भारत के प्राचीन ऋषि-मुनियों की सबसे महान ख़ोज यह है कि त्रयोदशी तिथि के दिन प्रदोष व्रत रखने तथा भगवान शिव की आराधना करने से आप बुरे कर्मों का नाश कर सकते हैं।
यदि त्रयोदशी तिथि शनिवार के दिन आ जाए तो उसे शनि प्रदोष कहते हैं। यह विशिष्ट दिन होता है क्योंकि मूलरूप से प्रदोष की शुरुआत शनिवार से हुई थी।
आगामी शनि प्रदोष एक अतिरिक्त शक्तिशाली प्रदोष होगा। साथ ही शनि प्रदोष ही वह समय है जब हमे प्रदोष व्रत रखते हुए सामूहिक रूप से भगवान शिव की प्रार्थना करनी चाहिए।
25 मार्च 2017 को चंद्रमा कुंभ राशि तथा शतभिषा नक्षत्र से गोचर करेगा। शतभिषा नक्षत्र का स्वामी राहु है। इस दिन चंद्र चिकित्सीय गुण वाले नक्षत्र तथा इच्छाओं की पूर्ति करने वाली राशि में होगा। यह ग्रह स्थिति आपकी प्रार्थनाओं को भगवान शिव तक पहुंचने में सहायता करेगी। यह ग्रहीय स्थिति इस दिन को बुरे स्वास्थ्य से छुटकारा पाने तथा अच्छे स्वास्थ्य हेतु भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए सशक्त बनाती है। इसके अतिरिक्त यह दिन सरीसृपों तथा गुरुओं के प्रति हुए पाप कर्मों से मुक्त होने की क्षमा-प्रार्थना करने हेतु एक आदर्श दिन है क्योंकि इस दिन चंद्रमा राहु-केतु के प्रभाव में रहेगा। क्योंकि यह प्रदोष शनिवार को पड़ रहा है तथा इस दौरान चन्द्रमा भी शनि की राशि में रहेगा इसलिए यह दीर्घायु प्राप्त करने के लिए एक आदर्श दिन है।
8 अप्रैल 2017 को चंद्रमा पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र तथा सिंह राशि से गोचर करेगा। पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। इस दिन यह नक्षत्र कार्यों की फल प्राप्ति हेतु ऊर्जा प्रदान करेगा इसलिए पूर्वजन्म के अर्जित बुरे कर्मों का नाश करने हेतु यह एक आदर्श दिन है। इस दिन किए गए सद्कार्य आपके अच्छे कर्मों को कई गुना बढ़ाने में आपकी मदद कर सकते हैं। बच्चों के साथ किए गए दुर्व्यवहार से उत्पन्न पापों को समाप्त करने के लिए यह एक आदर्श दिन है।
” प्रदोष एक ऐसा दिन होता है जब भगवान शिव स्वयं मनुष्यों को उनके बुरे कर्मों के दुष्प्रभाव से मुक्त करते हैं। यही वह दिन है जब भगवान शिव ने विषपान किया। यही विष मनुष्यों के बुरे कर्मों का प्रतीक है। प्रदोष काल के दौरान हर किसी को अपने कर्मों को स्वच्छ व पवित्र करने का अवसर मिलता है।”
– आवश्यक शनि प्रदोष अनुष्ठान
– वर्धित शनि प्रदोष अनुष्ठान
– उत्कृष्ट शनि प्रदोष अनुष्ठान
– अभिमंत्रित स्फटिक शिवलिंग(मध्यम आकार)
– अभिमंत्रित शनि महा पूजा पोटली
इस मध्यम आकार के स्फटिक शिवलिंग को शनि प्रदोष अनुष्ठानों के दौरान अभिमंत्रित किया जाएगा। शिवलिंग को भगवान शिव का साक्षात स्वरुप माना जाता है। यह भगवान शिव की पुरुष रचनात्मक ऊर्जा को दर्शाता है। उच्चतम चेतना व परम ज्ञान की प्राप्ति के लिए इसकी पूजा की जाती है। विशेष कालों में शिवलिंग पर जलाभिषेक करने से आपके बुरे कर्मों का शमन होता है।
आप क्या प्राप्त करेंगे?
आपको मध्यम आकार के अभिमंत्रित स्फटिक शिवलिंग के अतिरिक्त पवित्र यज्ञ से प्राप्त विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।
डॉ. पिल्लै इसे इस प्रकार समझाते हैं-
यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।
कृपया ध्यान दें- इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिया जाने वाला मध्यम आकार का स्फटिक शिवलिंग तथा प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिया जाएगा। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।
प्रदोष के माध्यम से हम अपने पापों का नाश कर सकते हैं। पूजा एक ऐसा पवित्र अभ्यास है जो कि ब्रह्मांडीय ऊर्जा अथवा ईश्वर के निश्चित स्वरुप से हमें जोड़ती है। वेदों के अनुसार ,महान शनि ग्रह के अतिरिक्त अन्य कोई ऐसा ग्रह नहीं है जो कि आपको वह सब दे सके जो शनि दे सकता है।
शनि कठिनाइयों व मुश्किलों के अतिरिक्त जीवन के संघर्षों से जूंझने की क्षमता भी प्रदान करता है। शनि आपके कर्मों का प्रतिनिधि है। शनि की महादशा, अंतर्दशा या साढेसाती के समय शनि महा पूजा पोटली की मदद से पूजा करना शनि प्रदत कष्ट को चमत्कारिक रूप से कम करता है। साथ ही इस शनि महा पूजा पोटली के माध्यम से आप शनिदेव की पूजा सरलता से कर सकते हैं।
शनि महा पूजा पोटली की अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें।
आप क्या प्राप्त करेंगे?
आपको अभिमंत्रित शनि महा पूजा पोटली के साथ-साथ पवित्र यज्ञ से प्राप्त विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।
डॉ. पिल्लै इसे इस प्रकार समझाते हैं-
यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।”
कृपया ध्यान दें- इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दी जाने वाली शनि महा पूजा पोटली तथा प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिए जाएंगे। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।
आप क्या प्राप्त करेंगे?
आपको पवित्र विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।
डॉ. पिल्लै इसे इस प्रकार समझाते हैं-
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कृपया ध्यान दें-: इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिया जाने वाला प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिया जाएगा। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।
आप क्या प्राप्त करेंगे?
आपको पवित्र विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।
डॉ. पिल्लै इसे इस प्रकार समझाते हैं-
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कृपया ध्यान दें-: इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिया जाने वाला प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिया जाएगा। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।
आप क्या प्राप्त करेंगे?
आपको पवित्र विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।
डॉ. पिल्लै इसे इस प्रकार समझाते हैं-
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