उत्तम स्वास्थ्य, समृद्धि और सफलता हेतु वैदिक कार्यपद्धति
24 जनवरी 2018
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रथ सप्तमी को भगवान सूर्यदेव का जन्मदिवस माना जाता है। वैदिक ज्योतिष में सूर्य सभी ग्रहों का राजा है तथा इसे आत्मकारक (आत्मा का प्रतिनिधित्व) कहा जाता है। वैदिक ऋषियों ने भी इस राजसी ग्रह को काफी महत्व दिया है। सूर्यदेव की कृपा आप तक पहुँचाने के लिए एस्ट्रोवेद सूर्य नमस्कार मंत्र (सूर्य नमस्कार वैदिक मंत्रोच्चारण) अनुष्ठान के साथ-साथ 6 पुजारियों द्वारा भव्य त्रिक भास्कर यज्ञ(सूर्यदेव की तिगुनी कृपा प्रदाता यज्ञ) का आयोजन करेगा| माना जाता है कि रथ सप्तमी दिवस पर ये प्राचीन वैदिक कार्यपद्धति कई प्रकार के लाभ प्रदान कर सकती हैं जिसमें उत्तम स्वास्थ्य, समृद्धि, कल्याण और समग्र सफलता शामिल है।
हमारे सुदक्ष पुजारी सूर्य नमस्कार मंत्र का जप करेंगे जिसमें 132 स्तुतियाँ व 32 छंद हैं तथा जिसका वर्णन पवित्र ग्रन्थ कृष्ण यजुर्वेद के तैतरीय अरण्यक के अंतर्गत है| यह स्तुति मंत्र अरुण परायण के नाम से भी जाना जाता है| जब इसका पाठ शुद्ध उच्चारण द्वारा किया जाता है तब यह मधुर वैदिक स्तुति अत्यंत प्रभावशाली हो जाती है| परंपरा के अनुसार एक विस्तृत सूर्य यज्ञ में इन पवित्र मंत्रों का उच्चारण किया जाता है|
सूर्य के शक्तिशाली स्तोत्रों को सुनने से आपको सकारात्मक विचार प्राप्त हो सकते हैं तथा आपको समस्त कार्यों में सफलता मिलती है| सूर्य नमस्कार मंत्र जप अनुष्ठान व यज्ञ में भाग लेना अपने ह्रदय को स्वस्थ रखने हेतु अत्यंत लाभकारी है क्योंकि इससे आपके शरीर में प्राण या जीवन ऊर्जा बढ़ जाती है। प्राचीन ग्रंथों के अनुसार सूर्य के स्तोत्र पापों को नष्ट कर सकते हैं, समस्त संदेहों को दूर कर सकते हैं, चिंता, दुःख और पीडाओं को कम कर सकते हैं तथा आपको समृद्धि, धन, ज्ञान, सकारात्मकता और सर्वव्यापी सफलता प्रदान कर सकते हैं।
इस दिन चंद्रमा केतु द्वारा शासित अश्विनी नक्षत्र में होगा| सूर्य के पुत्र अश्विनी कुमार या आकाशीय चिकित्सक इस नक्षत्र के अधिदेवता हैं| वैदिक परंपरा के अनुसार वे ही सूर्य की पहली किरणें हैं जो स्वास्थ्यप्रद ऊर्जा को विकीर्ण करते हैं। वे सूर्य के रथ से जुड़े 7 घोड़ों पर भी प्राथमिक नियंत्रण बनाए रखते हैं। यह दिवस उत्तम स्वास्थ्य और यौवन प्रदान करने की अनुकूल ऊर्जा से भरा रहेगा|
इस नक्षत्र का स्वामी केतु चंद्रमा से दशम भाव में गोचर करेगा इसलिए समग्र रूप से सफलता प्राप्त करने हेतु यह एक आदर्श दिन होगा। इस दिन चंद्रमा बृहस्पति से दृष्ट होगा जोकि ज्ञान की ख़ोज करने व एक सकारात्मक जीवन का नेतृत्व करने हेतु जागरूकता उत्पन्न करेगा।
रथ सप्तमी (सूर्य जन्मदिवस) पर्व मनाते हुए एस्ट्रोवेद की व्यापक सेवाओं में अवश्य भाग लें|
सूर्य नमस्कार मंत्र के नाम से प्रसिद्ध अरुण प्रासनम के पाठ द्वारा आपके पाप नष्ट कर सकते हैं, समस्त संदेह दूर हो सकते हैं, चिंता, दुःख और पीडाएं कम हो सकती हैं तथा आपको समृद्धि, धन, ज्ञान, सकारात्मकता और सर्वव्यापी सफलता प्राप्त हो सकती है| इस जप के बाद अत्यंत दुर्लभ त्रिक भास्कर यज्ञ का अनुष्ठान किया जाएगा जिसको संपन्न करने के दौरान 3 ऋग वैदिक मंत्रों के विशेष संयोजन का उच्चारण किया जाएगा| इस यज्ञ अनुष्ठान को रथ सप्तमी के दिन करना सबसे शुभ माना जाता है तथा यह सूर्यदेव की कृपापूर्ण आशीषों का आह्वान करता है| यह अनुष्ठान पापों का शमन कर सकता है, नकारात्मक शक्तियों को दूर कर सकता है और रोगों को दूर कर सकता है विशेषकर हृदय रोग से पीड़ित लोगों को इस अनुष्ठान से काफी लाभ मिलता है|
