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शुक्र का तुला राशि में गोचर


धन व सामंजस्यपूर्ण संबंधों हेतु इस 23
दिवसीय अवधि का पूंजी के रूप में उपयोग करें


भौतिक सुख-सुविधाओं को आकर्षित करने व संबंधों को सुदृढ़ करने हेतु वैदिक कार्यपद्धति

शुक्र का तुला राशि में प्रवेश

wealth

3 नवंबर 2017 को भौतिक सुख, विलासिता व सौंदर्य का ग्रह शुक्र प्राकृतिक राशिचक्र के अंतर्गत अपनी स्वराशि तुला में गोचर करेगा| अपनी स्वराशि में होने के कारण शुक्र आपको धन, फिजूलखर्ची, आभूषण, भू-संपति व सामंजस्यपूर्ण संबंध प्रदान करने का सामर्थ्य रखता है| यह गोचरीय दिवस शुक्र व उसकी अधिपति देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करके फायदेमंद ऊर्जाओं से लाभ उठाने के लिए सबसे उपयुक्त समय है।

यह गोचर आपको किस प्रकार प्रभावित करेगा?

प्राकृतिक राशिचक्र की सातवीं राशि तुला धन, संबंध व अन्य देशों से व्यापार की प्रतीक है। आप अपने जीवन में जो आनंद का अनुभव करते हैं, चाहे वह सौहार्दपूर्ण संबंधों से प्राप्त हो अथवा वित्तीय स्वतंत्रता या फिर रचनात्मक व कलात्मक प्रयासों में सफलता के जरिए मिलता हो, यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि शुक्र ग्रह की आपकी जन्मकुंडली में क्या स्थिति है। शुक्र ग्रह के साथ आपका संबंध ही यह तय करता है कि आप इस जीवनकाल में सांसारिक बंधनों का अनुभव किस प्रकार करते हैं, जिसमें वैवाहिक संबंध, व्यापारिक साझेदारी, आपकी प्रतिष्ठा, वैवाहिक आनंद और विदेशों में प्रभाव भी शामिल है।

इस गोचरीय अवधि के दौरान क्या करना चाहिए?

व्यावसायिक जीवन हेतु सुझाव-

Buisness
  • रिश्तों में शांति बनाए रखने हेतु हठीला स्वभाव न रखें|
  • अपने व्यावसायिक भागीदार के साथ समस्याओं को हल करने का यह सबसे उत्तम समय है|
  • व्यापारीगण भविष्य के लिए व्यावसायिक योजनाओं व रणनीतियों को बनाने व अमल में लाने के लिए इस समय का लाभ ले सकते हैं|

व्यक्तिगत जीवन हेतु सुझाव-

Personal
  • यह समय पुराने द्वेष व ईर्ष्या को मिटाकर व्यक्तिगत संबंधों को उत्तम बनाने हेतु सबसे अच्छा है|
  • यह समय अपने साथी को उसकी पूर्व गलतियों के लिए क्षमा करके जीवन में प्रेम व प्रीति वापस लाने हेतु भी बहुत उत्तम है|

इस दिन का ज्योतिषीय महत्व

तुला राशि में शुक्र बेहद आरामदायक स्थिति में होता है, इस राशि में वह विकास पाता है तथा अधिक आशीर्वाद प्रदान करता है| संबंध व विवाह का प्रधान कारक शुक्र 3 नवंबर से 26 नवंबर तक संबंधकारक राशि तुला में रहेगा| शुक्र तुला राशि में गुरु व सूर्य के साथ युति करेगा| सूर्य का नीचत्व शुक्र ग्रह की युति से भंग होकर एक शुभ योग का निर्माण करेगा जो कि आपने आप में एक दुर्लभ योग है| यह गोचर गुरु, सूर्य व शुक्र की युति से लाभ लेने के लिए सबसे उत्तम है। संबंधकारक ग्रह शुक्र की अपनी स्वराशि में आत्मकारक ग्रह सूर्य और वृद्धिकारक ग्रह गुरु के साथ युति आपके बुरे कार्मिक ऋणों को दूर करने हेतु आशीर्वाद प्रदान कर सकती है जो शायद आपको धन, भाग्य व समृद्धि को आकर्षित करने से रोक रहे हैं|

