“फायर लैब शब्द डॉ. पिल्लै द्वारा ईजात किया गया है, जोकि कर्मकांड के अभ्यास पर आधारित एक यज्ञ अनुष्ठान है तथा यह पूरे विश्व की कई संस्कृतियों में पाया जाता है। यह किसी भी एक धर्म तक सीमित नहीं है बल्कि यह एक सार्वभौमिक बहुआयामी कार्यपद्धति है जो पारलौकिक ज्ञान के साथ संवाद करने के लिए है| ये फ़रिश्ते, देवी व देवता ही हैं, जिनसे सभी धर्मों के पैगंबर, मसीहा व संत संपर्क में थे। ईश्वरीय शक्ति ही उनके स्वास्थ्यप्रद चमत्कारों, पारलौकिक अंतर्ज्ञान व उनकी भौतिक समृद्धि की स्रोत थी| यज्ञ अनुष्ठान उस वक़्त और अभी भी इन खगोलीय शक्तियों से जुड़ने का सबसे शक्तिशाली तरीका माना जाता है, क्योंकि यह पारलौकिक व भौतिक वास्तविकताओं के बीच की कड़ी है|”- डॉ. पिल्लै “सभी कार्यपद्धतियों में, यज्ञ सबसे विकसित विधा है तथा यह समृद्धि प्राप्त करने का एक शीघ्रतम मार्ग है” – डॉ. पिल्लै
यज्ञ अनुष्ठान में अग्नि को एक माध्यम के रूप में प्रयोग किया जाता है तथा विभिन्न सामग्री, मंत्रोच्चारण व भावनात्मक प्रार्थनाओं का उपयोग ईश्वरीय शक्ति का आवाहन करने व उनकी शक्ति का प्रयोग करने के लिए किया जाता है| उनकी ऊर्जा वस्तुतः बाहरी साथ ही साथ आंतरिक मानवीय प्रणाली (सकल और सूक्ष्म ऊर्जा) के भीतर से आती है| दैवीय नियम के अनुसार जब यज्ञ अनुष्ठान को विधिवत रूप से संपन्न किया जाता है तब ईश्वरीय शक्ति सात्विक प्रार्थना का उत्तर देने के लिए बाध्य होती है|
यद्यपि सरल प्रतीत होने वाला यज्ञ अनुष्ठान अविश्वसनीय रूप से एक जटिल व पेचीदा कार्यपद्धति है| एक घड़ी की तरह इसके कई गतिशील अंग हैं, जोकि नाजुक रूप से एक दूसरे के साथ जुड़े होते हैं| यदि एक भी अंग अन्य अंगों के साथ संरेखण में नहीं है तो यह ठीक से काम नहीं करेगा। इसलिए इन्हें अत्यधिक सूक्ष्मता के साथ संपन्न किया जाना चाहिए| हमारे यज्ञ अनुष्ठान संपन्न करने वाले सुदक्ष विशेषज्ञों ने कई वर्षों तक यज्ञ अनुष्ठानों को आरंभ से लेकर अंत तक सटीक ढंग से संपन्न करने का कठोर प्रशिक्षण लिया है तथा ये डॉ. पिल्लै द्वारा चुने गए थे। उनके पास परोक्षी कार्यपद्धति का ज्ञान है, जो प्रायोजकों की अनुपस्थिति के बावजूद उन्हें यज्ञ अनुष्ठान का लाभ प्रदान करता है|
अब सीधे प्रसारण के माध्यम से परस्पर संवादात्मक अग्नि यज्ञ अनुष्ठानों का अनुभव करें, जहां आप संसार के किसी भी कोने से इस यज्ञ अनुष्ठान की शक्ति से जुड़ सकते हैं| आप अपने निवास पर ही निश्चित मंत्रोच्चारण, प्रार्थना का समयकाल तथा कुछ विशेष क्रियाओं को स्वयं संपन्न करने हेतु हमारे प्रशिक्षित विशेषज्ञों द्वारा दिशा-निर्देश प्राप्त करेंगे| यहां तक कि यदि आप सीधे प्रसारण के माध्यम से हमसे जुड़ने में असमर्थ हैं तो भी परोक्षी कार्यपद्धति के माध्यम से यज्ञ के लाभ आप तक पहुँच जाएंगे चाहे आप संसार के किसी भी कोने में हों तथा इसका पूरा श्रेय हमारी इस परोक्षी कार्यपद्धति को जाता है|
जिस यज्ञ अनुष्ठान से आप लाभ प्राप्त करना चाहते हैं उसे चुन सकते हैं या मासिक यज्ञ अनुष्ठान चक्र से जुड़कर प्रत्येक माह होने वाले यज्ञ अनुष्ठान का लाभ रियायती कीमत पर ले सकते हैं|
जब से मैंने इनमें भाग लेना शुरू किया तब से सब कुछ बदल रहा है। पुजारी इतने पेशेवर हैं कि जब वे प्रतिभागियों के स्थान पर मंत्रोच्चारण करते हैं, तो मैं आश्चर्यचकित हो जाती हूँ कि वे कैसे इतने शानदार ढंग से इसे संपन्न करते हैं!- लोरी ग्रासिंग

