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ऋण मुक्ति हेतु सबसे प्रभावी दिवस


संयुक्त ऋण मुक्ति प्रदोष (ऋण विमोचन प्रदोष)
3 व 17 अक्टूबर 2017 (भारतीय मानक समयानुसार)

मंगल ग्रह आपके ऋण कर्म व शेष संचय के लिए जिम्मेदार है


त्रयोदशी तिथि को प्रदोष कहा जाता है, जोकि कर्म निरस्त करने हेतु एक उत्तम समय है| जब मंगलवार को प्रदोष काल आता है तब इसे ऋण विमोचन प्रदोष कहा जाता है। इस काल में नकारात्मक ऋण कर्म को निरस्त करने का विशेष गुण है| .

नकारात्मक वित्तीय कर्म ऋण की स्थिति में उत्पन्न हो सकते हैं| जब आप ऋण के तनाव से मुक्ति पाते हैं, तब आप अपने जीवन में समृद्धि का रास्ता साफ करते हैं। जैसे ही आपके दिमाग और शरीर को उन ऊर्जाओं से मुक्त कर दिया जाता है जो आपके लिए पीड़ा उत्पन्न कर रही हैं, तब सकारात्मक ऊर्जा आपके मन व शरीर की प्रणाली में प्रवेश कर सकती है, जिन्हे आप आमंत्रित करते हैं।

ऋण विमोचन प्रदोष आपके जीवन में दैवीय अनुग्रह लाता है तथा नकारात्मक ऋण कर्मों को निरस्त करता है। ऋण विमोचन प्रदोष के दौरान निकलने वाली ऋण मुक्ति ऊर्जा आपकी वित्तीय समस्याओं को नष्ट कर सकती है और आपको सकारात्मक तरीके से आगे बढ़ने में मदद कर सकती है।

ऋण विमोचन प्रदोष एक विशेष दिन है तथा इस दिवस की ऊर्जा इस तरह से श्रेणीबद्ध होती है कि जो कोई इस दिन निश्चित मंत्र व प्रार्थना करता है वह जीवन में ऋणों से मुक्त हो जाता है।

ऋण कैसे उत्पन्न होता है?

संस्कृत में “ऋण” का अर्थ है “कर्ज” तथा “विमोचन” का अर्थ है “से मुक्त होना|” वैदिक ज्ञान इस बात पर जोर देता है कि हम अपने कर्मफलों के भुगतान हेतु इस धरती पर पैदा हुए हैं इसलिए पृथ्वी को कर्म भूमि या कर्मक्षेत्र भी कहा जाता है। हमारे कर्मों की प्रकृति ही अच्छे व बुरे फलों को तय करती है|

यह व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है कि हमारा प्रत्येक कर्म केवल अच्छा फल उत्पन्न करे, लेकिन हम जान-बूझकर हानिकारक गतिविधियों से बच सकते हैं, स्वार्थी कर्मों को कम करके निस्वार्थ गतिविधियों को बढ़ा सकते हैं। शास्त्रों में उल्लेख है कि किसी से भी ऐसा व्यवहार न करें जो आप दूसरों से अपने लिए नहीं चाहते हैं| किसी भी कर्म के दौरान यह आत्म विश्लेषण हमे स्वार्थी व हानिकारक कर्म करने से रोकेगा तथा इस प्रकार बुरे संचित कर्मों को भी कम करेगा|

जीवन के विभिन्न ऋण क्या हैं?

हम सभी अपने माता-पिता, समाज, पर्यावरण आदि के ऋणी हैं। जो कुछ भी हमने लिया है उसे वापस देना चाहिए। यह ब्रह्मांड का नियम है| पृथ्वी पर पैदा होने से हम जो ऋण लेते हैं उसके पीछे निम्नलिखित हैं और उनका पुनर्भुगतान करने की आवश्यकता है।

1. देव ऋण- ईश्वर या अचेतन प्रकृति के प्रति ऋण-

हम स्थूल व सूक्ष्म तत्वों से बने हुए हैं| हमारा शरीर पृथ्वी से संचय किए गए भोजन, सूर्य से गर्मी व प्रकाश तथा प्रकृति से लिए गए हवा और पानी का परिणाम है।

देव ऋण का भुगतान कैसे करें?

