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अज्ञानता व नकारात्मकता का शमन करके शुभता को आमंत्रित करने हेतु वैदिक कार्यपद्धति

देवी कालरात्रि: नकारात्मकता का शमन करने वाली तथा वर प्रदाता देवी

सीधा प्रसारण 7 जुलाई 2018 को सांयकाल 6:30 बजे (पैसेफिक मानक समयानुसार)/ रात्रि 9:30 बजे (ईस्टर्न मानक समयानुसार)/ 8 जुलाई 2018 को प्रातः 7:00 बजे (भारतीय मानक समयानुसार)

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देवी कालरात्रि: विनाशक व वर प्रदायक

देवी कालरात्रि देवी दुर्गा के नौ रूपों में से सातवां रूप हैं। पवित्र ग्रंथ देवी महात्मय में यह महान देवी विध्वंसक के रूप में वर्णित हैं| देवी कालरात्रि को शुभंकरी भी कहा जाता है क्योंकि वह जीवन में शुभ चीजें प्रदान करती हैं| शास्त्रों के अनुसार जब देवी पार्वती ने शुभ और निशुंभ नामक राक्षसों का वध करने के लिए अपनी सुनहरी त्वचा का त्याग किया तब देवी कालरात्रि अवतरित हुईं। इनका रंग काला है, चार हाथ हैं तथा यह गधे की सवारी करती हैं| एक प्राचीन तांत्रिक ग्रंथ सौधिकगम में देवी को सहस्त्रार चक्र से संबंधित बताया गया है| साथ ही उन्हें बुरी शक्तियों की विनाशक, ज्ञान, शक्ति और संपति प्रदाता बताया गया है|

पवित्र ग्रंथों में देवी कालरात्रि का वर्णन

पवित्र ग्रंथों में देवी कालरात्रि को नकारात्मकता की विनाशक तथा सफलता, ज्ञान, शक्ति, धन, परम आनंद प्रदाता व इच्छाओं की पूर्ति करने वाली बताया गया है|

  • पवित्र ग्रंथ देवी महात्मय के अनुसार देवी दुर्गा शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी व सिद्धिदात्री आदि 9 अलग-अलग रूपों में प्रकट हुई थीं| देवी कालरात्रि देवी दुर्गा के नौ रूपों में से सातवां रूप हैं।
  • जब देवी पार्वती ने शुभ और निशुंभ नामक राक्षसों का वध करने के लिए अपनी सुनहरी त्वचा का त्याग किया तब देवी कालरात्रि अवतरित हुईं थी।
  • नकारात्मकताओं के विरुद्ध युद्ध करते समय देवी कालरात्रि ने रक्तबीज नामक राक्षस का वध किया था|
  • देवी कालरात्रि शनि ग्रह पर शासन करती हैं तथा जन्मकुंडली में शनि जनित पीडाओं को दूर करने में मदद कर सकती हैं|
  • एक प्राचीन तांत्रिक ग्रंथ सौधिकगम में देवी को सहस्त्रार चक्र से संबंधित बताया गया है इसलिए वह ज्ञान, शक्ति व संपति प्रदान कर सकती हैं|

दुर्गा सप्तशती व दुर्गा सूक्तम स्तोत्र के पाठ से प्राप्त होने वाले लाभ

देवी कालरात्रि के निमित किए जाने वाले इस पवित्र यज्ञ अनुष्ठान के दौरान दुर्गा सप्तशती (देवी माँ से संबंधित 700 श्लोकों की प्रशंसात्मक स्तुति) व दुर्गा सूक्तम (देवी दुर्गा से संबंधित स्तुति स्तोत्र) का पाठ करने से आपको निम्नलिखित आशीर्वाद प्राप्त हो सकते हैं:

Chanting Durga Saptashati and Durga Suktam
  • आपको बुरी नज़र, काला जादू व नकारात्मकता से मुक्ति मिलती है|
  • शत्रुओं से आपका बचाव होता है|
  • बाधाओं का शमन होता है|
  • व्यावसायिक और व्यक्तिगत जीवन में नए रास्ते खुलते हैं|
  • समस्त प्रयासों में सफलता मिलती है|
  • वित्तीय स्थिरता आती है तथा धन का अभाव दूर होता है|
  • जीवन में सफलता, शांति और समृद्धि प्राप्त होती है|
  • शारीरिक ओर मानसिक समस्याओं से मुक्ति मिलती है|
  • कार्यस्थल और घर पर शांति प्राप्त होती है|

