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एस्ट्रोवेद द्वारा पवित्र कावेरी नदी के तट पर 5 देवी-देवताओं के निमित भव्य अनुष्ठानों का आयोजन


समस्त प्रकार के पापों व शाप से मुक्ति हेतु वैदिक अनुष्ठान

पंचमूर्ति पुरप्पाडु: तुलाराशि में सूर्य की गोचरीय अवधि के अंतिम
दिन दैवीय शोभायात्रा और पंचमूर्ति(पंचदेव) का पवित्र स्नान


दैवीय नदी कावेरी में शाप व पापों से मुक्ति हेतु अनुष्ठान

16 नवम्बर को कावेरी नदी के तट पर स्थित एक शक्तिस्थल पर एस्ट्रोवेद पंचदेवों के निमित एक दैवीय शोभायात्रा को प्रायोजित करेगा, जोकि शक्तिस्थल की पौराणिक कथाओं के अनुसार आपके पापों व शाप का शमन करके जीवन में समृद्धि व उत्तम स्वास्थ्य प्रदान कर सकती है| अपने सभी प्रकार के पापों व शाप से मुक्ति हेतु हम आपको इस कर्म निरस्त अनुष्ठान में भाग लेने के लिए आमंत्रित करते हैं, जोकि वर्ष में केवल एक बार तुलाराशि में सूर्य की गोचरीय अवधि के अंतिम दिन होता है|

दैवीय शोभायात्रा का महत्व

तमिल माह ऐप्पसी (अक्टूबर मध्य से नवंबर मध्य तक) के अंतिम दिन कावेरी नदी के तट पर स्थित पवित्र शक्तिस्थल से पांच देवताओं (पंचमूर्तियों) को एक दिव्य शोभायात्रा में समिल्लित करके पवित्र कावेरी नदी के पास ले जाया जाता है, जहां उन्हें पवित्र जल से स्नान कराया जाता है। इन पंचदेवों में भगवान गणेश, वल्ली व देवयानी नामक पत्नियों सहित भगवान मुरुगा, भगवान सोमस्कंदर (इस रूप में भगवान शिव अपनी पत्नी पार्वती और पुत्र मुरुगा सहित होंगे|), देवी पार्वती का एक रूप देवी सौंदरानायकी (शक्तिस्थल की प्रधान पूजनीय देवी) और भगवान चण्डिकेश्वरर (भगवान शिव के प्रकांड भक्त जिन्होंने दैवीय स्तर प्राप्त किया|) आदि शामिल हैं|

कावेरी महात्मय नामक पवित्र पाठ के अनुसार इस अनुष्ठान के दौरान कावेरी नदी में एक पवित्र डुबकी लेने से आपको पंचदेवों का संयुक्त आशीर्वाद प्राप्त होता है तथा आप सभी प्रकार के पापों और शाप से मुक्त हो सकते हैं।

दैवीय शोभायात्रा में भाग लेने से मिलने वाले लाभ

शक्तिस्थल से जुड़ी पौराणिक कथाओं के अनुसार पंचदेवों को स्नान कराने से संबंधित इस दैवीय शोभायात्रा में भाग लेने से आपको निम्नलिखित आशीर्वाद प्राप्त होते हैं-

  • उत्तम संतान सुख- महान तमिल सम्राट राजा चोजेन को इस पवित्र शक्तिस्थल पर पूजा के बाद राजेंद्र चोजन नामक पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई थी| इस शक्तिस्थल पर पीठासीन देवताओं के समक्ष निष्कपट प्रार्थना द्वारा आपको उत्तम संतान सुख की प्राप्ति हो सकती है|
  • मृत्यु भय से मुक्ति- एक धनी व्यक्ति था जिसने जीवन में अनेक पापकर्म किए थे| जब मृत्यु के देवता यम उसे लेने आए तो उसने इस शक्तिस्थल में भगवान शिव की शरण ली थी। उसकी प्रार्थना सुनकर भगवान शिव ने उसके बचाव के निमित नंदी नामक अपने दिव्य बैल को भेजा। यम और नंदी (जिन्हे वृषभ भी कहते हैं|) के बीच की वो लड़ाई बहुत भयंकर थी। एक समय तो ऐसा आया जब नंदी से यम को बचाने के लिए भगवान शिव को हस्तक्षेप करने की जरुरत महसूस होने लगी थी| जैसा भगवान शिव ने अपने भक्त को बचाया ठीक उसी प्रकार इस पवित्र शक्तिस्थल पर की गई प्रार्थनाओं द्वारा आपका मृत्यु भय भी कम हो सकता है|
  • क्योंकि नंदी ने वृषभ बैल के रूप में यम से युद्ध किया था इसलिए यह माना जाता है कि यह शक्तिस्थल वृषभ चंद्रराशि/सूर्य राशि/लग्न वाली जन्मकुण्डलियों के दोषों(पीड़ाओं) को नष्ट करके अनुकूल आशीर्वाद प्रदान कर सकता है|
  • क्योंकि इस दैवीय शोभायात्रा व पवित्र स्नान अनुष्ठान का आयोजन तमिल माह ऐप्पसी के दौरान तुला राशि में सूर्य की गोचरीय अवधि के अंतिम दिन किया जाता है इसलिए तुला चंद्रराशि/सूर्यराशि/लग्न वाले लोग भी इन अनुष्ठानों में समिल्लित होकर लाभ उठा सकते हैं|

पंचमूर्ति पुरप्पाडु पैकेज

ESSENTIAL RITUALS

  • आपकी तरफ से शक्तिस्थल पर पंचमूर्तियों (पंचदेवों) के निमित पूजा-अर्चना की जाएगी|
  • आपकी तरफ से पीठासीन देवताओं सहित पंचमूर्तियों (पंचदेवों) के निमित जलाभिषेक अनुष्ठान किया जाएगा|
  • आपकी तरफ से शक्तिस्थल पर आने वाले तथा अनुष्ठान में भाग लेने वाले भक्तों को भोजन खिलाया जाएगा|

अपने सभी प्रकार के पापों व शाप से मुक्ति हेतु हम आपको इस कर्म निरस्त अनुष्ठान में भाग लेने के लिए आमंत्रित करते हैं, जोकि वर्ष में केवल एक बार तुलाराशि में सूर्य की गोचरीय अवधि के अंतिम दिन होता है| तमिल माह ऐप्पसी (अक्टूबर मध्य से नवंबर मध्य तक) के अंतिम दिन कावेरी नदी के तट पर स्थित पवित्र शक्तिस्थल से पांच देवताओं (पंचमूर्तियों) को एक दिव्य शोभायात्रा में समिल्लित करके पवित्र कावेरी नदी के पास ले जाया जाता है, जहां उन्हें पवित्र जल से स्नान कराया जाता है। तुलाराशि में सूर्य की गोचरीय अवधि के अंतिम दिन होने वाले इस पवित्र अनुष्ठान में अवश्य भाग लें|

आप क्या प्राप्त करेंगे?

आपको पवित्र विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।

डॉ. पिल्लै के अनुसार:

यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।

कृपया ध्यान दें: इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिया जाने वाला प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिया जाएगा। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।