  • प्रकृति का संरक्षण तथा प्रकृति को बचाने हेतु अधिक से अधिक लोगों को जागरूक व प्रोत्साहित करना। वृक्षारोपण करना|
  • किसी भी प्रकार के प्रदूषण को बढ़ाने वाली गतिविधियों को कम करना|
  • पानी, बिजली व कागज आदि का संरक्षण करना|

2. भूत ऋण- अन्य सजीव प्राणियों के प्रति ऋण-

भोजन प्राप्त करने के प्राथमिक उद्देश्य के अलावा, हम व्यापक वाणिज्यिक उद्देश्यों के लिए पेड़-पौधों व वनस्पति उत्पादों का उपयोग विलुप्त होने के स्तर तक करते हैं| कुछ ऐसा ही व्यवहार हम पशु-पक्षियों के साथ करते हैं, जहां हम उन्हें अपने आनंद और व्यावसायिक हितों के लिए उनके प्राकृतिक आवास से वंचित कर देते हैं।

भूत ऋण का भुगतान कैसे करें?

  • किसी भी ऐसी गतिविधि में शामिल न हों जिससे पशु-पक्षियों को पीड़ा पहुँचे।
  • उनके साथ कृपालु व कृतज्ञतापूर्ण व्यवहार करें|

3. पितृ ऋण- माता-पिता व पूर्वजों के प्रति ऋण-

हम अपने माता-पिता के भौतिक विस्तार से अधिक कुछ भी नहीं हैं। हम अपने शारीरिक लक्षणों का श्रेय अपने माता-पिता व पूर्वजों को देते हैं| हमारी प्रतिभा व कौशल भी उनके ही गुण हैं जो जीन के माध्यम से हस्तांतरित हुए हैं। पशुओं की तरह, हम मनुष्यों को भी एक उम्र तक देखभाल व पोषण की आवश्यकता होती है जिसके बाद हम स्वयं की देखभाल करने के लिए स्वतंत्र हो सकते हैं|

पितृ ऋण का भुगतान कैसे करें?

  • अपने माता-पिता की भावनाओं को आहत न करें|
  • बुजुर्गों और बच्चों की सहायता करने या उनकी देखभाल करने के हर अवसर का उपयोग करें।
  • उनके प्रति नम्र व मृदु व्यवहार अपनाएं|
  • वृद्धाश्रम, अनाथाश्रम आदि के लिए संभवतः अपने समय, प्रयास या धन का दान करें।
  • सबसे महत्वपूर्ण बात लगातार पितरों से संबंधित धार्मिक अनुष्ठानों को पूर्ण करें|

4. मनुष्य ऋण- समाज में अन्य मनुष्यों के प्रति ऋण-

हमारे दैनिक जीवन में विभिन्न व्यवसायों व सेवाओं से संबंधित मनुष्य जैसे किसान, मिस्त्री, बुनकर, बढ़ई, मैकेनिक या पुलिस आदि हमारी मदद करते हैं| हमारे पारिवारिक सदस्य और दोस्त जब आवश्यक हो हमें मनोवैज्ञानिक समर्थन देते हैं| यद्यपि कुछ सेवाएं पैसे से ख़रीदी जा सकती हैं फिर भी सेवा प्रदाताओं की देखभाल का महत्व कम नहीं हो सकता|

मनुष्य ऋण का भुगतान कैसे करें?

  • सबके साथ सम्मानजनक व्यवहार करें|
  • राहत कार्य व समाज सेवा के प्रति कुछ दान करें|
  • समाज में सुविधा से वंचित लोगों के विकास की दिशा में अपना समय, पैसा व प्रयास का दान करें|

5. ऋषि ऋण- शिक्षक, मार्गदर्शक व गुरुओं के प्रति ऋण-

हम जो कुछ भी हैं उसका कारण हमारी सांस्कृतिक और वैज्ञानिक विरासत है जिसे हमने अपने आध्यात्मिक गुरुओं व शैक्षणिक शिक्षकों से सीखा है| ज्ञान और परिष्कृत संस्कृति के प्रत्येक क्षेत्र से संबंधित गुरु आज मौजूद हैं उदाहरण के लिए आज अच्छी पुस्तकों के लेखक या अच्छे वीडियो और फिल्मों के निर्माता मौजूद हैं जिनके मार्गदर्शन से हमारी ज्ञान वृद्धि होती है| संपूर्ण मानवता उनकी ऋणी है|

ऋषि ऋण का भुगतान कैसे करें?

