बुरी नज़र व शत्रुओं का शमन करने हेतु वैदिक कार्यपद्धति
सीधा प्रसारण 21 जून 2018 को सांयकाल 5:30 बजे (पैसेफिक मानक समयानुसार)/ रात्रि 8:30 बजे (ईस्टर्न मानक समयानुसार)/ 22 जून 2018 को प्रातः 6:00 बजे (भारतीय मानक समयानुसार)
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चंडी शक्ति देवी का एक बहुत ही उग्र रूप है, जिनकी तीन आंखें हैं और उनके पास दिव्य शक्तियों द्वारा दिए गए शक्तिशाली अस्त्र हैं। संपूर्ण सृष्टि का निर्माण, भरण-पोषण और विनाश उनके अधिकार क्षेत्र में है|
एक पवित्र हिंदू ग्रंथ मार्कंडेय पुराण के देवी महात्मय खंड में देवी चंडी को आदि पराशक्ति का सबसे उग्र रूप बताया गया है। इस खंड में देवी चंडी की महिमा वर्णित है जिन्होंने अपने उग्र रूप में सृष्टि में संतुलन स्थापित करने के लिए महिषासुर, शुंभ और निशुंभ नामक राक्षसों का वध किया जोकि आसक्ति व नकारात्मकता की प्रतीक आसुरी उर्जाएं हैं| देवी चंडी उस शक्ति की प्रतीक हैं जो आपके मस्तिष्क, शरीर व आत्मा को प्रभावित करती है तथा जो आपको नकारात्मकता और पीड़ा से मुक्त जीवन प्रदान करती है|
एस्ट्रोवेद 22 जून 2018 (भारतीय मानक समयानुसार) को 10 पुजारियों द्वारा भव्य दस चंडी यज्ञ का आयोजन करेगा| दस चंडी कोई सामान्य अनुष्ठान नहीं है। ऐसे जटिल और शक्तिशाली यज्ञ को वर्षों अनुभव प्राप्त पुजारियों द्वारा किया जाता है| पवित्र ग्रंथों के अनुसार यह भव्य दस चंडी यज्ञ शत्रुओं पर विजय पाने व समस्त नकारात्मक प्रभावों को दूर करने में आपकी सहायता करेगा|
सर्वप्रथम हमारे सुदक्ष पुजारी देवी महात्मय परायण (700 छंदों का पाठ) पूर्ण करेंगे। दुर्गा सप्तशती के नाम से प्रसिद्ध देवी महात्मय के 13 अध्यायों में समाहित 700 छंदों में देवी चंडी की विजय का वर्णन है तथा जिसमें बुराई पर अच्छाई की जीत दर्शाने हेतु देवी दुर्गा द्वारा राक्षसों के वध की कथा को चित्रित किया गया है| देवी की कृपा पाने व बुरी नज़र तथा शत्रुओं का शमन करने के लिए भी सप्तशती (700 श्लोक) यज्ञ का प्रयोग किया जाता है।
जैसा कि देवी महात्मय में उल्लेख किया गया है, इस अनुष्ठान में नौ वैदिक पुजारी शक्तिशाली दस चंडी यज्ञ को संपन्न करेंगे जबकि शेष पुजारी बिंदु तर्पण नामक तर्पण अनुष्ठान को पूर्ण करेंगे। इस अनोखे तर्पण अनुष्ठान को संपन्न करने के दौरान दूध, केले व दूर्वा घास जैसे पवित्र तत्वों का उपयोग किया जाता है।
इस यज्ञ के दौरान दही और उड़द दाल से निर्मित एक वैदिक भोग को देवी चंडी को अर्पित किया जाएगा| मान्यता है कि इससे देवी समस्त सहभागियों को अपनी कृपा प्रदान करने पर विवश हो जाती है| उग्र देवी चंडी की कृपा द्वारा बुरी नज़र व शत्रुओं का शमन करने के लिए इस दुर्लभ और शक्तिशाली भव्य दस चंडी यज्ञ में अवश्य भाग लें|
एक पवित्र हिंदू ग्रंथ मार्कंडेय पुराण के देवी महात्मय खंड में देवी चंडी को आदि पराशक्ति का सबसे उग्र रूप बताया गया है। देवी चंडी उस शक्ति की प्रतीक हैं जो आपके मस्तिष्क, शरीर व आत्मा को प्रभावित करती है तथा जो आपको नकारात्मकता और पीड़ा से मुक्त जीवन प्रदान करती है| आंतरिक व बाहरी नकारात्मकताओं तथा बुरी शक्तियों का शमन करने हेतु देवी चंडी की कृपा का आवाहन करें|
आप क्या प्राप्त करेंगे?-
आपको अभिमंत्रित उत्पादों के साथ-साथ पवित्र यज्ञ से प्राप्त विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।
डॉ. पिल्लै के अनुसार-
“ यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।”
कृपया ध्यान दें- इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिए जाने वाले उत्पाद तथा प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिए जाएंगे। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।
किसी भी शुभ अनुष्ठान को शुरू करने से पूर्व भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए प्रार्थना की जाती है।
कन्या पूजा देवी चंडी के कन्या कुमारी रूप की पूजा का प्रतीक है जो विशेष रूप से एक छोटी कन्या में निहित दैवीय स्त्री शक्ति को पहचानने के लिए की जाती है|
यह एक पवित्र अनुष्ठान है जो भव्य यज्ञ करने से पूर्व देवी की सहमति लेने के लिए किया जाता है|
यह अनुष्ठान पुजारियों, स्थल व यज्ञ में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को शुद्ध करने के लिए किया जाता है।
शुभ सामग्री से भरे कलश(घड़े) का उपयोग देवी की कृपा का आह्वान करने के लिए किया जाता है।
इस अनुष्ठान में ब्रह्मांड के संतुलन को व्यवस्थित करने वाली सर्वोच्च देवी के निमित दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है|
इस अनुष्ठान में समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त करने हेतु पवित्र गाय की पूजा-अर्चना की जाती है|
इस अनुष्ठान में पाद पूजा (पैर धोने से संबंधित पारंपरिक अनुष्ठान) द्वारा बुजुर्ग विवाहित स्त्री (जिनके पति जीवित हों) का आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है|
दंपति का अर्थ युगल होता है। इस अनुष्ठान में पाद पूजा(पैर धोने से संबंधित पारंपरिक अनुष्ठान) द्वारा बुजुर्ग युगल का आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है|
ब्रह्मचारी एक अविवाहित व्यक्ति होता है। जिसे वेदों और पुराणों में उच्च सम्मान प्राप्त है। इस अनुष्ठान में पाद पूजा(पैर धोने से संबंधित पारंपरिक अनुष्ठान) द्वारा ब्रह्मचारी व्यक्ति का आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है|
इस यज्ञ अनुष्ठान को मंत्रों व श्लोकों का उच्चारण करते हुए संपन्न किया जाता है|
इस अनुष्ठान में साड़ी, हल्दी, चंदन पाउडर, कुमकुम (सिंदूर) जैसी शुभ सामग्रियों को अर्पित करके देवी का आवाहन किया जाता है|
एक यज्ञ केवल तभी संपन्न होता है जब यह अनुष्ठान किया जाता है। सर्वशक्तिमान की कृपा प्राप्त करने के लिए पवित्र वस्तुओं से भरे वस्त्र निर्मित एक थैले को यज्ञ की अग्नि में डाला जाता है|
इस अनुष्ठान में देवी की महिमा का वर्णन करने के लिए उनके निमित दीप प्रज्वलित करके आशीर्वाद ग्रहण किया जाता है|