सफलता व उत्तम समय को बढ़ाने तथा अपने लक्ष्य को पहचाने हेतु आदर्श समय
शक्तिस्थल के पंचांगानुसार कार्मिक ग्रह शनि 19 दिसंबर 2017 को धनु राशि में प्रवेश करेगा तथा 28 मार्च 2020 तक इसी राशि में गोचर करेगा| इस गोचर के दौरान यह ग्रह आपको अधिक संगठित, लक्ष्य-उन्मुख और अपनी इच्छाओं को पूर्ण करने हेतु केंद्रित कर सकता है| आपका ध्यान स्वाभाविक रूप से दृढ़ता और कड़ी मेहनत के माध्यम से अपने भाग्य को सुदृढ़ करने की दिशा में लगेगा| यह आपके वित्तीय लक्ष्यों को फिर से परिभाषित करने और उनके प्रति कार्य करने के लिए एक मजबूत इरादा निश्चित करने हेतु उत्तम समयावधि है| इसलिए धनु राशि में शनि की इस 831 दिनों की गोचरीय अवधि का उपयोग अपनी कड़ी मेहनत का लाभ लेने के लिए करें।
जैसा कि शनि प्राकृतिक राशि चक्र में धर्म-कर्म के नवें भाव से गोचर कर रहा है इसलिए वह आपके बुरे कर्मों के संचय को दूर करने और जीवन में सकारात्मकता लाने में मदद करेगा। सकारात्मकता बढ़ने के कारण आपको कार्यक्षेत्र, भाग्य, लंबी दूरी की यात्रा व विदेश यात्राओं में अधिक आसानी से सफलता प्राप्त हो सकती है| इस अवधि के दौरान आपकी ज़िम्मेदारी की भावना बढ़ेगी और आप मात्रा की अपेक्षा गुणवत्ता को अधिक पसंद करेंगे| जीवन में एक नई वास्तविकता का अनुभव करने हेतु शुभ बृहस्पति की धनु राशि में शनि का यह गोचर आपके सकारात्मक विचारों को बढ़ाने में मदद करेगा|
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व्यापारिक व पेशेवर जीवन हेतु सुझाव-
व्यक्तिगत जीवन हेतु सुझाव-
19 दिसंबर को शक्तिस्थल पर अभय वेंकटेश्वर स्वामी की पूजा-अर्चना- भगवान अभय वेंकटेश्वर स्वामी का दायाँ हाथ अभय मुद्रा (आशीर्वाद मुद्रा) में है जो कि भगवान वेंकटेश्वर के मूल रूप से विपरीत है| अभय वेंकटेश्वर स्वामी की इस परम आशीर्वादात्मक प्रतिमा के समक्ष विशेष पूजा-अर्चना द्वारा शनि के नकारात्मक प्रभावों को नियंत्रित करके अपनी समस्त इच्छाओं को पूर्ण किया जा सकता है|
19 दिसंबर को शक्तिस्थल पर शनिदेव व भगवान शिव की पूजा-अर्चना- शनिदेव व उनके अधिपति देव भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से शनि की संपूर्ण गोचरीय अवधि (19 दिसंबर 2017 – 28 मार्च 2020) या शनि की महादशा (आपकी जन्मकुंडली के अनुसार) के दौरान आप सुरक्षित रह सकते हैं या आपकी जन्मकुंडली में शनि की स्थिति के कारण उत्पन्न दुष्प्रभावों को कम कर सकते हैं|
19 दिसंबर को केरल शक्तिस्थल पर धर्म सस्था हेतु नीरांजन अनुष्ठान- भगवान अयप्पा आपकी जन्मकुंडली में शनि के दोषपूर्ण प्रभावों को कम करने में मदद कर सकते हैं। नीरांजन भगवान अयप्पा को अर्पित एक विशेष भोग है| यह भोग तिल के बीज और कच्चे चावल को तिल के तेल में डुबाकर तैयार किया जाता है जो आधा नारियल में भरा होता है। यह भोग आपको कठिनाइयों से निपटने और आनंदित जीवन जीने में सहायता कर सकता है|
19 दिसंबर को केरल शक्तिस्थल पर धर्म सस्था यज्ञ- भगवान अय्यप्पा के निमित नंबूदिरी नामक विशेष केरल पुजारियों द्वारा किया गया यह यज्ञ साढ़ेसाती (शनि की 7.5 वर्ष की अवधि), अष्टम शनि, चतुर्थ शनि व शनि दोष(शनि पीड़ा) के प्रभाव को शांत करने में मदद कर सकता है।
19 दिसंबर को केरल शक्तिस्थल पर एल्लू पारा अनुष्ठान- “एल्लू” शब्द का अर्थ तिल के बीज हैं। शनिदेव से संबंधित शक्तिस्थल पर तिल के बीज से भरा एक पारा(मापक पात्र) अर्पित करने से शनिदोष (पीड़ा) को नियंत्रित किया जा सकता है|