  • अपने आपको अच्छे से शिक्षित करें न केवल शैक्षिक रूप से बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी। दूसरों को शिक्षा दें|
  • स्कूलों और शैक्षिक गतिविधियों के लिए दान करें|
  • किसी भी प्रकार की अच्छी कला को सीखें या उसका प्रचार अथवा संरक्षण करें|

उपरोक्त लिखित गतिविधियों के माध्यम से पुनः भुगतान करना आपके बचे हुए शेष ऋणों को कम करता है| ज्यादा भुगतान करना हमेशा लाभदायक होता है क्योंकि यह आपके सत्कर्मों के खाते में जमा हो जाता है और यह न केवल आपको बल्कि आपकी आने वाली पीढ़ियों को भी बहुत लाभदायक देता है| याद रखें हम जो बोते हैं वही काटते हैं|


संयुक्त ऋण विमोचन प्रदोष हेतु शक्तिशाली अनुष्ठान

  • आवश्यक

    संयुक्त ऋण विमोचन आवश्यक प्रदोष अनुष्ठान

    • आपकी तरफ से एस्ट्रोवेद के यज्ञ अनुष्ठान व उपचार केंद्र में त्रयोदशी तिथि पर 2 कर्मों को निरस्त करने हेतु भगवान शिव व उनके पवित्र बैल के निमित्त लघुन्यास रूद्र प्रासनम व चमाकम प्रासनम पाठ के मन्त्रोच्चारण द्वारा जलाभिषेक अनुष्ठान किया जाएगा जिसका सीधा प्रसारण आप वेबकास्ट के माध्यम से देख सकते हैं|
    • आपकी तरफ से एस्ट्रोवेद के यज्ञ अनुष्ठान व उपचार केंद्र में भगवान नृसिंह के निमित 2 पूजा-अर्चनाएं की जाएँगी|
    • आपकी तरफ से एस्ट्रोवेद के यज्ञ अनुष्ठान व उपचार केंद्र में भगवान शिव के निमित रूद्र त्रिशती( भगवान रूद्र के 300 नाम) पाठ के मन्त्रोच्चारण द्वारा 2 बिल्वपत्र अर्चनाएं की जाएँगी|
    • आपकी तरफ से 3 व 17 अक्टूबर 2017 को भगवान शिव के शक्तिस्थल पर पूजा-अर्चना की जाएगी|
    • आपकी तरफ से 3 व 17 अक्टूबर 2017 को मंगल ग्रह से सम्बन्धित शक्तिस्थल पर पूजा-अर्चना की जाएगी|
  • वर्धित

    संयुक्त ऋण विमोचन वर्धित प्रदोष अनुष्ठान

    • आपकी तरफ से एस्ट्रोवेद के यज्ञ अनुष्ठान व उपचार केंद्र में त्रयोदशी तिथि पर 2 कर्मों को निरस्त करने हेतु भगवान शिव व उनके पवित्र बैल के निमित्त लघुन्यास रूद्र प्रासनम व चमाकम प्रासनम पाठ के मन्त्रोच्चारण द्वारा जलाभिषेक अनुष्ठान किया जाएगा जिसका सीधा प्रसारण आप वेबकास्ट के माध्यम से देख सकते हैं|
    • आपकी तरफ से एस्ट्रोवेद के यज्ञ अनुष्ठान व उपचार केंद्र में भगवान नृसिंह के निमित 2 पूजा-अर्चनाएं की जाएँगी|
    • आपकी तरफ से एस्ट्रोवेद के यज्ञ अनुष्ठान व उपचार केंद्र में भगवान शिव के निमित रूद्र त्रिशती( भगवान रूद्र के 300 नाम) पाठ के मन्त्रोच्चारण द्वारा 2 बिल्वपत्र अर्चनाएं की जाएँगी|
    • आपकी तरफ से 3 व 17 अक्टूबर 2017 को सांयकाल 5:30 बजे एस्ट्रोवेद के यज्ञ अनुष्ठान व उपचार केंद्र में भगवान शिव के निमित सामूहिक रूप से यज्ञ अनुष्ठान किया जाएगा|
    • आपकी तरफ से 3 व 17 अक्टूबर 2017 को भगवान शिव के शक्तिस्थल पर पूजा-अर्चना की जाएगी|
    • आपकी तरफ से 3 व 17 अक्टूबर 2017 को मंगल ग्रह से सम्बन्धित शक्तिस्थल पर पूजा-अर्चना की जाएगी|
  • उत्कृष्ट

