सीधा प्रसारण 13 जून 2018 को सांयकाल 7:30 बजे (पैसेफिक मानक समयानुसार)/ रात्रि 10:30 बजे (ईस्टर्न मानक समयानुसार)/ 14 जून 2018 को प्रातः 8:00 बजे (भारतीय मानक समयानुसार)
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“कर्म का सिद्धांत यह है कि एक व्यक्ति का वर्तमान जीवन उसके स्वयं के कर्मों द्वारा निर्धारित है अर्थात उसके पूर्वजन्म के कर्मों के आधार पर| आपने इन बीजों को किसी अन्य जीवनकाल में बोया| आपने तय किया कि आपको कैसा जीवन जीना है तथा अब यह घटित ”
–डॉ. पिल्लै
वैदिक ग्रंथों के अनुसार ब्रह्महत्या दोष एक गहन पीड़ा है जो पूर्वजन्म में किए गए सात सबसे निकृष्टतम पापों में से एक को करने से उत्पन्न होती है| यदि इसका उपचार नहीं किया जाता है तो यह पीड़ा आपकी पीढ़ियों तक को परेशान कर सकती है तथा आपके वर्तमान जीवन में समस्याएं पैदा कर सकती है। पूर्वजन्म में आपके या पूर्वजों द्वारा निम्नलिखित पापों में से कोई एक पाप किया हुआ हो सकता है जिसके परिणामस्वरुप उत्पन्न पीड़ा आपके वर्तमान व्यक्तिगत या व्यावसायिक जीवन की प्रगति में बाधक बन सकती है|
ब्रह्महत्या दोष के प्रभाव आपकी प्रगति को सीमित कर सकते हैं तथा जीवन में अस्थिरता पैदा कर सकते हैं। यदि इसका उपचार नहीं किया जाता है तो यह पीढ़ियों तक को प्रभावित कर सकता है| आपके वर्तमान जीवन में यह दोष हो सकता है यदि:
ब्रह्महत्या दोष (7 निकृष्टतम पापों से उत्पन्न पीड़ा) के प्रभाव को कम करने के लिए एस्ट्रोवेद के शक्तिशाली उपचारात्मक अनुष्ठानों में भाग लेने से आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं|
कई पवित्र ग्रंथ ब्रह्महत्या दोष से उत्पन्न पीड़ा का वर्णन करते हैं। शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव के उग्र रूप भैरव इस शाप से पीड़ित थे क्योंकि उन्होंने भगवान ब्रह्मा के पांचवें सिर को काट दिया था| रामायण के अनुसार इस दोष (पीड़ा) ने भगवान राम को भी प्रभावित किया क्योंकि उन्होंने भगवान शिव के एक प्रचंड भक्त रावण का वध किया था।
ब्रह्महत्या दोष का निवारण करने के लिए वैदिक कार्यपद्धतियाँ हमारे महान ऋषियों की अनुपम भेंट हैं जो प्रत्येक व्यक्ति के पूर्व व वर्तमान जन्म के बुरे कर्मों का शमन करने तथा सद्भाव, उन्नति व शांतिपूर्ण जीवन प्रदान करने में सहायक होती हैं| एस्ट्रोवेद पापों का विनाश करने वाले देव भगवान शिव का आह्वान करने के लिए एक यज्ञ अनुष्ठान तथा पवित्र शक्तिस्थलों पर अन्य अनुष्ठानों का आयोजन करेगा जो ब्रह्महत्या दोष (पीड़ा) के प्रतिकूल प्रभाव को कम करने में आपकी सहायता कर सकते हैं तथा पीड़ाओं को खत्म कर सकते हैं।
पौराणिक कथाओं के अनुसार इन विशिष्ट शक्तिस्थलों पर भगवान शिव की पूजा-अर्चना द्वारा ब्रह्महत्या दोष से मुक्ति मिल सकती है, पापों का शमन हो सकता है, ग्रहों की पीड़ा से छुटकारा मिल सकता है, बाधाएं नष्ट हो सकती हैं, युगलों व भाई-बहनों के बीच सद्भाव बढ़ सकता है, उत्तम संतान की प्राप्ति हो सकती है तथा एक शांतिपूर्ण जीवन जीने में सहायता मिल सकती है|
शास्त्रों के अनुसार थिरुविदाईमरुदुर शक्तिस्थल पर भगवान शिव के इस जलाभिषेक अनुष्ठान द्वारा आपको ब्रह्महत्या दोष से राहत मिल सकती है, पूर्व जन्मों के निकृष्टतम पापों का शमन हो सकता है तथा आपकी इच्छाएं पूर्ण हो सकती हैं|
भगवान शिव पवित्र त्रिमूर्तियों में से विनाश के प्रतीक हैं| शास्त्रों के अनुसार इस पवित्र यज्ञ अनुष्ठान में उनके आवाहन द्वारा निकृष्टतम पापों (ब्रह्महत्या दोष) के प्रभाव को कम किया जा सकता है, भय, चिंता और नकारात्मकता का शमन हो सकता है तथा जीवन में दिव्य संरक्षण व समग्र सफलता प्राप्त हो सकती है|
