अत्यधिक शक्ति, साहस, विजय और तीन प्रमुख ग्रहों को नियंत्रित करने के लिए वैदिक कार्यपद्धति
भव्य पंचमुख आंजनेय यज्ञ
(साहस, संरक्षण और सफलता प्राप्त करने के लिए पंचमुख हनुमान यज्ञ)
सीधा प्रसारण 18 मई 2018 को सांयकाल 6:30 बजे (पैसेफिक मानक समयानुसार)/ रात्रि 9:30 बजे (ईस्टर्न मानक समयानुसार)/ 19 मई 2018 को प्रातः 7:00 बजे (भारतीय मानक समयानुसार)
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“हनुमान जी मानवता के भविष्य व असीमित बुद्धि का प्रतिनिधित्व करते हैं| वे न केवल असीमित बुद्धि बल्कि सब कुछ करने के लिए अनिवार्य असीमित शक्ति ऊर्जा का भी प्रतिनिधित्व करते हैं|”
– डॉ. पिल्लै
ब्रह्मांडीय अंतरिक्ष में दुर्लभ ग्रहों के संयोजन के कारण 19 मई 2018 को एस्ट्रोवेद एक विशेष पंचमुख आंजनेय यज्ञ (पंचमुखी हनुमान जी के निमित यज्ञ) का आयोजन करेगा जिसमें परम उद्धारकर्ता भगवान हनुमान जी का आह्वान किया जाएगा जो कि आपको जीवन में आने वाली असफलताओं व कठिनाइयों से बचा सकते हैं| वर्तमान में दो प्रमुख ग्रह बृहस्पति व शनि वक्री हैं तथा आक्रामक ग्रह मंगल अपनी उच्च राशि में है|
वैदिक ज्योतिष के अनुसार बृहस्पति की वक्री स्थिति इस शुभ ग्रह को कमजोर करती है तथा इसके सकारात्मक फलों में कमी लाती है|यह आपको लालच, स्वार्थ व अहंकार भी प्रदान कर सकता है जिससे आपके व्यक्तिगत व व्यावसायिक संबंध प्रभावित हो सकते हैं| तुला राशि में बृहस्पति की वक्री स्थिति आपको अपव्ययी व लापरवाह बना सकती है तथा आप धन से संबंधित गलत निर्णय ले सकते हैं| बृहस्पति के अधिपति भगवान शिव हैं। हनुमान जी भगवान शिव के ग्यारहवें रुद्र या दिव्य अवतार हैं जो आपको वक्री बृहस्पति के नकारात्मक प्रभावों से बचा सकते हैं|
इसके विपरीत शनि की वक्री स्थिति को बली माना जाता है| हनुमान जी शनि को अपनी पूंछ से नियंत्रित करते हैं लेकिन वास्तव में वह प्रेमपूर्वक ऐसा करते हैं| शनिदेव हनुमान जी से इतना प्रेम करते हैं तथा उनका इतना सम्मान करते हैं कि वह उन लोगों को नुकसान नहीं पहुंचा सकते जिन पर हनुमान जी की कृपा है| हनुमान जी एक ऐसे देव हैं जो आपको एक बली शनि के गुण जैसे अनुशासन, धैर्य, नियमबद्धता व कड़ी मेहनत आदि प्रदान कर सकते हैं|
उच्च राशि में मंगल ग्रह की अवधि मांगलिक दोष (पीड़ादायी संबंध) के प्रभाव को कम करने का सही समय है। उच्चस्थ मंगल की अवधि के दौरान निरंतर परिणाम-उन्मुख ऊर्जा उपलब्ध रहती है| इस प्रकार यह उर्जा आपके सपनों को साकार करने हेतु परियोजनाओं, विचारों और रणनीतियों को अमल में लाने के लिए इस अवधि को एक आदर्श समय बनाती है| मंगल ग्रह के नियंत्रक हनुमान जी उच्चस्थ मंगल के सकारात्मक प्रभावों को बढ़ा सकते हैं।
‘पंचमुख आंजनेय’ हनुमान जी का पंचमुखी रूप है। हनुमान जी का यह रूप भगवान विष्णु व हनुमान जी की संयुक्त दैवीय ऊर्जा का प्रतीक है। संस्कृत में ‘पंच’ शब्द का अर्थ पांच व ‘मुख’ शब्द का अर्थ चेहरा है। इन पांच मुखों में आंजनेय (वानर मुख), हयग्रीव (अश्व मुख), नृसिंह (सिंह मुख), वराह (शूकर मुख) और गरुड़ (गरुड़ मुख) शामिल है।