    संयुक्त ऋण विमोचन उत्कृष्ट प्रदोष अनुष्ठान

    • आपकी तरफ से एस्ट्रोवेद के यज्ञ अनुष्ठान व उपचार केंद्र में त्रयोदशी तिथि पर 2 कर्मों को निरस्त करने हेतु भगवान शिव व उनके पवित्र बैल के निमित्त लघुन्यास रूद्र प्रासनम व चमाकम प्रासनम पाठ के मन्त्रोच्चारण द्वारा जलाभिषेक अनुष्ठान किया जाएगा जिसका सीधा प्रसारण आप वेबकास्ट के माध्यम से देख सकते हैं|
    • आपकी तरफ से एस्ट्रोवेद के यज्ञ अनुष्ठान व उपचार केंद्र में भगवान नृसिंह के निमित 2 पूजा-अर्चनाएं की जाएँगी|
    • आपकी तरफ से एस्ट्रोवेद के यज्ञ अनुष्ठान व उपचार केंद्र में भगवान शिव के निमित रूद्र त्रिशती( भगवान रूद्र के 300 नाम) पाठ के मन्त्रोच्चारण द्वारा 2 बिल्वपत्र अर्चनाएं की जाएँगी|
    • आपकी तरफ से 3 व 17 अक्टूबर 2017 को सांयकाल 5:30 बजे एस्ट्रोवेद के यज्ञ अनुष्ठान व उपचार केंद्र में भगवान शिव के निमित सामूहिक रूप से यज्ञ अनुष्ठान किया जाएगा|
    • आपकी तरफ से 3 व 17 अक्टूबर 2017 को भगवान शिव के शक्तिस्थल पर पूजा-अर्चना की जाएगी|
    • आपकी तरफ से 3 व 17 अक्टूबर 2017 को मंगल ग्रह से सम्बन्धित शक्तिस्थल पर पूजा-अर्चना की जाएगी|
    • आपकी तरफ से 10,008 बार भगवान के मंत्र का लेखन किया जाएगा|

संयुक्त ऋण विमोचन प्रदोष 2017 हेतु अनुशंसित उत्पाद

अभिमंत्रित स्फटिक निर्मित शिवलिंग(मध्यम आकार)

Energized Crystal Shiva Lingam

इस मध्यम आकार के स्फटिक निर्मित शिव लिंग को ऋण विमोचन प्रदोष अनुष्ठान के दौरान अभिमंत्रित किया जाएगा। भगवान शिव की निराकर शिवलिंग के रूप में कल्पना की गई है। शिवलिंग भगवान शिव की पुरुष रचनात्मक ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है तथा इसकी सर्वोच्च चेतना या उच्चतम ज्ञान के रूप में पूजा की जाती है| विशिष्ट समय में शिवलिंग पर किया गया जलाभिषेक आपके बुरे कर्मों को निरस्त करता है|

आप क्या प्राप्त करेंगे?

आपको मध्यम आकार के स्फटिक निर्मित अभिमंत्रित शिवलिंग के साथ-साथ पवित्र यज्ञ से प्राप्त विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।

डॉ. पिल्लै के अनुसार- :

“ यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।”

कृपया ध्यान दें: इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिए जाने वाले उत्पाद तथा प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिए जाएंगे। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।

