संबंधों व स्वास्थ्य को ठीक करने के लिए 47-दिवसीय महत्वपूर्ण अवधि|
अब वैदिक कार्यपद्धति द्वारा मंगल ग्रह को शांत करके कृपा प्राप्त करें|
2017-2018 वैदिक वर्ष का ग्रहीय राजा मंगल जो रिश्तों के लिए भी जिम्मेदार है, 11 जुलाई 2017 को 47 दिनों के लिए कर्क राशि में नीचस्थ होगा| अपनी इस सबसे कमजोर राशि में गोचर के दौरान मंगल अपने बुरे प्रभावों को प्रदर्शित कर सकता है| उदाहरण के लिए रिश्तों में षड्यंत्र, बहसबाजी व भावनात्मक गड़बड़ियाँ ख़ासतौर पर प्रेम संबंधों में पैदा हो सकती हैं| यह गोचरीय दिवस मंगल के अधिपति मुरुगा तथा नियंत्रक हनुमान जी को प्रसन्न करने का सबसे उपयुक्त समय है ताकि आप अपने संबंधों व स्वास्थ्य को सुधारने के लिए इन 47 दिनों की महत्वपूर्ण अवधि का प्रयोग कर सकें|
47 दिवसीय इस गोचर अवधि के दौरान, मंगल ग्रह अपने आवेगी गुण के कारण आपके घरेलू वातावरण पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। इसकी ऊर्जा अभद्र वार्तालाप का कारण बन सकती है, जिससे आपके साथी की भावनाओं को चोट पहुँच सकती है।
मंगल आपको शीघ्र क्रोधी तथा अविवेकपूर्ण व्यवहार करने वाला बना बना सकता है, जिससे आपके स्वास्थ्य व संबंध प्रभावित हो सकते हैं| यह आपको अपने पेशेवर व सामाजिक जीवन में बहसबाजी करने वाला बना सकता है| इस कारण संभवत: आपकी छवि ख़राब हो सकती है|
कुछ व्यावसायिक सुझाव :
कुछ व्यक्तिगत सुझाव :
11 जुलाई 2017 को चंद्रमा मंगल से सप्तम भाव में स्थित होकर धनिष्ठा नक्षत्र से गोचर करेगा| इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है| मंगल से चंद्रमा की यह भाव स्थिति नीचभंग राजयोग का निर्माण करती है तथा मंगल ग्रह को शांत करके उसकी कृपा प्राप्त करने हेतु इस दिन को एक आदर्श दिवस बनाती है|
यह गोचरीय दिवस मंगल ग्रह उसके अधिपति मुरुगा तथा नियंत्रक हनुमान जी को प्रसन्न करने का सबसे उपयुक्त समय है ताकि आप अपने संबंधों व स्वास्थ्य को सुधारने के लिए इन 47 दिनों की महत्वपूर्ण अवधि का प्रयोग कर सकें| इसलिए हम अनुशंसा करते हैं कि आप एस्ट्रोवेद के इन विशेष अनुष्ठानों में अवश्य भाग लें|
आप क्या प्राप्त करेंगे?
आपको पवित्र विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।
डॉ. पिल्लै के अनुसार –
यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।
कृपया ध्यान दें – इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिया जाने वाला प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिया जाएगा। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।