x
cart-added The item has been added to your cart.

शनिदेव के जन्मदिवस पर उन्हें प्रसन्न करके नकारात्मक प्रभावों से मुक्ति पाएं तथा कार्यक्षेत्र से जुड़ी महत्वकांक्षाओं को पूर्ण करने हेतु आशीर्वाद प्राप्त करें|

शनि जयंती: शनि जयंती अनुष्ठान

5 पुजारियों द्वारा शनि बीजाक्षर मंत्र के 10008 बार मंत्रोच्चारण सहित भव्य यज्ञ

सीधा प्रसारण 15 मई 2018 को प्रातः 6:00 बजे (पैसेफिक मानक समयानुसार)/ प्रातः 9:00 बजे (ईस्टर्न मानक समयानुसार)/ सांयकाल 6:30 बजे (भारतीय मानक समयानुसार)

अधिलाभांश: कर्म शोधन शनि प्रदोष अनुष्ठान
की छूट प्राप्त करें: 15% OFF शनि जयंती अनुष्ठान पर
  • Day(s)

  • :

  • Hour(s)

  • :

  • Minute(s)

  • :

  • Second(s)

“शनि सर्वाधिक महत्वपूर्ण ग्रह है क्योंकि वह हमारी आत्मा को परिपक्व बनाता है।”

–डॉ. पिल्लै

शनिदेव के जन्मदिवस पर उन्हें प्रसन्न करके राहत पाएं

Saturn Birthday

शनि अनुशासन, कड़ी मेहनत व दृढ़ता से संबंधित ग्रह है। वैदिक ज्योतिष में शनि को समस्त ग्रहों के मुकाबले कठोर व सर्वाधिक अनुशासित माना जाता है तथा इसका आपके जीवन पर एक गहन प्रभाव पड़ता है। स्कंद पुराण के अनुसार शनिदेव का जन्म सूर्य व छाया के संयोग से हिन्दू चान्द्र मास वैशाख में अमावस्या तिथि को हुआ था| इस वर्ष शनि जयंती 15 मई 2018 को मनाई जाएगी| शनि जयंती पर शनिदेव को अनुष्ठानों के माध्यम से प्रसन्न व शांत करना शुभ माना जाता है| यदि आप पर शनि की महादशा/अंतर्दशा, साढ़ेसाती, चतुर्थ व अष्टम ढैय्या का प्रभाव है या फिर शनि आपकी जन्मकुंडली में प्रतिकूल स्थिति में हैं तो शनि जयंती पर उपचारात्मक अनुष्ठानों में भाग लेना आपके लिए महत्वपूर्ण है|

शनिदेव के जन्म से जुड़ी पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार जब शनिदेव अपनी माता छाया देवी के गर्भ में थे, उस दौरान उनकी माता ने भगवान शिव की कड़ी तपस्या की थी| इसलिए शनिदेव को जन्म से ही भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त है। वह अपनी मां छाया की कड़ी तपस्या के कारण श्याम वर्ण लेकर पैदा हुए थे| शनिदेव की कर्त्तव्यनिष्ठ व निष्पक्ष प्रकृति देखकर भगवान शिव ने उन्हें एक ग्रह का पद प्रदान किया तथा सप्तलोकों व धरती पर प्राणियों को उनके कर्मों के अनुसार बिना किसी भेदभाव के फल प्रदान करने का दायित्व सौंपा|

चूंकि शनि एक कर्मिक ग्रह है इसलिए शनि का अच्छा-बुरा प्रभाव आपके कर्म पर निर्भर करता है। मंद गति से चलने वाला यह कठोर शिक्षक जीवन के सबक सीखने व चुनौतियों का सामना करने में आपकी सहायता करेगा।

शनि बीजाक्षर मंत्रोच्चारण यज्ञ का महत्व

Saturn Birthday

शनि जयंती शनिदेव को प्रसन्न करने व उनकी कृपा के लिए कृतज्ञता व्यक्त करने हेतु एक बहुत ही महत्वपूर्ण दिन है| शनि जयंती (शनि जन्मदिवस) पर एस्ट्रोवेद ने उनकी कृपा का आवाहन करने के लिए शनि बीज मंत्र (बीज ध्वनि) के 10,008 बार मंत्रोच्चारण द्वारा एक विशेष यज्ञ अनुष्ठान संपन्न करने की व्यवस्था की है। एक देवता का बीज मंत्र (बीज ध्वनि) प्रचुर सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण होता है तथा इसमें संबंधित देवता के कृपापूर्ण आशीर्वाद प्रदान करने की कई गुणा विशाल शक्ति होती है।

शनि जयंती के दौरान शनि बीज मंत्र का जप करने से शनि कृपा प्राप्त होती है तथा शनिदेव के आशीर्वाद से करुणा, धार्मिकता, कर्तव्य-चेतना, अनुशासन व ज़िम्मेदारी आदि गुणों को विकसित करने में सहायता मिल सकती है| शनिदेव आपको अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूर्ण करने, कार्यक्षेत्र में उन्नति करने तथा व्यवहारिक यथार्थवादी जीवन जीने में भी मदद कर सकते हैं|