19 दिसंबर को सामूहिक तिल यज्ञ (पवित्र यज्ञ अनुष्ठान)- तिल या तिल के बीज पर शनि ग्रह का अधिकार है। गोचर दिवस पर तिल के बीज अर्पित करके तिल यज्ञ करने से शनिदेव को प्रसन्न किया जा सकता है तथा अपने पैतृक कर्मों का नाश करके निरंतर उन्नति हेतु आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है|
केरल में भगवान अय्यप्पा के शक्तिस्थल पर अन्नदान-भूखे व्यक्ति को भोजन कराना ईश्वरीय कृपा प्राप्त करने का सबसे सरल माध्यम है| शास्त्रों के अनुसार, गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन कराना सभी दानों में सबसे ऊंचा है।
19 दिसंबर 2017 को चन्द्रमा पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में होगा तथा धनु राशि में शनि व सूर्य के साथ युति करेगा| अजेय नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा में स्थित चन्द्रमा इस दिन को सफलता के बीज बोने और लक्ष्यों को पूरा करने हेतु आवश्यक ऊर्जा से भर देगा| गोचर की शुरुआत में उपचारात्मक अनुष्ठान करने से आपको एक नई और सकारात्मक वास्तविकता से जुड़ने में मदद मिलती है और शनि ग्रह के आशीर्वाद प्राप्त होते हैं।
जैसा कि शनि प्राकृतिक राशि चक्र में धर्म-कर्म के नवें भाव से गोचर कर रहा है इसलिए वह आपके बुरे कर्मों के संचय को दूर करने और जीवन में सकारात्मकता लाने में मदद करेगा। यह आपके वित्तीय लक्ष्यों को फिर से परिभाषित करने और उनके प्रति कार्य करने के लिए एक मजबूत इरादा निश्चित करने हेतु उत्तम समयावधि है| इसलिए धनु राशि में शनि की इस 831 दिनों की गोचरीय अवधि का उपयोग अपनी कड़ी मेहनत का लाभ लेने के लिए करें। अपने लक्ष्यों को पहचानने तथा सफलता व उत्तम समय को बढ़ाने हेतु इस विशेष गोचरीय दिवस पर शनिदेव का आवाहन करके उनकी कृपा प्राप्त करें|
आप क्या प्राप्त करेंगे?-
आपको पवित्र विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।
डॉ. पिल्लै के अनुसार-
” यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।”
कृपया ध्यान दें-इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिया जाने वाला प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिया जाएगा। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।
| चन्द्र राशि | शनि 2017-2020 में आपको कैसा लाभ देगा? |
|---|---|
| मेष | इस अवधि में शनि आपके जन्मकालीन चन्द्र से नवम भाव में रहेंगे जिसके फलस्वरूप आप काम-धंधे को लेकर लंबी दूरी की यात्राएं कर सकते हैं. भाग्य भी पूरी तरह से आपका साथ देगा और आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत बनेगी. |
| वृष | इस अवधि में शनि आपके जन्मकालीन चन्द्र से अष्टम भाव में रहेंगे. जिससे आपके कार्यक्षेत्र में कुछ बदलाव आएंगे. पैत्रिक संपति का लाभ आपको मिल सकता है. पिता को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां उठानी पड़ सकती हैं. गूढ़ विद्याओं के प्रति आपका रुझान बढ़ सकता है. |
| मिथुन | इस अवधि में शनि आपके जन्मकालीन चन्द्र से सप्तम भाव में गोचर करेंगे. व्यावसायिक साझेदारी से आपको लाभ मिल सकता है. जीवनसाथी, रिश्तों व आर्थिक स्थिति के लिए भी यह समय ख़ुशहाल रह सकता है. विवाह के इच्छुक लोगों का विवाह होना संभव है. |
