संदेशवाहक ग्रह वक्री: उत्तम स्वास्थ्य व वाणी हेतु इस 23-दिवसीय अवधि का सदुपयोग करें|
अब वैदिक कार्यपद्धति द्वारा बेहतर स्वास्थ्य पाकर अपने कौशलों में सुधार लाएं|
बुध, संदेशवाहक ग्रह जो संचार और स्वास्थ्य के लिए जिम्मेदार है, 13 अगस्त 2017 (भारतीय मानक समयानुसार) से 23 दिनों के लिए सिंह राशि में वक्री हो जाएगा| प्राकृतिक राशि चक्र की पांचवी राशि सिंह रचनात्मकता, बुद्धि, प्रेम संबंध, रोमांस और स्वास्थ्य के नवीकरण की प्रतीक है। सिंह राशि में बुध की वक्री स्थिति आपके रचनात्मक कौशल को ठीक तरह से प्रस्तुत करने में बाधा डाल सकती है| इस कारण आवश्यकता के समय बुद्धिमता व सहजता सहायक नहीं हो सकती। इस राशि में बुध स्वास्थ्य के प्रति आकस्मिक दृष्टिकोण या बदलाव दे सकता है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं आ सकती हैं। सिंह राशि में इस संक्षिप्त गोचर अवधि के दौरान बुध अपने दुष्ट प्रभावों को उजागर कर सकता है तथा अनावश्यक बहस, ख़राब स्वास्थ्य व मानसिक अशांति का कारण बन सकता है|
यह गोचरीय दिवस बुध ग्रह, इसके अधिपति देव भगवान विष्णु व दैवीय चिकित्सक धन्वंतरी जी की पूजा करने हेतु एक श्रेष्ठ समय है, जो आपको 23 दिनों की इस गोचरीय अवधि में अपने स्वास्थ्य को फिर से जीवंत करने और अपने कौशल व वाणी को सुधारने में मदद करता है|
23 दिनों की इस गोचरीय अवधि के दौरान बुध ग्रह आपके सामाजिक संबंधों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है, जिससे आपके संबंधों में ग़लतफ़हमियाँ पैदा हो सकती हैं| संभवत: आपके रिश्ते में दरार भी आ सकती है| बुध के इस गोचरीय प्रभाव के कारण आप कुछ आवेशपूर्ण निर्णय ले सकते हैं जिससे आपको छोटी-मोटी आर्थिक हानि संभव है|
इस गोचर के दौरान बुध की ऊर्जा आपको बहसबाजी में डाल सकती है, जिसके परिणामस्वरूप आपको अपमान का सामना करना पड़ सकता है| बुध आपको अति आत्मविश्वासी बना सकता है तथा आप अपने पेशेवर व सामाजिक जीवन में आवेगपूर्ण व बहसबाजी वाला व्यवहार प्रदर्शित कर सकते हैं| जिससे संभवत: आपकी प्रतिष्ठा ख़राब होने के साथ-साथ मानसिक तनाव बढ़ सकता है तथा स्वास्थ्य भी प्रभवित हो सकता है|
व्यावसायिक जीवन हेतु सुझाव-
निजी जीवन हेतु सुझाव-
13 अगस्त 2017 को चंद्रमा केतु के अश्विनी नक्षत्र से गोचर करेगा तथा बुध से विपरीत भाव में रहेगा| यह दिन अश्विनी नक्षत्र की चिकित्सीय ऊर्जा प्रदान करेगा, जिसके अधिदेवता आकाशीय चिकित्सक अश्विनी कुमार हैं| गोचरीय दिवस पर यह ग्रहीय स्थिति बुध ग्रह को शांत करने हेतु एक आदर्श समय है तथा सिंह राशि में 23 दिवसीय बुध की गोचर अवधि के दौरान इस ग्रह के सकारात्मक आशीषों का आवाहन करने हेतु एक उत्तम समय है|
बुध सिंह राशि में वक्री: आवश्यक अनुष्ठान
हम अनुशंसा करते हैं कि आप एस्ट्रोवेद के विशेष अनुष्ठानों में अवश्य भाग लें ताकि इस गोचरीय अवधि में बुध ग्रह, इसके अधिपति देव भगवान विष्णु व दैवीय चिकित्सक धन्वंतरी जी की पूजा द्वारा आप अपने स्वास्थ्य को फिर से जीवंत कर पाएं तथा अपने कौशल व वाणी को सुधारने में आपको मदद मिल सके| इस विशेष गोचरीय दिवस पर अपने स्वास्थ्य, संवाद , जुनून व कौशल को बढ़ावा देने के लिए बुध ग्रह की कृपा का आवाहन करें|
आप क्या प्राप्त करेंगे?-
आपको पवित्र विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।
डॉ. पिल्लै के अनुसार- :
“ यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।”
कृपया ध्यान दें- : इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिया जाने वाला प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिया जाएगा। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।
बुध सिंह राशि में वक्री: उत्कृष्ट अनुष्ठान
बुध, संदेशवाहक ग्रह जो संचार और स्वास्थ्य के लिए जिम्मेदार है, 23 दिनों के लिए सिंह राशि में वक्री हो जाएगा| यह गोचरीय दिवस बुध ग्रह, इसके अधिपति देव भगवान विष्णु व दैवीय चिकित्सक धन्वंतरी जी की पूजा करने हेतु एक श्रेष्ठ समय है, जो आपको 23 दिनों की इस वक्री गोचरीय अवधि में अपने स्वास्थ्य को फिर से जीवंत करने और अपने कौशल व वाणी को सुधारने में मदद करता है|
आप क्या प्राप्त करेंगे?-
आपको अभिमंत्रित उत्पादों के साथ-साथ पवित्र यज्ञ से प्राप्त विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।
डॉ. पिल्लै के अनुसार-
“ यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।”
कृपया ध्यान दें- इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिए जाने वाले उत्पाद तथा प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिए जाएंगे। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार