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शनिदेव के जन्मदिवस से संबंधित अनुष्ठान

4 पुजारियों द्वारा भव्य बीजाक्षर शनेश्वर ग्रह आराधना यज्ञ

(शनि बीज मंत्रोच्चारण तथा ग्रह शांति यज्ञ अनुष्ठान)

अब वैदिक कार्यपद्धति से शनिदेव को प्रसन्न करके अनुकूल आशीर्वाद प्राप्त करें|

सीधा प्रसारण 24 मई 2017 को रात्रि 9:05 बजे(पैसेफिक मानक समयानुसार)/ 25 मई 2017 को रात्रि 12:05 बजे(ईस्टर्न मानक समयानुसार)/प्रातः 9:35 बजे(भारतीय मानक समयानुसार)


स्कंद पुराण के अनुसार शनिदेव का जन्म हिन्दू चान्द्र मास वैशाख में अमावस्या तिथि को हुआ था| इस वर्ष शनि जयंती 25 मई 2017 को मनाई जाएगी| सूर्यदेव और छाया देवी की द्वितीय संतान के रूप में जन्मे शनिदेव को भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त है क्योंकि उनकी मां ने एक कड़ी तपस्या की थी, जब शनिदेव उनके गर्भ में थे| शनि जयंती पर शनिदेव को अनुष्ठानों के माध्यम से प्रसन्न व शांत करना शुभ माना जाता है| यज्ञ अनुष्ठान, मंदिरों में तिल के तेल तथा अन्य दान कृत्यों में भाग लेने से आपको शनिदेव की विशेष कृपा प्राप्त होती है|

शनिदेव के जन्म से जुड़ी पौराणिक कथा

CHANDI HOMA

शनि अपनी मां छाया की कड़ी तपस्या के कारण काले रंग में पैदा हुए थे| शनि को उनकी माता ने अपनी तपस्या की दिव्य ऊर्जा के माध्यम से गर्भ में पोषित किया था, जिसके परिणामस्वरूप शनि भगवान शिव के प्रबल भक्त बन गए थे। शनि को भगवान शिव ने एक गुरु के रूप में आशीर्वाद प्रदान किया| उन्होंने शनि को ग्रह के रूप में दर्जा दिया तथा धरती पर प्राणियों को उनके कर्मों के अनुसार बिना किसी भेदभाव के फल प्रदान करने का दायित्व सौंपा|

शनि बीजाक्षर मंत्रोच्चारण तथा ग्रह शांति यज्ञ अनुष्ठान का महत्व

एस्ट्रोवेद ने शनि जयंती के अवसर पर शनिदेव की कृपा प्राप्त करने हेतु एक विशेष यज्ञ अनुष्ठान की व्यवस्था की है| इस अनुष्ठान में शनिदेव के बीज मंत्र व पवित्र यज्ञ के द्वारा उनकी पूजा-अर्चना की जाएगी| अनुशासन, कड़ी मेहनत और दृढ़ता के प्रतीक शनिदेव को उनके जन्मदिवस पर प्रसन्न करने तथा उनकी अनुकूल कृपा प्राप्त करने के लिए पूजा-अचना की जा सकती है| यदि आप पर शनि साढ़ेसाती, ढैय्या का प्रभाव है या फिर शनि आपकी पत्रिका में प्रतिकूल स्थिति में हैं, तो शनि जयंती सबसे शक्तिशाली दिनों में से एक है जब आप उन्हें प्रसन्न करके उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं|

शनिदेव की कृपा प्राप्त करने हेतु ग्रहीय सहयोग

इस दिन चंद्रमा सूर्य के नक्षत्र कृतिका से गोचर करेगा| सूर्यदेव शनि के पिता हैं| इस नक्षत्र के देवता अग्नि हैं| इस नक्षत्र में जलाने और शुद्ध करने की शक्ति है| इस दिन सूर्य व चंद्रमा शुक्र की वृषभ राशि में रहेंगे तथा यह दोनों प्रकाशवान ग्रह 25 मई को कृतिका नक्षत्र से गोचर करेंगे| इस दिन गुरु व शुक्र परस्पर एक-दूसरे पर दृष्टि डालेंगे तथा शुक्र प्राकृतिक राशिचक्र की बारहवीं राशि अर्थात मीन में उच्चस्थ होंगे| इसलिए अपने सभी नकारात्मक विचारों और भावनाओं को जलाकर शुद्ध करने तथा शनिदेव की कृपा प्राप्त करने के लिए के लिए यह सबसे अच्छा दिन है। क्योंकि कृतिका नक्षत्र के स्वामी अग्निदेव हैं इसलिए यज्ञ अनुष्ठानों के माध्यम से आप आसानी से उनकी कृपा प्राप्त कर सकते हैं|

शनि जयंती पर होने वाले विशिष्ट अनुष्ठानों के लाभ
  • शनि ग्रह की पीड़ा शांत होती है|
  • आपको धन-संपति, शक्ति व समृद्धि की प्राप्ति होती है|
  • आपकी आंतरिक शक्ति में वृद्धि होती है तथा बाधाओं से छुटकारा मिलता है|
  • आप कुशल बनते हैं तथा व्यवस्थित जीवन जीने में आपको मदद मिलती है|
  • आप उत्कृष्ट प्रबंधक बनते हैं|



शनि जयंती पर होने वाले अनुष्ठानों की कुछ विशेषताएं

Highlights of Saturn Birthday Ceremonies
  • आपकी तरफ से बीजाक्षर शनेश्वर ग्रह आराधना यज्ञ(शनि बीज मंत्रोच्चारण तथा ग्रह शांति यज्ञ अनुष्ठान) किया जाएगा|
  • आपकी तरफ से शनि जयंती के दिन शनिदेव के शक्तिस्थल पर पूजा-अर्चना की जाएगी|
  • आपकी तरफ से शनिदेव के दो शक्तिस्थलों पर तिल के तेल का दान किया जाएगा|
  • आपकी तरफ से कौओं व चींटियों को आहार दिया जाएगा|

एस्ट्रोवेद ने शनि जयंती के अवसर पर शनिदेव की कृपा प्राप्त करने हेतु एक विशेष यज्ञ अनुष्ठान की व्यवस्था की है| इस अनुष्ठान में शनिदेव के बीज मंत्र व पवित्र यज्ञ के द्वारा उनकी पूजा-अर्चना की जाएगी| शनि जयंती पर शनिदेव को अनुष्ठानों के माध्यम से प्रसन्न व शांत करना शुभ माना जाता है| यज्ञ अनुष्ठान, मंदिरों में तिल के तेल तथा अन्य दान कृत्यों में भाग लेने से शनिदेव की विशेष कृपा प्राप्त होती है| शनि जयंती के इस शुभावसर पर कर्मफलदाता शनिदेव के आवाहन द्वारा नकारात्मक प्रभावों का शमन करके शक्ति व समृद्धि प्राप्त कीजिए|

आप क्या प्राप्त करेंगे?

आपको पवित्र विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।

डॉ. पिल्लै के अनुसार-

“ यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।”

कृपया ध्यान दें- इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिया जाने वाला प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिया जाएगा। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।