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एक अनोखा संयोजन में उत्कृष्ट मनोकामना तथा पापनाशक रूद्र अनुष्ठान

महान्यास परायणयम क्रम शैली श्री रुद्रं मंत्रोच्चारण चमाकम प्रासनम वसोधारा

वैदिक कार्यपद्धति द्वारा पवित्रता, विजय, समृद्धि, जीवन शक्ति और बुद्धि प्राप्त करें|

सीधा प्रसारण 28 जून 2017 को प्रातः 5:30 बजे(पैसेफिक मानक समयानुसार)
प्रातः 8:30 बजे(ईस्टर्न मानक समयानुसार)
सांयकाल 6:00 बजे(भारतीय मानक समयानुसार)

श्री रुद्रम एक वैदिक पाठ है जिसे भगवान शिव के भयंकर रूप भगवान रुद्र की प्रार्थना के रूप में लिखा गया है, ताकि वे अपने भयंकर रूप से अपने शांतिपूर्ण रूप में रूपांतरित होकर हमें आशीर्वाद प्रदान करें| इस प्रार्थना के दो भाग हैं, जिनमें से प्रत्येक को ग्यारह वर्गों में विभाजित किया गया है। पहला भाग में नामों के साथ समाप्त होने वाले छंद हैं इसलिए इस भाग का नाम “नामकं” या “रुद्रम” है। दूसरे भाग का नाम “चमाकम” रखा गया है, जैसा कि “चा मे” के साथ छंदों का अंत है, जिसका अर्थ है “इसे मुझे दिया जाए”।

क्रम- श्री रुद्रम की अनोखी व्याख्या

सभी चार वेदों को सदियों बाद मौखिक परंपरा के माध्यम से संरक्षित रखा गया है। वेदों का सच्चा अर्थ, ध्वनि, शब्दांश और उच्चारण प्रक्रिया में कोई बदलाव न आए इसकी बहुत सावधानी रखी गई है| मंत्र की शक्ति और शुद्धता ध्वनि के संयोजन और शब्दांश के श्रुतिविज्ञान से आता है।

क्रम रुद्राम जप के कठिन स्तरों में से एक है| मंत्र की शुद्धता खोए बिना, एस्ट्रोवेद ने शक्तिशाली मंत्र, श्री रुद्रम को क्रमबद्ध किया है, जो कि क्रम के बाद वर्णित शब्दों का एक अनोखा गणितीय संयोजन है। क्रम प्रकार के जप के शब्दों का एक निश्चित क्रमचय है और यह कुल मिलाकर वैदिक मंत्रों की कुल संख्या के साथ इस बहुपक्षीय संयोजन को सुनिश्चित करता है।

महान्यास- महान शुद्धिकरण

“महान्यास” का अर्थ ‘महान शुद्धिकरण’ है| यह रूद्राभिषेक (जलाभिषेक अनुष्ठान) या रुद्र अनुष्ठान का प्रारंभ करने से पहले मन, शरीर और आत्मा को शुद्ध करने हेतु वेदिक मंत्र का एक समूह है। इस सबसे शक्तिशाली अनुष्ठान के प्रारंभ होने से पहले महान्यास मंत्र शरीर में निर्दिष्ट अंगों पर विभिन्न देवताओं को आमंत्रित करने के लिए वैदिक पुजारी की मदद करते हैं। यदि शक्तिशाली श्री रुद्रम के पाठ के दौरान कोई गलती हो तो महान्यास किसी भी गलती से पुजारी की रक्षा कर सकते हैं|

चमाकम वसोधारा यज्ञ का महत्व

क्रम शैली द्वारा श्री रुद्रम पाठ से भगवान रुद को प्रसन्न व शांत करने के बाद चमाकम प्रासनम वसोधारा यज्ञ के माध्यम से इच्छाओं की पूर्ति हेतु उनके आशीर्वादों की मांग की जाती है। वसोधारा यज्ञ के दौरान, पुजारी लगातार घी को हवनकुंड में डालते हैं क्योंकि पवित्र यज्ञ की अग्नि शक्तिशाली माध्यम बनकर आपकी प्रार्थनाओं को भगवान रुद तक पहुँचाने का कार्य करती है|

इच्छा व मनोकामना पूर्ति पैकेज के लाभ

भगवान रुद्र, जो बुरी व अंधकारमय शक्तियों के प्रति अपने रौद्र रूप के लिए जाने जाते हैं आपके विचारों को स्वच्छ करके नकारात्मकता का नाश कर देते हैं| ताकि आप अपनी इच्छाओं की पूर्ति करके शांति आनंद ले सकें। हमारे साथ जुड़ें क्योंकि हमारे उच्च प्रशिक्षित वैदिक पुजारी पवित्र शास्त्रों में उल्लेखित विधि के माध्यम से भगवान रूद्र का आवाहन करके आपको निम्नलिखित लाभ प्राप्त करवा सकते हैं|

  • आपको अनचाही समस्याओं से मुक्ति मिलती है|
  • आपके विचारों व कार्यों में स्पष्टता आती है|
  • आपको चुनौतीपूर्ण संबंधों की समस्याओं से मुक्ति मिलती है|
  • आपके कार्यस्थल और घर पर एकता व सौहार्दपूर्ण माहौल बनता है
  • आपके जीवन से नकारात्मक प्रभावों का नाश होता है|
  • आपको ऋणों से मुक्ति मिलती है तथा सफलता प्राप्त होती है|

इच्छा व मनोकामना पूर्ति पैकेज

  • आपकी तरफ से महान्यासम परायनम(महान शुद्धिकरण मंत्रोच्चारण अनुष्ठान) किया जाएगा|
  • आपकी तरफ से क्रम शैली द्वारा श्री रुद्रम मंत्रोच्चारण का पाठ किया जाएगा|
  • आपकी तरफ से चमाकम प्रासनम वसोधारा यज्ञ किया जाएगा|
  • आपको एक अभिमंत्रित सत्चिदानंदम यंत्र प्रदान किया जाएगा|
  • आपकी तरफ से पंचभूत स्थल(5 तत्वों के प्रतीक 5 शिव मंदिर) पर पूजा-अर्चना की जाएगी|
Satchidanandam Yantra

मंत्र की शुद्धता खोए बिना, एस्ट्रोवेद ने शक्तिशाली मंत्र, श्री रुद्रम को क्रमबद्ध किया है, जो कि क्रम के बाद वर्णित शब्दों का एक अनोखा गणितीय संयोजन है। क्रम रुद्राम जप के कठिन स्तरों में से एक है| “महान्यास” का अर्थ ‘महान शुद्धिकरण’ है| यह मन, शरीर और आत्मा को शुद्ध करने हेतु वेदिक मंत्र का एक समूह है।

आप क्या प्राप्त करेंगे?

आपको अभिमंत्रित उत्पादों के साथ-साथ पवित्र यज्ञ से प्राप्त विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।

डॉ. पिल्लै के अनुसार

यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।

कृपया ध्यान दें – इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिए जाने वाले उत्पाद तथा प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिए जाएंगे। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।