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महापुष्कर 2017


144 वर्ष में एक बार होने वाली सबसे विशाल घटना दिव्य कावेरी नदी में अपने पापों का शमन करें


देवी कावेरी के आशीर्वाद से समृद्धि व स्वास्थ्य को आकर्षित करने हेतु कर्म परिवर्तित अनुष्ठान

समृद्धि प्रदाता दैवीय नदी-

24 सितंबर को दिव्य देवी कावेरी आपके पापों को धो सकती है तथा आपको समृद्धि व स्वस्थ जीवन प्रदान कर सकती है| भारत में कावेरी नदी को दिव्य नदी गंगा के समान देवी माँ का दर्जा प्राप्त है| वह सभी को समृद्ध जीवन व समस्त प्रकार के वैभव प्रदान करने के लिए जानी जाती है| प्रत्येक वर्ष पुष्कर जो कि पवित्र नदियों के रूप में देवी के अवतरण से संबंधित पर्व है बृहस्पति के गोचर के आधार पर मनाया जाता है|

2017 में कर्मों को निरस्त करने हेतु विशाल घटना-

इस वर्ष बृहस्पति 12 सितंबर 2017 को कन्या राशि से तुला राशि में गोचर कर चुका है और कावेरी नदी की राशि भी तुला है। इस दुर्लभ ज्योतिषीय घटना को कावेरी महापुष्कर के रूप में मनाया जाता है जो 144 वर्षों में केवल एक बार घटित होती है|

महापुष्कर का महत्व-

यह माना जाता है कि पुष्कर के दौरान त्रिमूर्ति विष्णु, ब्रह्मा व शिव तथा अन्य दैवीय शक्तियाँ पवित्र नदियों का दौरा करने और हमें पापमुक्त करके अपना अनन्त आशीर्वाद प्रदान करने के लिए आते हैं| यह भी मान्यता है कि पवित्र नदी गंगा स्वयं को शुद्ध करने के लिए पुष्कर पर्व के दौरान कावेरी नदी से मिलन करती है|

महापुष्कर से संबंधित अनुष्ठानों के लाभ

कावेरी महापुष्कर भगवान शिव व विष्णु जी की विशेष प्रार्थना हेतु एक आदर्श समय काल है| यह दैवीय शक्तियाँ आपको निम्नलिखित लाभ प्रदान कर सकती हैं-

  • आपकी आंतरिक आत्मा की शुद्धि होकर धार्मिकता में वृद्धि होती है|
  • आपके बुरे विचार नष्ट होते हैं|
  • आपके जीवन में समृद्धि व प्रसन्नता आती है|
  • आपके शरीर, मन व आत्मा को पुनर्जीवन प्राप्त होता है|
  • जीर्ण रोगों का शमन होता है|
अनुशंसित सेवाएं
अनुशंसित सेवाएं

कावेरी महापुष्कर शक्ति अनुष्ठान

CAUVERY MAHAPUSHKARAM POWER RITUALS
  • 16 नवम्बर 2017 को कावेरी नदी के समीप स्थित 3 प्रसिद्ध शक्तिस्थलों पर शिव-पार्वती व लक्ष्मी-विष्णु जी की 6 पूजा-अर्चना की जाएगी|
  • 16 नवम्बर 2017 को भगवान मेधा दक्षिणामूर्ति की देवगुरु बृहस्पति के रूप में उनके विशेष शक्तिस्थल पर विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी|

पुष्कर पर्व प्रत्येक राशि में गुरु के गोचर के दौरान मनाया जाने वाला एक वार्षिक त्यौहार है| हम 3 प्रसिद्ध शक्तिस्थलों में 6 अर्चनाओं का आयोजन कर रहे हैं, जिसमें शिव-पार्वती के निमित 2 और लक्ष्मी-विष्णु के निमित 1 पूजा-अर्चना शामिल है| इसमें भगवान शिव के शक्तिस्थलों में से एक में भगवान मेधा दक्षिणमूर्ति की गुरु (बृहस्पति) के रूप में विशेष अर्चना भी समिलित है| इस शक्तिस्थल में भगवान दक्षिणामूर्ति की पूजा द्वारा आपको विवाह व संतान सुख के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी उत्कृष्टता प्राप्त होती है|

आप क्या प्राप्त करेंगे?

आपको अभिमंत्रित उत्पादों के साथ-साथ पवित्र यज्ञ से प्राप्त विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।

डॉ. पिल्लै के अनुसार

“ इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से प्रतिभागियों को दैवीय कृपा प्राप्त होती है।”

कृपया ध्यान दें- इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिए जाने वाले उत्पाद तथा प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिए जाएंगे। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।

कावेरी महापुष्कर संयुक्त शक्ति अनुष्ठान

CAUVERY MAHAPUSHKARAM COMBO POWER RITUALS
  • 24 सितम्बर व 16 नवम्बर 2017 को कावेरी नदी के समीप स्थित 3 प्रसिद्ध शक्तिस्थलों पर शिव-पार्वती व लक्ष्मी-विष्णु जी की 6 पूजा-अर्चना की जाएगी|
  • 24 सितम्बर व 16 नवम्बर 2017 को भगवान मेधा दक्षिणामूर्ति की देवगुरु बृहस्पति के रूप में उनके विशेष शक्तिस्थल पर विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी|

पुष्कर पर्व प्रत्येक राशि में गुरु के गोचर के दौरान मनाया जाने वाला एक वार्षिक त्यौहार है| हम 3 प्रसिद्ध शक्तिस्थलों में 6 अर्चनाओं का आयोजन कर रहे हैं, जिसमें शिव-पार्वती के निमित 2 और लक्ष्मी-विष्णु के निमित 1 पूजा-अर्चना शामिल है| इसमें भगवान शिव के शक्तिस्थलों में से एक में भगवान मेधा दक्षिणमूर्ति की गुरु (बृहस्पति) के रूप में विशेष अर्चना भी समिलित है| इस शक्तिस्थल में भगवान दक्षिणामूर्ति की पूजा द्वारा आपको विवाह व संतान सुख के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी उत्कृष्टता प्राप्त होती है|

आप क्या प्राप्त करेंगे?

आपको अभिमंत्रित उत्पादों के साथ-साथ पवित्र यज्ञ से प्राप्त विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।

डॉ. पिल्लै के अनुसार-

“ इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से प्रतिभागियों को दैवीय कृपा प्राप्त होती है।”

कृपया ध्यान दें इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिए जाने वाले उत्पाद तथा प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिए जाएंगे। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।