सुरियानार शक्तिस्थल पर भगवान सूर्यदेव के निमित 10 दिनों की इस विशेष पूजा-अर्चना द्वारा प्रतिकूल ग्रह प्रभावों से आपकी रक्षा हो सकती है, शनि की साढ़ेसाती व सूर्य की दशा-भुक्ति के प्रतिकूल प्रभावों से मुक्ति मिल सकती है तथा आपको समग्र रूप से सफलता प्राप्त हो सकती है|
रथ सप्तमी को भगवान सूर्यदेव का जन्मदिवस माना जाता है। वैदिक ज्योतिष में सूर्य सभी ग्रहों का राजा है तथा इसे आत्मकारक (आत्मा का प्रतिनिधित्व) कहा जाता है| रथ सप्तमी मौलिक पैकेज अनुष्ठान में अवश्य भाग लें जो कि आपके ह्रदय को स्वस्थ रखने हेतु अत्यंत लाभकारी है क्योंकि इससे आपके शरीर में प्राण या जीवन ऊर्जा बढ़ जाती है।
आप क्या प्राप्त करेंगे?
आपको पवित्र विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।
डॉ. पिल्लै के अनुसार-
यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।
कृपया ध्यान दें- इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिया जाने वाला प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिया जाएगा। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।
रथ सप्तमी को भगवान सूर्यदेव का जन्मदिवस माना जाता है। वैदिक ज्योतिष में सूर्य सभी ग्रहों का राजा है तथा इसे आत्मकारक (आत्मा का प्रतिनिधित्व) कहा जाता है| समृद्धि, धन, ज्ञान, सकारात्मकता और सर्वव्यापी सफलता प्राप्त करने के लिए रथ सप्तमी प्रधान पैकेज अनुष्ठान में अवश्य भाग लें|
आप क्या प्राप्त करेंगे?
आपको पवित्र विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।
डॉ. पिल्लै के अनुसार-
“यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।””
कृपया ध्यान दें- इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिया जाने वाला प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिया जाएगा। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।
यह व्यक्तिगत यज्ञ सूर्यदेव की कृपा का आह्वान करता है| यह अनुष्ठान पापों का शमन कर सकता है, नकारात्मक शक्तियों को दूर कर सकता है तथा रोगों को दूर कर सकता है विशेषकर हृदय रोग से पीड़ित लोगों को इस अनुष्ठान से काफी लाभ मिलता है|
आप क्या प्राप्त करेंगे?
आपको अभिमंत्रित उत्पादों के साथ-साथ पवित्र यज्ञ से प्राप्त विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।
डॉ. पिल्लै के अनुसार-
“यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।””
कृपया ध्यान दें-इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिए जाने वाले उत्पाद तथा प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिए जाएंगे। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।
सूर्य ताबीज़ सहित यह तामड़े की माला जिसे रथ सप्तमी दिवस पर शक्तिशाली अनुष्ठानों के दौरान अभिमंत्रित किया गया है, आपको सूर्य का कृपापूर्ण आशीर्वाद प्रदान करती है| इस माला को पहनने से शारीरिक शक्ति में वृद्धि हो सकती है तथा नकारात्मक ऊर्जा से आपका बचाव हो सकता है| यह माला आपके हृदय, फेफड़े और परिसंचरण तन्त्र को भी सुरक्षा प्रदान कर सकती है|
आप क्या प्राप्त करेंगे?
आपको अभिमंत्रित उत्पादों के साथ-साथ पवित्र यज्ञ से प्राप्त विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।
डॉ. पिल्लै के अनुसार-
“यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।””
कृपया ध्यान दें- इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिए जाने वाले उत्पाद तथा प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिए जाएंगे। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।