Lori
प्रेमराजा व उन पुजारियों को जिनके पास यह ज्ञान है तथा जो हार्दिक दयालुता से हमारी ओर से इन पूजाओं को संपन्न करते हैं| साथ ही उनकी उदारता के लिए भी धन्यवाद जो घर पर इन अनुष्ठानों को संपन्न करने हेतु हमें दिशा-निर्देश देते हैं|- मारिया

Maria
दूर हैं इसलिए पूजा को इस प्रकार से संपन्न करने व इसमें भाग लेने में असमर्थ हैं। इस अनुष्ठान को देखना व इसमें भाग लेना बहुत अनोखा और सहज था।- मिट्टू

Mittu
लिए पिल्लै यज्ञ अनुष्ठान समूह का हार्दिक धन्यवाद करता हूँ| मुस्कुराना व रोना मुझे वैकल्पिक लग रहा था| वैदिक मंत्र सुंदर व शक्तिशाली दोनों थे। बहुत बहुत धन्यवाद।-चेरिल स्प्रिंग

Cheryl Spring
यज्ञ अनुष्ठानों में भाग लिया है और मेरी चेतना में बदलाव आया है। मेरे जीवन में सुधार हुआ है व मेरे रिश्ते आश्चर्यजनक रूप से बेहतर हो रहे हैं| मैं इस अनुष्ठान की उन सभी को अनुशंसा करता हूँ | यह वास्तव में जीवन को सर्वश्रेष्ठ उच्चता की ओर ले जाता है|- लालमा डिकेन्स

Lalma Dickens
यज्ञ अनुष्ठानों व डॉ पिल्लै की शिक्षाओं को वास्तव में प्रेरणादायक पाया है| यज्ञ अनुष्ठानों ने मेरी आत्मा को सम्मनित किया है जबकि शिक्षाएं मुझे अपने लक्ष्यों के प्रति सजगता से केंद्रित रखती हैं I संयुक्त परिणाम महान रहे हैं पिल्लई केंद्र व डा. पिल्लै को बहुत धन्यवाद- डॉन मेरीलैंड