संयुक्त ऋण विमोचन प्रदोष हेतु शक्तिशाली अनुष्ठान

संयुक्त ऋण विमोचन आवश्यक प्रदोष अनुष्ठान

  • आपकी तरफ से एस्ट्रोवेद के यज्ञ अनुष्ठान व उपचार केंद्र में त्रयोदशी तिथि पर 2 कर्मों को निरस्त करने हेतु भगवान शिव व उनके पवित्र बैल के निमित्त लघुन्यास रूद्र प्रासनम व चमाकम प्रासनम पाठ के मन्त्रोच्चारण द्वारा जलाभिषेक अनुष्ठान किया जाएगा जिसका सीधा प्रसारण आप वेबकास्ट के माध्यम से देख सकते हैं|
  • आपकी तरफ से एस्ट्रोवेद के यज्ञ अनुष्ठान व उपचार केंद्र में भगवान नृसिंह के निमित 2 पूजा-अर्चनाएं की जाएँगी|
  • आपकी तरफ से एस्ट्रोवेद के यज्ञ अनुष्ठान व उपचार केंद्र में भगवान शिव के निमित रूद्र त्रिशती( भगवान रूद्र के 300 नाम) पाठ के मन्त्रोच्चारण द्वारा 2 बिल्वपत्र अर्चनाएं की जाएँगी|
  • आपकी तरफ से 3 व 17 अक्टूबर 2017 को भगवान शिव के शक्तिस्थल पर पूजा-अर्चना की जाएगी|
  • आपकी तरफ से 3 व 17 अक्टूबर 2017 को मंगल ग्रह से सम्बन्धित शक्तिस्थल पर पूजा-अर्चना की जाएगी|
Essential Rituals for Debt Removal Pradosham

संयुक्त ऋण विमोचन आवश्यक प्रदोष अनुष्ठान में अवश्य भाग लें| आपके दुर्भाग्य को दूर करने और जीवन में आकर्षक अवसर लाने के लिए प्रदोष अनुष्ठान सहायक हो सकते हैं।

ऋण विमोचन प्रदोष दिवस पर आपकी तरफ से एस्ट्रोवेद के यज्ञ अनुष्ठान व उपचार केंद्र में बुरे कर्मों को निरस्त करने हेतु भगवान शिव व उनके पवित्र बैल के निमित्त लघुन्यास रूद्र प्रासनम व चमाकम प्रासनम पाठ के मन्त्रोच्चारण द्वारा जलाभिषेक अनुष्ठान किया जाएगा| लघुन्यास महान्यास का लघु रूप है जिसका अर्थ “महान शुद्धिकरण” होता है| यह मन, शरीर और आत्मा को शुद्ध करने हेतु वेदिक मंत्र का एक समूह है जिसका पाठ रुद्राभिषेक से पूर्व किया जाता है|

3 व 17 अक्टूबर 2017 को आपकी तरफ से एस्ट्रोवेद के यज्ञ अनुष्ठान व उपचार केंद्र में भगवान शिव के निमित रूद्र त्रिशती( भगवान रूद्र के 300 नाम) पाठ के मन्त्रोच्चारण द्वारा बिल्वपत्र अर्चना भी की जाएँगी| रूद्र त्रिशती अर्चना एक ऐसी अर्चना है जो भगवान रूद्र(शिव) के निमित श्री रुद्रम पाठ के मन्त्रोच्चारण द्वारा की जाती है| ये वेदों में वर्णित रुद्र (शिव) अर्चना का एकमात्र रूप है। इस अर्चना का मुख्य आकर्षण भगवन रुद्र को 300 बिल्वपत्र अर्पण करना है| सबसे भयावह कर्म भी तब नष्ट हो जाते हैं जब भगवान शिव पर बिल्वपत्र अर्पित किए जाते हैं|

आप क्या प्राप्त करेंगे?

आपको पवित्र विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।

डॉ. पिल्लै के अनुसार-

– “ यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।”

कृपया ध्यान दें-: इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिया जाने वाला प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिया जाएगा। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।

संयुक्त ऋण विमोचन वर्धित प्रदोष अनुष्ठान

  • आपकी तरफ से एस्ट्रोवेद के यज्ञ अनुष्ठान व उपचार केंद्र में त्रयोदशी तिथि पर 2 कर्मों को निरस्त करने हेतु भगवान शिव व उनके पवित्र बैल के निमित्त लघुन्यास रूद्र प्रासनम व चमाकम प्रासनम पाठ के मन्त्रोच्चारण द्वारा जलाभिषेक अनुष्ठान किया जाएगा जिसका सीधा प्रसारण आप वेबकास्ट के माध्यम से देख सकते हैं|
  • आपकी तरफ से एस्ट्रोवेद के यज्ञ अनुष्ठान व उपचार केंद्र में भगवान नृसिंह के निमित 2 पूजा-अर्चनाएं की जाएँगी|
  • आपकी तरफ से एस्ट्रोवेद के यज्ञ अनुष्ठान व उपचार केंद्र में भगवान शिव के निमित रूद्र त्रिशती( भगवान रूद्र के 300 नाम) पाठ के मन्त्रोच्चारण द्वारा 2 बिल्वपत्र अर्चनाएं की जाएँगी|
  • आपकी तरफ से 3 व 17 अक्टूबर 2017 को सांयकाल 5:30 बजे एस्ट्रोवेद के यज्ञ अनुष्ठान व उपचार केंद्र में भगवान शिव के निमित सामूहिक रूप से यज्ञ अनुष्ठान किया जाएगा|
  • आपकी तरफ से 3 व 17 अक्टूबर 2017 को भगवान शिव के शक्तिस्थल पर पूजा-अर्चना की जाएगी|
  • आपकी तरफ से 3 व 17 अक्टूबर 2017 को मंगल ग्रह से सम्बन्धित शक्तिस्थल पर पूजा-अर्चना की जाएगी|
Enhanced Rituals for Debt Removal Pradosham

संयुक्त ऋण विमोचन वर्धित प्रदोष अनुष्ठान में अवश्य भाग लें| आपके दुर्भाग्य को दूर करने और जीवन में आकर्षक अवसर लाने के लिए प्रदोष अनुष्ठान सहायक हो सकते हैं।

ऋण विमोचन प्रदोष दिवस पर आपकी तरफ से एस्ट्रोवेद के यज्ञ अनुष्ठान व उपचार केंद्र में बुरे कर्मों को निरस्त करने हेतु भगवान शिव व उनके पवित्र बैल के निमित्त लघुन्यास रूद्र प्रासनम व चमाकम प्रासनम पाठ के मन्त्रोच्चारण द्वारा जलाभिषेक अनुष्ठान किया जाएगा| लघुन्यास महान्यास का लघु रूप है जिसका अर्थ “महान शुद्धिकरण” होता है| यह मन, शरीर और आत्मा को शुद्ध करने हेतु वेदिक मंत्र का एक समूह है जिसका पाठ रुद्राभिषेक से पूर्व किया जाता है|

3 व 17 अक्टूबर 2017 को आपकी तरफ से एस्ट्रोवेद के यज्ञ अनुष्ठान व उपचार केंद्र में भगवान शिव के निमित रूद्र त्रिशती( भगवान रूद्र के 300 नाम) पाठ के मन्त्रोच्चारण द्वारा बिल्वपत्र अर्चना भी की जाएँगी| रूद्र त्रिशती अर्चना एक ऐसी अर्चना है जो भगवान रूद्र(शिव) के निमित श्री रुद्रम पाठ के मन्त्रोच्चारण द्वारा की जाती है| ये वेदों में वर्णित रुद्र (शिव) अर्चना का एकमात्र रूप है। इस अर्चना का मुख्य आकर्षण भगवन रुद्र को 300 बिल्वपत्र अर्पण करना है| सबसे भयावह कर्म भी तब नष्ट हो जाते हैं जब भगवान शिव पर बिल्वपत्र अर्पित किए जाते हैं|

आप क्या प्राप्त करेंगे?

आपको पवित्र विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।

डॉ. पिल्लै के अनुसार-:

“ यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।”

कृपया ध्यान दें-: इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिया जाने वाला प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिया जाएगा। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।