शनिदेव की कृपा प्राप्त करने हेतु ग्रहीय सहयोग

15 मई 2018 को चंद्रमा सूर्य के कृतिका नक्षत्र से गोचर करेगा| इस नक्षत्र के देवता अग्नि हैं| इस नक्षत्र में जलाने और शुद्ध करने की शक्ति है| इस दिन चंद्रमा गुरु व मंगल से दृष्ट होगा| यह ग्रहीय स्थिति आपके प्रतिकूल कर्मों, विचारों व भावनाओं को शुद्ध करने हेतु इस दिन को श्रेष्ठ बनाती है। जैसा कि कृतिका नक्षत्र के देवता अग्नि (अग्नि देवता) हैं इसलिए इस दिन यज्ञ अनुष्ठान करने से आपकी प्रार्थनाएं शनिदेव तक आसानी से पहुंच सकती हैं तथा आपको दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य प्राप्त होकर मृत्यु भय व हारने के डर से मुक्ति मिल सकती है| धैर्य, दृढ़ता व एक उद्देश्यपूर्ण जीवन हेतु शनिदेव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए यह सर्वोत्तम दिन है।

शनि जयंती अनुष्ठानों की व्याख्या

एस्ट्रोवेद शनि जयंती के शुभावसर पर शनिदेव की प्रसन्नता हेतु निम्नलिखित अनुष्ठानों का आयोजन करेगा

Grand Homa

15 मई 2018 को 5 पुजारियों द्वारा शनि बीजाक्षर मंत्र के 10008 बार मंत्रोच्चारण सहित भव्य यज्ञ-

ऐसा माना जाता है कि शनि जयंती पर शनिदेव के निमित उनके बीजाक्षर मंत्र के 10,008 बार उच्चारण द्वारा इस विशेष यज्ञ अनुष्ठान को संपन्न करने से आपको अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूर्ण करने, कार्यक्षेत्र में उन्नति करने तथा व्यवहारिक यथार्थवादी जीवन जीने में मदद मिल सकती है|

15 मई 2018 को 3 शनि शक्तिस्थलों पर पूजा-अर्चना-

ऐसा माना जाता है कि 3 विशेष शक्तिस्थलों पर शनिदेव के निमित होने वाली इस पूजा-अर्चना द्वारा आपके दुःखों की तीव्रता कम हो सकती है, दुर्भाग्य व ख़राब किस्मत से मुक्ति मिल सकती है, सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने, बाधाओं को दूर करने, दुर्घटनाओं से बचने, घरेलू समस्याओं को हल करने, पेशेवर जीवन में प्रगति करने में सहायता मिल सकती है|

Food Feeding

15 मई 2018 को ग़रीब व ज़रूरतमंद लोगों को अन्नदान-

शास्त्रों के अनुसार, गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन कराना सभी दानों में सबसे ऊंचा है। मान्यता है कि शनि जयंती पर अन्नदान करने से आपको शनिदेव का कृपापूर्ण आशीर्वाद प्राप्त हो सकता है तथा जीवन में समस्याओं से मुक्ति मिल सकती है|

Kerala Powerspot

15 मई 2018 को केरल शक्तिस्थल पर इल्लूकिज्ही अनुष्ठान (तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करने से संबंधित अनुष्ठान)-

तिल के बीज शनिदेव का प्रिय भोग है तथा केरल शक्तिस्थल पर शनिदेव के निमित तिल के तेल का दीपक अर्पित करने से शनि ग्रह के दुष्प्रभावों में कमी आ सकती है|

अधिलाभांश अनुष्ठान :

Shiva and Nandi

26 मई 2018 को एस्ट्रोवेद के यज्ञ अनुष्ठान व उपचारात्मक केंद्र में कर्मों को निरस्त करने हेतु भगवान शिव व नंदी के निमित लघुन्यास रूद्र प्रासनम व चमाकम प्रासनम पाठों के मंत्रोच्चारण द्वारा जलाभिषेक अनुष्ठान-

मान्यता है कि शनि ग्रह के अधिदेव भगवान शिव के निमित रुद्रम व चमाकम स्तोत्रों के पाठ द्वारा जलाभिषेक करने से आपके बुरे कर्मों का शमन हो सकता है|

Narashima

26 मई 2018 को एस्ट्रोवेद के यज्ञ अनुष्ठान व उपचारात्मक केंद्र में भगवान नृसिंह के निमित पूजा-अर्चना-

पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान विष्णु के चौथे अवतार भगवान नृसिंह हिरण्यकश्यपु (जो अहंकार व गर्व का प्रतीक है|) का वध करने के लिए प्रदोष अवधि के दौरान एक खंभे से प्रकट हुए थे| शनि प्रदोष दिवस पर भगवान नृसिंह के निमित पूजा-अर्चना करने से आपको उनकी दैवीय कृपा प्राप्त हो सकती है तथा आंतरिक व बाहरी समस्त नकारात्मक शक्तियों का शमन हो सकता है|

26 मई 2018 को एस्ट्रोवेद के यज्ञ अनुष्ठान व उपचारात्मक केंद्र में रूद्र त्रिशती पाठ (भगवान रूद्र के 300 नाम) के मंत्रोच्चारण द्वारा बिल्वपत्र अर्चना-

मान्यता है कि रूद्र त्रिशती पाठ के मंत्रोच्चारण द्वारा इस विशेष पूजा-अर्चना को संपन्न करने से आपके सर्वाधिक बुरे कर्मों का भी शमन हो सकता है|

Shiva Archana

26 मई 2018 को भगवान शिव के शक्तिस्थल पर पूजा-अर्चना-

शनि प्रदोष दिवस पर भगवान शिव के शक्तिस्थल पूजा-अर्चना करने से आपको पूर्व जन्म के बुरे कर्मों से मुक्ति मिल सकती है तथा एक आनंदपूर्ण जीवन की प्राप्ति हो सकती है|

Saturn

26 मई 2018 को शनिदेव के शक्तिस्थल पर पूजा-अर्चना-

शनि प्रदोष दिवस के दौरान शनिदेव के शक्तिस्थल पर पूजा-अर्चना करने से आपको उनके कृपापूर्ण आशीर्वाद प्राप्त हो सकते हैं|

SHANI JAYANTHI PACKAGE

शनि जयंती पैकेज

  • आपकी तरफ से 15 मई 2018 को 5 पुजारियों द्वारा शनि बीजाक्षर मंत्र के 10008 बार मंत्रोच्चारण सहित भव्य यज्ञ किया जाएगा|
  • आपकी तरफ से 15 मई 2018 को 3 शनि शक्तिस्थलों पर पूजा-अर्चना की जाएगी|
  • आपकी तरफ से 15 मई 2018 को ग़रीब व जरुरतमंद लोगों को अन्नदान किया जाएगा|
  • आपकी तरफ से 15 मई 2018 को केरल शक्तिस्थल पर इल्लूकिज्ही अनुष्ठान (तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करने से संबंधित अनुष्ठान) किया जाएगा|
  • अधिलाभांश अनुष्ठान

  • आपकी तरफ से 26 मई 2018 को एस्ट्रोवेद के यज्ञ अनुष्ठान व उपचारात्मक केंद्र में कर्मों को निरस्त करने हेतु भगवान शिव व नंदी के निमित लघुन्यास रूद्र प्रासनम व चमाकम प्रासनम पाठों के मंत्रोच्चारण द्वारा जलाभिषेक अनुष्ठान किया जाएगा|
  • आपकी तरफ से 26 मई 2018 को एस्ट्रोवेद के यज्ञ अनुष्ठान व उपचारात्मक केंद्र में भगवान नृसिंह के निमित पूजा-अर्चना की जाएगी|
  • आपकी तरफ से 26 मई 2018 को एस्ट्रोवेद के यज्ञ अनुष्ठान व उपचारात्मक केंद्र में रूद्र त्रिशती पाठ (भगवान रूद्र के 300 नाम) के मंत्रोच्चारण द्वारा बिल्वपत्र अर्चना की जाएगी|
  • आपकी तरफ से 26 मई 2018 को भगवान शिव के शक्तिस्थल पर पूजा-अर्चना की जाएगी|
  • आपकी तरफ से 26 मई 2018 को शनिदेव के शक्तिस्थल पर पूजा-अर्चना की जाएगी|

शनि अनुशासन, कड़ी मेहनत व दृढ़ता से संबंधित ग्रह है। वैदिक ज्योतिष में शनि को समस्त ग्रहों के मुकाबले कठोर व सर्वाधिक अनुशासित माना जाता है तथा इसका आपके जीवन पर एक गहन प्रभाव पड़ता है। यदि आप पर शनि की महादशा/अंतर्दशा, साढ़ेसाती, चतुर्थ व अष्टम ढैय्या का प्रभाव है या फिर शनि आपकी जन्मकुंडली में प्रतिकूल स्थिति में हैं तो शनि जयंती पर उपचारात्मक अनुष्ठानों में भाग लेना आपके लिए महत्वपूर्ण है| शनि जयंती पर शनिदेव को प्रसन्न करके राहत पाने के लिए हमारे शनि जयंती अनुष्ठानों में अवश्य भाग लें|

आप क्या प्राप्त करेंगे?-

आपको पवित्र विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।

डॉ. पिल्लै के अनुसार-

“ यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।”

कृपया ध्यान दें- इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिया जाने वाला प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिया जाएगा। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।