Don, Maryland
सितम्बर यज्ञ अनुष्ठान चक्र के अंतर्गत आने वाले 8 निर्धारित कार्यक्रमों में भाग लें तथा भारी छूट प्राप्त करें|
3 परस्पर संवादात्मक यज्ञ अनुष्ठान
1 प्रदोष अनुष्ठान
आपको सहायता प्रदान करने व सशक्त बनाने हेतु सितम्बर यज्ञ अनुष्ठान चक्र इस महत्वपूर्ण समय पर उपलब्ध अद्वितीय ऊर्जा का लाभ उठाता है, जिस पर नीव रखकर आप इस वर्ष को अपने जीवन का सर्वश्रेष्ठ वर्ष बना सकते हैं|
याद रखें, परस्पर संवादात्मक यज्ञ अनुष्ठान चक्र के प्रतिभागी के रूप में, आप संसार भर में ऐसे अध्यात्मवादियों के साथ शामिल हो रहे हैं जो एक ही समय में अपनी भावनाओं को जाहिर करके इस उर्जा के साथ जुड़ते हैं| आपको निम्नलिखित 3 यज्ञ व 1 प्रदोष अनुष्ठानों में शामिल किया जाएगा।
इस परस्पर संवादात्मक यज्ञ का आयोजन भगवान श्री कालभैरव के सम्मान में किया जाएगा। भगवान श्री कालभैरव आपके कार्यों में होने वाले विलंब का अंत कर सकते हैं तथा समय-समय पर होने वाली नासमझी से आपको बचा सकते हैं।
कृष्ण पक्ष की इस अष्टमी तिथि पर चंद्रमा मृगशिरा नक्षत्र में होगा जो मंगल द्वारा शासित आत्मज्ञान का नक्षत्र है| इस दिन की आकाशीय ऊर्जा भगवान कालभैरव का आवाहन करने हेतु उपयुक्त है ताकि आप व आपके पूर्वजों द्वारा किए गए बुरे कर्मों के प्रभावों को कम करने में सहायता मिल सके। यह मृत्यु व रोग के भय को समाप्त करने के लिए भगवान कालभैरव का आशीर्वाद प्राप्त करने हेतु एक बहुत ही अनुकूल समय है|
इस परस्पर संवादात्मक यज्ञ का आयोजन ब्रह्मांड के रक्षक व धन-संपदा के स्वामी भगवान श्री हरि विष्णु के सम्मान में किया जाएगा। इस यज्ञ को कृष्णपक्ष की एकादशी तिथि पर संपन्न किया जाएगा| डॉ. पिल्लै के अनुसार “एकादशी तिथि आनंद प्रदाता है| यह दिवस सुख व आराम के लिए है यही कारण है कि यह भगवान श्री विष्णु को समर्पित है| यह दिवस धन तथा समृद्धिदायक है।”
इस दिन चंद्रमा पुष्य नक्षत्र में होगा| यह एक पुष्टिवर्धक नक्षत्र है जिसमें आपकी इच्छाओं को शीघ्रता से कई गुणा संपन्न करने की क्षमता है। इस प्रकार यह दिवस भगवान विष्णु का आवाहन करके धन संबंधी चेतना द्वारा अपने जीवन को परिपूर्ण करने तथा बाधाओं का शमन करने हेतु एक विशेष शुभ मुहूर्त है| वे बाधाएँ जो वर्तमान समय में आपको प्रचुरता को आकर्षित करने से रोक रही हैं।
प्रत्येक त्रयोदशी तिथि पर सूर्यास्त के पूर्व डेढ़ घंटे की अवधि प्रदोषकाल कहलाती है| इस कर्म विनाशक अनुष्ठान का आयोजन बुरे कर्मों के विनाशक सर्वोच्च देव भगवान शिव के सम्मान में किया जाएगा|
इस प्रदोष दिवस पर चंद्रमा अश्लेषा नक्षत्र में होगा जोकि बुध ग्रह द्वारा शासित एक रहस्यमय नक्षत्र है। इस दिन चंद्रमा व राहु दोनों भावनात्मक रूप से संवेदनशील राशि कर्क में होंगे| यह खगोलीय संयोजन आपके जीवन में आशीर्वाद व अनुग्रह के बारे में अधिक सतर्क हो जाने हेतु इस दिन को एक मजबूत दिवस बनाता है। उस अनुग्रह के लिए कृतज्ञता प्रकट करने तथा शर्तरहित निस्वार्थ सेवा करने हेतु यह एक उत्कृष्ट समय है। पशुओं व प्रकृति के प्रति किए गए पापों के लिए क्षमा प्रार्थना करने हेतु भी यह एक अच्छा दिन है|
इस परस्पर संवादात्मक यज्ञ का आयोजन शुक्लपक्ष की षष्ठी तिथि पर अध्यात्मिक योद्धा व आरोग्यप्रदाता देव भगवान मुरुगा के सम्मान में किया जाएगा| भगवान मुरुगा विवाद पैदा करने वाले आंतरिक दुश्मनों को नष्ट करने में सुदक्ष हैं जो विवाद पैदा करते हैं तथा आपको आध्यात्मिक(आत्मज्ञान, ज्ञान, आनंद) व भौतिक(धन, स्वास्थ्य, रिश्ते) दोनों रूप से कष्ट देते हैं|
इस दिन चंद्रमा अनुराधा नक्षत्र में रहेगा| शनि द्वारा शासित यह नक्षत्र प्रचुरता का प्रतीक है| चूंकि चंद्रमा व शनि दोनों इस दिन जलतत्व प्रधान राशि वृश्चिक में होंगे इसलिए भगवान मुरुगा के आवाहन द्वारा नकारात्मक भावनाओं को समाप्त करने हेतु यह एक उपयुक्त दिन है, क्योंकि मन की शांति व प्रगति में बाधक के रूप में यह सबसे प्रमुख दुश्मनों में से एक है| नज़रदोष व ईर्ष्या से बचने के लिए भगवान मुरुगा का संरक्षण प्राप्त करने हेतु भी यह एक अच्छा दिन है।