देवी कालरात्रि यज्ञ के दौरान होने वाले अनुष्ठानों की व्याख्या

देवी कालरात्रि माँ दुर्गा का उग्र रूप हैं जो आपको समस्त संकटों से बचा सकती हैं तथा भय को नष्ट करके प्रचुरता का आशीर्वाद प्रदान कर सकती हैं| एस्ट्रोवेद देवी कालरात्रि की सुरक्षात्मक कृपा का आह्वान करने के लिए निम्नलिखित अनुष्ठान करने जा रहा है:-

Grand Kalaratri Devi Homa

8 जुलाई 2018 (भारतीय मानक समयानुसार) को एस्ट्रोवेद के उपचारात्मक केंद्र में 5 पुजारियों द्वारा भव्य कालरात्रि देवी यज्ञ

पवित्र पाठ देवी महात्मय के अनुसार देवी कालरात्रि नवदुर्गा (देवी दुर्गा के 9 रूप) का सातवां रूप हैं जिन्हें समस्त 9 रूपों में से सर्वाधिक उग्र माना जाता है। संस्कृत शब्द ‘कालरात्रि’ का अर्थ ‘वह जो समय और मृत्यु की विनाशक हैं’ से है| शास्त्रों के अनुसार इस पवित्र यज्ञ अनुष्ठान में देवी का आह्वान करने से अविद्या(अज्ञान), नकारात्मकता (भय, क्रोध और अहंकार) का शमन हो सकता है तथा आपको शुभता, प्रसिद्धि और समृद्धि प्राप्त हो सकती है|

Durga Suktam Chanting

8 जुलाई 2018 को प्रातः 7:00 बजे (भारतीय मानक समयानुसार) एस्ट्रोवेद के उपचारात्मक केंद्र में दुर्गा सूक्तम मंत्रोच्चारण अनुष्ठान

दुर्गा सूक्तम देवी दुर्गा की प्रशंसात्मक स्तुति है| पवित्र ग्रंथों के अनुसार दुर्गा देवी माँ पार्वती का योद्धा रूप है| दुर्गा सूक्तम का पाठ करने से बाधाओं व नकारात्मक उर्जा का शमन हो सकता है तथा आपको शांति, समृद्धि व समस्त प्रयासों में सफलता मिल सकती है|

Lalita Sahasranamam

8 जुलाई 2018 (भारतीय मानक समयानुसार) को केरल शक्तिस्थल पर ललिता सहस्त्रनाम (देवी ललिता के 1000 नामों का पाठ) अर्चना

ललिता सहस्त्रनाम एक ऐसा स्तोत्र है जो देवी ललिता की प्रशंसा करते हुए उनके 1000 अनोखे नामों का वर्णन करता है। इस शक्तिस्थल से जुड़ी प्राचीन परंपरा के अनुसार देवी के निमित पूजा-अर्चना करने से ग्रहों के दुष्प्रभाव व काले जादू से रक्षा होती है तथा आपको एक स्वस्थ और खुशहाल जीवन की प्राप्ति हो सकती है|

Vedi Vazhipadu

8 जुलाई 2018 (भारतीय मानक समयानुसार) को देवी भगवती के शक्तिस्थल पर वेदी वज्हीपदु( पटाखे छुड़ाने से जुड़ा अनुष्ठान) अनुष्ठान

यह एक विशेष केरलीय शैली का अनुष्ठान है जो देवी भगवती के शक्तिस्थल पर संपन्न किया जाता है, जिसमें आपकी प्रार्थनाओं का उत्तर प्राप्त करने के लिए ईश्वरीय शक्ति का आवाहन पटाखे छुड़ाकर किया जाता है|

Trishati Archana

8 जुलाई 2018 (भारतीय मानक समयानुसार) को केरल शक्तिस्थल पर लाल पुष्पों द्वारा त्रिशती अर्चना (देवी भगवती के 300 नामों का पाठ)

इस शक्तिस्थल से जुड़ी प्राचीन परंपरा के अनुसार देवी भगवती के 300 नामों का उच्चारण करते हुए पूजा-अर्चना करने से देवी प्रसन्न हो सकती हैं तथा आपको विपुल भौतिक व आध्यात्मिक सुखों की प्राप्ति हो सकती है|

Offering Red Silk Clothes

8 जुलाई 2018 (भारतीय मानक समयानुसार) को देवी भगवती के शक्तिस्थल पर लाल रेशमी वस्त्रों का अर्पण

परंपरागत पद्धति के अनुसार इस अनोखे केरलीय शैली अनुष्ठान को देवी भगवती के शक्तिस्थल पर लाल रेशमी वस्त्र चढ़ाकर संपन्न किया जाता है| जिसके फलस्वरूप हानियों से आपका बचाव होता है, पति को दीर्घायु प्राप्त होती है तथा जीवन में पीडाओं व विपत्तियों को बढ़ाने वाले बुरे कर्मों का नाश होता है|