संयुक्त ऋण विमोचन उत्कृष्ट प्रदोष अनुष्ठान

  • आपकी तरफ से एस्ट्रोवेद के यज्ञ अनुष्ठान व उपचार केंद्र में त्रयोदशी तिथि पर 2 कर्मों को निरस्त करने हेतु भगवान शिव व उनके पवित्र बैल के निमित्त लघुन्यास रूद्र प्रासनम व चमाकम प्रासनम पाठ के मन्त्रोच्चारण द्वारा जलाभिषेक अनुष्ठान किया जाएगा जिसका सीधा प्रसारण आप वेबकास्ट के माध्यम से देख सकते हैं|
  • आपकी तरफ से एस्ट्रोवेद के यज्ञ अनुष्ठान व उपचार केंद्र में भगवान नृसिंह के निमित 2 पूजा-अर्चनाएं की जाएँगी|
  • आपकी तरफ से एस्ट्रोवेद के यज्ञ अनुष्ठान व उपचार केंद्र में भगवान शिव के निमित रूद्र त्रिशती( भगवान रूद्र के 300 नाम) पाठ के मन्त्रोच्चारण द्वारा 2 बिल्वपत्र अर्चनाएं की जाएँगी|
  • आपकी तरफ से 3 व 17 अक्टूबर 2017 को सांयकाल 5:30 बजे एस्ट्रोवेद के यज्ञ अनुष्ठान व उपचार केंद्र में भगवान शिव के निमित सामूहिक रूप से यज्ञ अनुष्ठान किया जाएगा|
  • आपकी तरफ से 3 व 17 अक्टूबर 2017 को भगवान शिव के शक्तिस्थल पर पूजा-अर्चना की जाएगी|
  • आपकी तरफ से 3 व 17 अक्टूबर 2017 को मंगल ग्रह से सम्बन्धित शक्तिस्थल पर पूजा-अर्चना की जाएगी|
  • आपकी तरफ से 10,008 बार भगवान के मंत्र का लेखन किया जाएगा|
Elite Rituals for Debt Removal Pradosham

संयुक्त ऋण विमोचन उत्कृष्ट प्रदोष अनुष्ठान में अवश्य भाग लें| आपके दुर्भाग्य को दूर करने और जीवन में आकर्षक अवसर लाने के लिए प्रदोष अनुष्ठान सहायक हो सकते हैं।

ऋण विमोचन प्रदोष दिवस पर आपकी तरफ से एस्ट्रोवेद के यज्ञ अनुष्ठान व उपचार केंद्र में बुरे कर्मों को निरस्त करने हेतु भगवान शिव व उनके पवित्र बैल के निमित्त लघुन्यास रूद्र प्रासनम व चमाकम प्रासनम पाठ के मन्त्रोच्चारण द्वारा जलाभिषेक अनुष्ठान किया जाएगा| लघुन्यास महान्यास का लघु रूप है जिसका अर्थ “महान शुद्धिकरण” होता है| यह मन, शरीर और आत्मा को शुद्ध करने हेतु वेदिक मंत्र का एक समूह है जिसका पाठ रुद्राभिषेक से पूर्व किया जाता है|

3 व 17 अक्टूबर 2017 को आपकी तरफ से एस्ट्रोवेद के यज्ञ अनुष्ठान व उपचार केंद्र में भगवान शिव के निमित रूद्र त्रिशती( भगवान रूद्र के 300 नाम) पाठ के मन्त्रोच्चारण द्वारा बिल्वपत्र अर्चना भी की जाएँगी| रूद्र त्रिशती अर्चना एक ऐसी अर्चना है जो भगवान रूद्र(शिव) के निमित श्री रुद्रम पाठ के मन्त्रोच्चारण द्वारा की जाती है| ये वेदों में वर्णित रुद्र (शिव) अर्चना का एकमात्र रूप है। इस अर्चना का मुख्य आकर्षण भगवन रुद्र को 300 बिल्वपत्र अर्पण करना है| सबसे भयावह कर्म भी तब नष्ट हो जाते हैं जब भगवान शिव पर बिल्वपत्र अर्पित किए जाते हैं|

मंत्र ग्रह व ईश्वरीय शक्तियों को लोगों से जोड़ते हैं। थिरु नील कंठ मंत्र की ऊर्जा भगवान शिव की शक्तियों का आवाहन एक नीले प्रकाश के रूप में करके उसके द्वारा नकारात्मक कर्मों को निकाल फेंकती है|

आप क्या प्राप्त करेंगे?

आपको पवित्र विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।

डॉ. पिल्लै के अनुसार-:

“ यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।”

कृपया ध्यान दें:इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिया जाने वाला प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिया जाएगा। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।