का मंत्रोच्चारण करते हुए भगवान शिव से संबंधित बिल्व पत्र अर्चना भी की जाएगी| रूद्र त्रिशती अर्चना भगवान रूद्र से संबंधित है जिसमें श्री रुद्रम के श्लोकों का पाठ करते हुए पूजा-अर्चना की जाती है| यह वेदों में वर्णित भगवान रुद्र (शिव) की अर्चना करने का एकमात्र रूप है। इस अर्चना का मुख्य आकर्षण भगवान रुद्र को 300 बिल्वपत्र अर्पित करना है| भगवान शिव को बिल्वपत्र अर्पित करने से सबसे भयानक कर्म भी नष्ट हो जाते हैं|
आप क्या प्राप्त करेंगे?-
आपको पवित्र विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।
डॉ. पिल्लै के अनुसार-
“ यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।”
कृपया ध्यान दें-इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिया जाने वाला प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिया जाएगा। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।
मध्यम आकार के स्फटिक से निर्मित इस शिवलिंग को प्रदोष अनुष्ठानों के दौरान अभिमंत्रित किया जाएगा। भगवान शिव का अजन्मा व निराकार व मूल रूप शिवलिंग है| लिंगम भगवान शिव की पुरुष रचनात्मक ऊर्जा का प्रतीक है तथा सर्वोच्च चेतना या उच्चतम ज्ञान पाने हेतु इसकी पूजा की जाती है| शिवलिंग पर विशेष समय पर जलाभिषेक अनुष्ठान करने से आपके बुरे कर्मों को नष्ट करने में मदद मिलती है|
आप क्या प्राप्त करेंगे?-
आपको मध्यम आकार के अभिमंत्रित स्फटिक निर्मित शिवलिंग के साथ-साथ पवित्र यज्ञ से प्राप्त विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।
डॉ. पिल्लै के अनुसार-
“ यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।”
कृपया ध्यान दें- इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिया जाने वाला मध्यम आकार का अभिमंत्रित स्फटिक निर्मित शिवलिंग तथा प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिया जाएगा| विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।
प्रदोष अपने पापों को शुद्ध करने हेतु एक तकनीक है| यह हमारे नकारात्मक कर्म को नष्ट करने में मदद करता है| पूजा एक पवित्र अभ्यास है, जो कि ब्रह्मांडीय ऊर्जा या विशिष्ट देवी-देवता से संपर्क स्थापित करने के लिए की जाती है|
प्रदोष पूजा पोटली में एक मध्यम आकार का स्फटिक निर्मित शिवलिंग, एक तांबे की छोटी थाली, स्फटिक निर्मित नंदी तथा घंटी सहित एक तांबे की छोटी केतली शामिल है| इस समस्त वस्तुओं को शक्तिशाली सूर्य प्रदोष अनुष्ठानों के दौरान अभिमंत्रित किया जाएगा| आप प्रदोष अनुष्ठान हेतु इस पूजा पोटली का उपयोग कर सकते हैं।
आप क्या प्राप्त करेंगे?-
आपको अभिमंत्रित प्रदोष पूजा पोटली के साथ-साथ पवित्र यज्ञ से प्राप्त विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।
डॉ. पिल्लै के अनुसार-
“ यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।”
कृपया ध्यान दें- इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिए जाने वाली अभिमंत्रित प्रदोष पूजा पोटली तथा प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिए जाएंगे। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।
प्रदोष दिवस पर थिरु नीलकंठ मंत्र का लेखन बहुत शुभ माना जाता है। इस अनुष्ठान में भगवान शिव की कृपा पाने के लिए आपकी तरफ से 10,008 बार लिखा गया एक शक्तिशाली मंत्र आपको प्रदान किया जाता है| यह अभ्यास मन को केंद्रित करने में मदद करता है तथा इस मंत्र की निरंतर पुनरावृत्ति प्रायोजक की चेतना को बदलने के लिए जानी जाती है। प्रायोजक को मंत्र लेखकों की आजीविका को सहयोग देने का शुभावसर भी मिलता है|