इस पर्व का नाम सिंह राशि के अंतर्गत आने वाले सबसे चमकदार नक्षत्र मघा के आधार पर रखा गया है। इस पर्व को तमिल मास मासी में तब मनाया जाता है, जब विशेष ब्रह्मांडीय शक्ति पृथ्वी तल को भर देती है। यह शक्ति आपके शरीर को नवयौवन प्रदान करती है तथा आपके पूर्वजों की आत्मा को शुद्ध करने का कार्य भी करती है। वर्ष भर में सिर्फ एक बार घटित होने वाली यह अनोखी घटना आपकी समृद्धि तथा राजसी चेतना को बढ़ाने में मदद कर सकती है। क्योंकि इस दिन की नक्षत्र शक्ति में एक राजा के गुण समाहित हैं। यह शक्ति आपको पितरों की कृपा प्राप्त करने में भी सहायता करती है क्योंकि इस नक्षत्र के इष्टदेव पितर हैं।
प्राचीन धर्मग्रंथों के अनुसार सृष्टिकर्ता ब्रह्मा ने जब ब्रह्मांड को नाश करके उसकी पुनः रचना करने की भगवान शिव की इस योजना के बारे में जाना तो उन्होंने शिव जी से सृष्टि की पुनः रचना करने की कार्य प्रणाली के बारे में पूछा। तब भगवान शिव ने ब्रह्मा जी को एक घड़े में अमृत तथा विश्व रचना हेतु स्रोत शक्ति भरने को कहा। इसके पश्चात उन्होंने ब्रह्मा जी को उस घड़े को मेरु पर्वत के शीर्ष पर स्थापित करने के निर्देश दिए। भगवान शिव ब्रह्मा जी से बोले कि भयंकर बाढ़ के बाद उन्हें घड़ा जिस स्थान पर मिले वहीँ से वह सृष्टि की रचना का कार्य आरंभ करें। तमिल मास मासी में मघा नक्षत्र के दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना करने का कार्य कुंभकोणम (दक्षिण भारत में स्थिति पवित्र मंदिरों से भरा एक शहर) से शुरू किया।
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार भगवान शिव ने इस पर्व को उनकी तथा माता पार्वती की कृपा प्राप्त करने के सबसे श्रेष्ठ दिनों में से एक बताया है। इस दिन आप मघा नक्षत्र की ऊर्जा द्वारा स्वयं को सशक्त बना सकते हैं। यह नक्षत्र पूजा-अर्चना करने, पितरों के आशीर्वाद की कमी के कारण जीवन में आने वाली नकारात्मक व कष्टकारी ऊर्जाओं को नष्ट करने के लिए भी अच्छा माना जाता है। पवित्र धर्मग्रंथों के अनुसार आप मासी माघम अनुष्ठानों में भाग लेकर निम्नलिखित लाभ प्राप्त कर सकते हैं-
इस दिन चंद्रमा सिंह राशि में रहेगा तथा मघा नक्षत्र से गोचर कर रहा होगा जिसका स्वामी केतु है। मघा नक्षत्र का प्रतीकात्मक चिन्ह एक सिंहासन है, जोकि राजसी सत्ता व राजसी चेतना को दर्शाता है। इन दिन बुध उच्च राशि में स्थित शुक्र (मीन राशि में) के साथ युति करेगा। इस राशि का स्वामी गुरु है जोकि नीच भंग राजयोग का निर्माण कर रहा है। इस दिन बुध(मीन में) व गुरु(कन्या में) के बीच राशि परिवर्तन योग (भावों के बीच शुभ परिवर्तन) भी बन रहा है। इसके अतिरिक्त ग्रहों के राजा व रानी की संगति यानि चन्द्रमा का सिंह में बैठकर सूर्य से संपर्क समृद्धि, यश तथा राजसी कृपा पाने तथा जीवन में उच्च उद्देश्य व महत्वाकांक्षा बनाने हेतु इस दिन को एक आदर्श दिन बनाता है। इस दिन ग्रहों का संयोग आपको नकारात्मक अहम से मुक्त करेगा और आपकी नेतृत्व व निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाएगा।
हमने कुंभकोणम में मासी माघम पर्व हेतु विशेष अनुष्ठानों का आयोजन किया है। जिसमे आदर्शरूप भगवान शंकर-नारायण की कृपा से आपको जीवन में समृद्धि, प्रचुरता तथा पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
आप क्या प्राप्त करेंगे?
आपको पवित्र यज्ञ से प्राप्त विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।
डॉ. पिल्लै इसे इस प्रकार समझाते हैं-
यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।”
कृपया ध्यान दें- इस: पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिया जाने वाला प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिया जाएगा। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार भगवान शिव ने इस पर्व को उनकी तथा माता पार्वती की कृपा प्राप्त करने के सबसे श्रेष्ठ दिनों में से एक बताया है। इस दिन आप मघा नक्षत्र की ऊर्जा द्वारा स्वयं को सशक्त बना सकते हैं। यह नक्षत्र पूजा-अर्चना करने, पितरों के आशीर्वाद की कमी के कारण जीवन में आने वाली नकारात्मक व कष्टकारी ऊर्जाओं को नष्ट करने के लिए भी अच्छा माना जाता है।
आप क्या प्राप्त करेंगे?
आपको पवित्र यज्ञ से प्राप्त विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।
डॉ. पिल्लै इसे इस प्रकार समझाते हैं:
यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।”
कृपया ध्यान दें: इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिया जाने वाला प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिया जाएगा। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।
Tइस पर्व का नाम सिंह राशि के अंतर्गत आने वाले सबसे चमकदार नक्षत्र मघा के आधार पर रखा गया है। इस पर्व को तमिल मास मासी में तब मनाया जाता है, जब विशेष ब्रह्मांडीय शक्ति पृथ्वी तल को भर देती है। यह शक्ति आपके शरीर को नवयौवन प्रदान करती है तथा आपके पूर्वजों की आत्मा को शुद्ध करने का कार्य भी करती है। अपने जीवन में प्रचुरता, राजसी चेतना व समृद्धि को बढ़ाने तथा पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त करने हेतु मासी माघम अनुष्ठानों में अवश्य भाग लें।
आप क्या प्राप्त करेंगे?
आपको पवित्र यज्ञ से प्राप्त विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।
डॉ. पिल्लै इसे इस प्रकार समझाते हैं-
यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।”
कृपया ध्यान दें: इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिया जाने वाला प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिया जाएगा। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।