पंचमुख आंजनेय (पंचमुखी हनुमान जी) का प्रत्येक मुख आपको अनोखे आशीर्वाद प्रदान कर सकता है:
इस वैदिक नव वर्ष में जीवन के समस्त पहलुओं में सफलता प्राप्त करने व आपकी सहायता करने के लिए एस्ट्रोवेद ने हमारे विशेष लक्ष्य के एक भाग के रूप में इस अनुष्ठान की व्यवस्था की है। एक नए भाग्य का निर्माण करने के लिए आपको दृढ़, भाग्यशाली व कर्म-उन्मुख होना चाहिए। शनिदेव आपको धैर्य व दृढ़ता प्रदान कर सकते हैं, बृहस्पति आपको उत्तम भाग्य प्रदान कर सकता है व मंगल आपको एक योद्धा की तरह कार्य करने में सहायता कर सकता है। भगवान हनुमान जी के समक्ष की गई आपकी निष्पक्ष प्रार्थना बृहस्पति, शनि व मंगल जैसे ग्रहों की वर्तमान गोचरीय स्थिति के नकारात्मक प्रभावों को नियंत्रित कर सकती है तथा इन ग्रहों के सकारात्मक प्रभाव प्राप्त करने में आपकी सहायता कर सकती है।
पवित्र ग्रंथों के अनुसार भगवान हनुमान जी(जिन्हें आंजनेय भी कहा जाता है|) के निमित इस पवित्र यज्ञ अनुष्ठान को संपन्न करने से आपको अपने लक्ष्यों को पूर्ण करने के लिए अत्यधिक शक्ति प्राप्त हो सकती है, प्रयासों में सफलता मिल सकती है तथा एक समस्यामुक्त आनंददायक जीवन की प्राप्ति हो सकती है|
इस शक्तिस्थल से जुडी पौराणिक कथाओं के अनुसार पंचमुख आंजनेय के निमित पूजा-अर्चना करने से आपकी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण हो सकती हैं, आपत्ति व बुरी शक्तियों से आपका बचाव हो सकता है तथा उत्तम बुद्धि, धन व शक्ति प्राप्त होकर स्वास्थ्य समस्याओं से मुक्ति मिल सकती है|
मान्यता है कि हनुमान चालीसा के इस पवित्र स्तोत्र के पाठ द्वारा समस्त आपत्तियों से आपकी रक्षा होती है, मन व शरीर का शुद्धिकरण होता है, आध्यात्मिक ज्ञान व आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है तथा मुक़दमेबाजी से आपको राहत मिलती है|
पारंपरिक पूजा विधि के रूप में उन्हें स्वादिष्ट गुलगुलों की माला अर्पित करने से आपकी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होकर शनि ग्रह के दुष्प्रभावों से मुक्ति मिल सकती है|
ब्रह्मांडीय अंतरिक्ष में दुर्लभ ग्रहों के संयोजन के कारण 19 मई 2018 को एस्ट्रोवेद एक विशेष पंचमुख आंजनेय यज्ञ (पंचमुखी हनुमान जी के निमित यज्ञ) का आयोजन करेगा जिसमें परम उद्धारकर्ता भगवान हनुमान जी का आह्वान किया जाएगा जो कि आपको जीवन में आने वाली असफलताओं व कठिनाइयों से बचा सकते हैं| भगवान हनुमान जी के समक्ष की गई आपकी निष्पक्ष प्रार्थना बृहस्पति, शनि व मंगल जैसे ग्रहों की वर्तमान गोचरीय स्थिति के नकारात्मक प्रभावों को नियंत्रित कर सकती है तथा इन ग्रहों के सकारात्मक प्रभाव प्राप्त करने में आपकी सहायता कर सकती है।
आप क्या प्राप्त करेंगे?
आपको पवित्र विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।
डॉ. पिल्लै के अनुसार-
“ यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।”
कृपया ध्यान दें: इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिया जाने वाला प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिया जाएगा। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।