| कर्क | इस अवधि में शनि आपके जन्मकालीन चन्द्र से छठे भाव में गोचर करेंगे. व्यापार को बढाने के लिए आप लोन ले सकते हैं. जीवनसाथी को स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहना होगा. कार्यक्षेत्र में आपकी काफी प्रगति होने के संकेत हैं. |
| सिंह | जन्मकालीन चन्द्र से पंचम भाव में शनि का यह गोचर संतान को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें दे सकता है. बिजनेस में आप नई बुलंदियाँ छू सकते हैं. आपके विवाह की बात कहीं पक्की हो सकती है. |
| कन्या | जन्मकालीन चन्द्र से चौथे भाव में शनि का यह गोचर आपके शत्रुओं पर भारी पड़ेगा. आप कर्जमुक्त हो सकते हैं. कार्यक्षेत्र में कड़ी मेहनत के बाद ही सफलता आपके हाथ लगेगी व रोग से मुक्त होकर स्वास्थ्य लाभ होगा. |
| तुला | जन्मकालीन चन्द्र से तीसरे भाव में शनि का यह गोचर आपकी भाग्यवृद्धि करेगा. आपको प्रचुर मात्रा में धनलाभ होगा. सेहत अच्छी रहेगी व शत्रुओं पर शानदार विजय प्राप्त होगी. कुल-मिलाकर यह समय आपके लिए काफी उत्तम रहेगा. |
| वृश्चिक | जन्मकालीन चन्द्र से दूसरे भाव में शनि का यह गोचर आपकी आर्थिक स्थिति और समृद्धि में वृद्धि करेगा. ज़मीन-जायदाद व प्रॉपर्टी से जुड़े मामलों में आपको लाभ मिलेगा. इस दौरान आप नया घर या वाहन भी ख़रीद सकते हैं. |
| धनु | इस अवधि में शनि आपके जन्मकालीन चन्द्र के ऊपर से गोचर करेंगे. जिसके फलस्वरूप आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी. छोटे भाई-बहनों का सहयोग आपको प्राप्त होगा. आप अपने कार्यक्षेत्र में आ रही बाधाओं से मुक्ति पा सकेंगे. |
| मकर | जन्मकालीन चन्द्र से बाहरवें भाव में शनि का यह गोचर आपके ख़र्चों में वृद्धि कर सकता है. आपको शैय्या सुख प्राप्त होने की संभावना रहेगी. आप किसी तीर्थ यात्रा पर जा सकते हैं अथवा अपने निवास स्थान से दूर रह सकते हैं. |
| कुंभ | जन्मकालीन चन्द्र से ग्याहवें भाव में शनि का यह गोचर आपको अनेक प्रकार के लाभ देने वाला हो सकता है. कार्यक्षेत्र में आपको मान-सम्मान की प्राप्ति होगी. सेहत उत्तम रहेगी. आपकी आर्थिक स्थिति दिनों-दिन मजबूत बनेगी. बड़े अधिकारियों का सहयोग आपको प्राप्त होगा और हर तरफ से आपको सहयोग व ख़ुशी हासिल होगी. |
| मीन | जन्मकालीन चन्द्र से दसवें भाव में शनि का यह गोचर आपके कार्यक्षेत्र, आय में कुछ बदलाव लेकर आ सकता है. जिस समृद्धि व सम्मान के लिए आप वर्षों से कड़ी मेहनत कर रहे थे वह इस अवधि में आपको प्राप्त हो सकता है. |
| अवधि | गति | नक्षत्र | राशि |
|---|---|---|---|
| 27 जनवरी 2017 से 05 अप्रैल 2017 तक | मार्गी | केतु | धनु |
| 06 अप्रैल 2017 से 20 जून 2017 तक | वक्री | केतु | धनु |
| 21 जून 2017 से 24 अगस्त 2017 तक | वक्री | बुध | वृश्चिक |
| 25 अगस्त 2017 से 26 अक्टूबर 2017 तक | मार्गी | बुध | वृश्चिक |
| 27 अक्टूबर 2017 से 02 मार्च 2018 तक | मार्गी | केतु | धनु |
| 03 मार्च 2018 से 17 अप्रैल 2018 तक | मार्गी | शुक्र | धनु |
| 18 अप्रैल 2018 से 05 जून 2018 तक | वक्री | शुक्र | धनु |
| 06 जून 2018 से 06 सितम्बर 2018 तक | वक्री | केतु | धनु |
| 07 सितम्बर 2018 से 27 नवंबर 2018 तक | मार्गी | केतु | धनु |
| 28 नवंबर 2018 से 29 अप्रैल 2019 तक | मार्गी | शुक्र | धनु |
| 30 अप्रैल 2019 से 17 सितम्बर 2019 तक | वक्री | शुक्र | धनु |
| 18 सितम्बर 2019 से 26 दिसम्बर 2019 तक | मार्गी | शुक्र | धनु |
| 27 दिसम्बर 2019 से 24 जनवरी 2020 तक | मार्गी | सूर्य | धनु |