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30 वर्षों में पहली दो युति: धनु राशि में सूर्य व शनि की युति


आपके स्वास्थ्य के समाधान व जीर्णोद्धार हेतु 30 दिवसीय अवधि


स्वस्थ व दीर्घायु जीवन तथा धैर्य व सुरक्षा का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए वैदिक कार्यपद्धति


कायाकल्प हेतु 30 दिवसीय समयावधि: धनु राशि में सूर्य

16 दिसंबर 2017 को राजसी ग्रह सूर्य धनु राशि में प्रवेश करेगा| ऐसा केवल 30 वर्षों में दो बार होता है| लंबे समय से चल रही स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से मुक्ति पाने व अपने जीवन का पुनः निर्माण करने हेतु यह 30 दिवसीय समयावधि एक आदर्श समय है। इस गोचरीय दिवस पर एस्ट्रोवेद ने शक्तिशाली स्वास्थ्यवर्धक यज्ञ व शक्तिस्थल अनुष्ठानों की व्यवस्था की है ताकि आपको धनु राशि में गोचर कर रहे सूर्य की कृपा प्राप्त हो सके|

इस काल के दौरान क्या करना चाहिए?

चूंकि सूर्य और शनि इस गोचरीय दिवस पर मूल नक्षत्र में एक साथ होंगे तथा मूल नक्षत्र जड़ का प्रतिनिधित्व करता है इसलिए यह मूल समस्याओं से जुड़े स्थायी समाधान पाने के लिए एक शक्तिशाली समय होगा। यह 30 दिवसीय समयावधि अपनी शारीरिक समस्याओं के कारणों की पहचान व उनके हल हेतु एक योग्य चिकित्सक की ख़ोज करने के लिए आदर्श है| आप प्राकृतिक चिकित्सा जैसे जड़ी-बूटी संबंधी उपचार से लाभ उठाने हेतु प्राकृतिक स्रोतों की तलाश करेंगे|

इस अवधि में हम आपको अपनी जन्मकुंडली का विश्लेषण कराने की सलाह भी देते हैं ताकि आपकी समस्याओं के मूल कार्मिक कारणों तथा आपके पूर्वजों से संबंधित आनुवांशिक कार्मिक प्रभावों की पहचान हो सके जो आपकी जड़ों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस दौरान आपको घर या कार्यस्थल पर किसी विवाद का सामना करना पड़ सकता है| एस्ट्रोवेद द्वारा बताए जाने वाले उपचार भी इन नकारात्मक प्रभावों को बेअसर करने में आपकी मदद कर सकते हैं।

धनु राशि सूर्य प्रवेश उपचारात्मक अनुष्ठानों से मिलने वाले लाभ

  • महा मृत्युंजय यज्ञ (उत्तम स्वास्थ्य व समग्र समृद्धि प्रदाता यज्ञ) – यह महा मृत्युंजय यज्ञ आकस्मिक मृत्यु से बचाव व उत्तम स्वास्थ्य तथा समग्र रूप से समृद्धि प्राप्त करने के लिए भगवान शिव की कृपा का आवाहन करता है| यह पवित्र यज्ञ दीर्घायु में वृद्धि करके जटिल रोगों से मुक्ति प्रदान कर सकता है तथा आपको एक स्वस्थ व आनंदमय जीवन दे सकता है|
  • भगवान वैद्यनाथन हेतु मृत्युंजय पुष्पांजलि व थिरुमधुरम– मृत्युंजय का अर्थ मृत्यु पर विजय है, पुष्पांजलि का अर्थ पुष्प अर्पण करना व थिरुमधुरम का आशय भगवान को मिष्ठान का भोग लगाना है| शक्तिस्थल से जुड़ी परंपराओं के अनुसार भगवान शिव के वैद्यनाथन रूप को पुष्प व मिष्ठान अर्पित करके विशेष प्रार्थना करने से आपको उत्तम स्वास्थ्य हेतु आशीर्वाद प्राप्त हो सकता है तथा आप असाध्य रोगों से मुक्ति पा सकते हैं|
  • भगवान शिव के शक्तिस्थल पर नमक व काली मिर्च अर्पित करना – शक्तिस्थल से जुड़ी पौराणिक कथाओं के अनुसार इस विशेष शक्तिस्थल पर भगवान शिव को नमक व काली मिर्च अर्पित करने से बुरी नजर से आपका बचाव होता है तथा रोगों से मुक्ति मिल सकती है|
  • औषधि दान– रोगी व जरूरतमंदों के निमित औषधि का दान करना एक दयालुतापूर्ण कार्य है जो आपको स्वास्थ्य संबंधी रोगों से बचा सकता है या आपकी वर्तमान बीमारियों को ठीक कर सकता है|

इस दिन का ज्योतिषीय महत्व

धनु राशि में सूर्य के इस गोचरीय दिवस पर चंद्रमा शनि द्वारा शासित अनुराधा नक्षत्र में रहेगा| चंद्रमा की बुध व शक्र के साथ वृश्चिक राशि में युति होगी| वृश्चिक राशि का स्वामी मंगल शुक्र के साथ राशि परिवर्तन करेगा|

ग्रहों का यह संयोजन व राशि परिवर्तन जीवन में चुनौतियों का सामना करने तथा आपको उत्तम स्वास्थ्य व दीर्घायु प्रदान करने हेतु धनु राशि में सूर्य व शनि की युति द्वारा सकारात्मक उर्जा का सर्जन करेगा|

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धनु राशि सूर्य प्रवेश उपचारात्मक पैकेज

Sun Enters Sagittarius Remedial Package
  • आपकी तरफ से महा मृत्युंजय यज्ञ (उत्तम स्वास्थ्य व समग्र समृद्धि प्रदाता यज्ञ) किया जाएगा|
  • आपकी तरफ से भगवान वैद्यनाथन के निमित मृत्युंजय पुष्पांजलि व थिरुमधुरम अनुष्ठान किया जाएगा|
  • आपकी तरफ से भगवान शिव के शक्तिस्थल पर नमक व काली मिर्च का भोग अर्पित किया जाएगा|
  • आपकी तरफ से औषधि का दान किया जाएगा|

16 दिसंबर 2017 को राजसी ग्रह सूर्य धनु राशि में प्रवेश करेगा जो कि गुरु ग्रह द्वारा शासित प्राकृतिक राशिचक्र की नवम राशि है| सूर्य और शनि की युति द्वारा उत्पन्न सकारात्मक ऊर्जा का सबसे उत्तम उपयोग करने व वैद्यनाथन के रूप में भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए यह गोचरीय दिवस सबसे उपयुक्त समय है| इस विशेष गोचरीय दिवस पर धैर्य, सुरक्षा, दीर्घायु व स्वस्थ जीवन हेतु आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए सूर्य व शनि की युति द्वारा उत्पन्न इस सकारात्मक उर्जा से जुडें|

आप क्या प्राप्त करेंगे?-

आपको पवित्र विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।

डॉ. पिल्लै के अनुसार-

“ यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।”

कृपया ध्यान दें- इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिया जाने वाला प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिया जाएगा। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।