Durga Saptashati Parayanam

8 जुलाई 2018 (भारतीय मानक समयानुसार) को एस्ट्रोवेद के उपचारात्मक केंद्र में दुर्गा सप्तशती परायण

हमारे सुदक्ष वैदिक पुजारी पवित्र पाठ देवी महात्मय के एक खंड का पाठ करेंगे, जिसे दुर्गा सप्तशती भी कहा जाता है, जिसमें रक्तबीज नामक राक्षस का वध करने वाली देवी कालरात्रि की वीरता का वर्णन है| शास्त्रों के अनुसार इस पाठ को सुनने से आपकी प्रगति में बाधक बाधाओं, भय व बुरी शक्तियों का शमन होकर समृद्ध जीवन की प्राप्ति हो सकती है|

5 पुजारियों द्वारा भव्य देवी कालरात्रि यज्ञ

5-PRIEST GRAND KALARATRI DEVI HOMA
  • आपकी तरफ से एस्ट्रोवेद के उपचारात्मक केंद्र में 5 पुजारियों द्वारा भव्य कालरात्रि देवी यज्ञ किया जाएगा|
  • आपकी तरफ से एस्ट्रोवेद के उपचारात्मक केंद्र में दुर्गा सूक्तम स्तोत्र का पाठ किया जाएगा|
  • आपकी तरफ से केरल शक्तिस्थल पर ललिता सहस्त्रनाम (देवी ललिता के 1000 नामों का पाठ) अर्चना की जाएगी|
  • आपकी तरफ से देवी भगवती के शक्तिस्थल पर वेदी वज्हीपदु( 3 पटाखे छुड़ाने से जुड़ा अनुष्ठान) अनुष्ठान किया जाएगा|
  • आपकी तरफ से केरल शक्तिस्थल पर लाल पुष्पों द्वारा त्रिशती अर्चना ( देवी भगवती के 300 नामों का पाठ) की जाएगी|
  • आपकी तरफ से देवी भगवती के शक्तिस्थल पर लाल रेशमी वस्त्रों से संबंधित अर्पण अनुष्ठान किया जाएगा|
  • आपकी तरफ से एस्ट्रोवेद के उपचारात्मक केंद्र में दुर्गा सप्तशती परायण अनुष्ठान किया जाएगा|
  • आपको टाइगर आई व काले गोमेद नामक रत्नों से निर्मित एक अभिमंत्रित करमाला प्रदान की जाएगी|

पवित्र ग्रंथ देवी महात्मय के अनुसार देवी कालरात्रि नवदुर्गा (देवी दुर्गा के 9 रूप) का सातवां रूप हैं जिन्हें समस्त 9 रूपों में से सर्वाधिक उग्र माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार जब देवी पार्वती ने शुभ और निशुंभ नामक राक्षसों का वध करने के लिए अपनी सुनहरी त्वचा का त्याग किया तब देवी कालरात्रि अवतारित हुईं। इनका रंग काला है, चार हाथ हैं तथा यह गधे की सवारी करती हैं| जीवन से आंतरिक व बाहरी नकारात्मकताओं तथा बुरी शक्तियों का शमन करने हेतु देवी कालरात्रि की कृपा प्राप्त करने के लिए इस अनुष्ठान में अवश्य भाग लें|

आप क्या प्राप्त करेंगे?

आपको पवित्र विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।

डॉ. पिल्लै के अनुसार

यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।

कृपया ध्यान दें-  इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिया जाने वाला प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिया जाएगा। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।

व्यक्तिगत कालरात्रि यज्ञ

INDIVIDUAL KALARATRI HOMA

अपने व्यक्तिगत कालरात्रि यज्ञ हेतु आज ही पंजीकरण करवाएं| शास्त्रों के अनुसार जब देवी पार्वती ने शुभ और निशुंभ नामक राक्षसों का वध करने के लिए अपनी सुनहरी त्वचा का त्याग किया तब देवी कालरात्रि अवतारित हुईं। एक प्राचीन तांत्रिक ग्रंथ सौधिकगम में देवी को सहस्त्रार चक्र से संबंधित बताया गया है| साथ ही उन्हें बुरी शक्तियों की विनाशक, ज्ञान, शक्ति और संपति प्रदाता बताया गया है|

आप क्या प्राप्त करेंगे?

आपको पवित्र विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।

डॉ. पिल्लै के अनुसार

यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।

कृपया ध्यान दें-  इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिया जाने वाला प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिया जाएगा। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।