शुक्र तुला राशि प्रवेश से संबंधित शक्तिशाली अनुष्ठानों का विवरण-

  • ऐक्यमत्या सूक्तम यज्ञ- ऐक्यम का संस्कृत अर्थ संयोजन है| ऐक्यमत्या सूक्तम इस सिद्धांत का समर्थन करते हैं और इसमें छंद हैं जो प्रेम, सहयोग और एकता की आंतरिक भावना को सक्रिय कर सकते हैं। ऐक्यमत्या सूक्तम यज्ञ में भाग लेने से शांति, एकता, समृद्धि प्राप्त होती है तथा प्रत्येक व्यक्ति उनके परिवार व पूरे समाज को एक साथ आध्यात्मिक उत्थान प्रदान किया जा सकता है।
  • शुक्र ग्रह से संबंधित शक्तिस्थल में पूजा-अर्चना- यह विशेष पूजा-अर्चना शुक्र ग्रह की कृपा का आवाहन करती है जो आपको इस विशेष गोचरीय दिवस पर धन-सम्पदा व उत्तम संबंध प्रदान कर सकती है|
  • देवी लक्ष्मी से संबंधित पूजा-अर्चना- इस गोचरीय दिवस पर शुक्र ग्रह की अधिपति देवी लक्ष्मी की यह पूजा-अर्चना आपको धन, भाग्य व समृद्धि प्राप्त करने में मदद कर सकती है
  • सामूहिक मांगल्य अर्चना, कुमकुम अर्चना, स्वयंवर व थाली चर्थल- मांगल्यं या थाली एक विवाहित महिला द्वारा अपने पति के प्रति प्रेम के प्रतीक के रूप में गले के चारों ओर पहना जाने वाला दिव्य वैवाहिक धागा है। देवी लक्ष्मी को समर्पित इस विशेष मांगल्य अर्चना, कुमकुम अर्चना, स्वयंवर और थाली चर्थल (देवी लक्ष्मी के गले के चारों ओर थाली बांधने से जुड़ा अनुष्ठान) के द्वारा आप एक अच्छा जीवनसाथी प्राप्त कर सकते हैं या अपने जीवनसाथी के जीवन में शुभता को बढ़ा सकते हैं और आपसी स्नेह में वृद्धि कर सकते हैं|

शुक्र तुला राशि प्रवेश 2017 पैकेज

VENUS TRANSIT INTO LIBRA: RITUALS
  • आपकी तरफ से ऐक्यमत्या सूक्तम यज्ञ (संबंधों को सुदृढ़ करने व भौतिक सुखों को आकर्षित करने हेतु यज्ञ) किया जाएगा|
  • आपकी तरफ से सामूहिक मांगल्य अर्चना, कुमकुम अर्चना, स्वयंवर व थाली चर्थल आदि अनुष्ठान किए जाएंगे|
  • आपकी तरफ से शुक्र ग्रह से संबंधित शक्तिस्थल में पूजा-अर्चना की जाएगी|
  • आपकी तरफ से देवी लक्ष्मी के निमित पूजा-अर्चना की जाएगी|

तुला राशि में शुक्र बेहद आरामदायक स्थिति में होता है, इस राशि में वह विकास पाता है तथा अधिक आशीर्वाद प्रदान करता है| शुक्र ग्रह के साथ आपका संबंध ही यह तय करता है कि आप इस जीवनकाल में सांसारिक बंधनों का अनुभव किस प्रकार करते हैं, जिसमें वैवाहिक संबंध, व्यापारिक साझेदारी, आपकी प्रतिष्ठा, वैवाहिक आनंद और विदेशों में प्रभाव भी शामिल है। इस विशेष गोचरीय दिवस पर प्रेमकारक ग्रह शुक्र व उसकी अधिपति धनप्रदाता देवी लक्ष्मी की कृपा का आवाहन करके वित्तीय लाभ और सुदृढ़ संबंध प्राप्त करें|

आप क्या प्राप्त करेंगे?-

आपको पवित्र विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।

डॉ. पिल्लै के अनुसार-

“ यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।”

कृपया ध्यान दें-: इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिया जाने वाला प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिया जाएगा। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।