पवित्र ग्रंथों के अनुसार ब्राह्मणों का सम्मान और उन्हें अन्नदान करने से आपके पूर्वजन्म के पापों का शमन हो सकता है तथा आपको आयु, आरोग्य व ऐश्वर्य (दीर्घायु, स्वास्थ्य और धन की प्राप्ति हेतु आशीर्वाद) की प्राप्ति हो सकती है|
यह एक विशेष केरलीय शैली की पूजा है जो ब्रह्महत्या दोष के प्रभाव को कम करने के लिए की जाती है| पारंपरिक पद्दति के अनुसार यह ब्राह्मणों, पूर्वजों तथा जानबूझकर या अनजाने में जानवरों और अन्य प्राणियों को नुकसान पहुंचाने वाले कृत्यों द्वारा उत्पन्न शापों को नष्ट करने के लिए भी की जाती है|
यह केरलीय अनुष्ठान जलाभिषेक समारोह का एक विशेष रूप है जिसमें शिव लिंग के ऊपर लटके हुए एक पात्र द्वारा गाय के दूध को बूंदों के रूप में गिराया जाता है| पारंपरिक पद्धतियों के अनुसार भगवान शिव के निमित यह क्षीर धारा अनुष्ठान करने से ब्रह्महत्या दोष के कारण उत्पन्न होने वाली मानसिक बीमारियां ठीक हो सकती हैं|
इस अनुष्ठान में आपकी जन्मकुंडली को गाय व बछड़े की आकृति सहित अंकित करके शक्तिस्थल पर अर्पित किया जाता है| मान्यता है कि ऐसा करने से आप ब्रह्महत्या दोष व आपके पूर्वजों द्वारा किए गए पाप कर्म आदि से मुक्ति पा सकते हैं तथा इससे आपके पूर्वजों की आत्मा को भी मोक्ष प्राप्त करने में सहायता मिल सकती है|
गाय शाश्वत प्रेम तथा शुक्र ग्रह का प्रतीकात्मक रूप है| शास्त्रों के अनुसार गौ पूजा करके उन्हें चारा खिलाने से आपके तथा पूर्वजों द्वारा किए गए पाप कर्मों का शमन किया जा सकता है तथा आपको शांति, खुशी और समृद्धि की प्राप्ति हो सकती है|
एस्ट्रोवेद पापों का विनाश करने वाले देव भगवान शिव का आह्वान करने के लिए एक यज्ञ अनुष्ठान तथा पवित्र शक्तिस्थलों पर अन्य अनुष्ठानों का आयोजन करेगा जो ब्रह्महत्या दोष (पीड़ा) के प्रतिकूल प्रभाव को कम करने में आपकी सहायता कर सकते हैं तथा पीड़ाओं को खत्म कर सकते हैं। ब्रह्महत्या दोष का निवारण करने के लिए वैदिक कार्यपद्धतियाँ हमारे महान ऋषियों की अनुपम भेंट हैं जो प्रत्येक व्यक्ति के पूर्व व वर्तमान जन्म के बुरे कर्मों का शमन करने तथा सद्भाव, उन्नति व शांतिपूर्ण जीवन प्रदान करने में सहायक होती हैं| ब्रह्महत्या दोष (7 निकृष्टतम पापों से उत्पन्न पीड़ा) के प्रभाव को कम करने के लिए एस्ट्रोवेद के शक्तिशाली उपचारात्मक अनुष्ठानों में अवश्य भाग लें|
आप क्या प्राप्त करेंगे?
आपको पवित्र विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।
डॉ. पिल्लै के अनुसार-
“यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवी”
कृपया ध्यान : इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिया जाने वाला प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिया जाएगा। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।
एस्ट्रोवेद पापों का विनाश करने वाले देव भगवान शिव का आह्वान करने के लिए एक यज्ञ अनुष्ठान तथा पवित्र शक्तिस्थलों पर अन्य अनुष्ठानों का आयोजन करेगा जो ब्रह्महत्या दोष (पीड़ा) के प्रतिकूल प्रभाव को कम करने में आपकी सहायता कर सकते हैं तथा पीड़ाओं को खत्म कर सकते हैं। ब्रह्महत्या दोष का निवारण करने के लिए वैदिक कार्यपद्धतियाँ हमारे महान ऋषियों की अनुपम भेंट हैं जो प्रत्येक व्यक्ति के पूर्व व वर्तमान जन्म के बुरे कर्मों का शमन करने तथा सद्भाव, उन्नति व शांतिपूर्ण जीवन प्रदान करने में सहायक होती हैं| ब्रह्महत्या दोष (7 निकृष्टतम पापों से उत्पन्न पीड़ा) के प्रभाव को कम करने के लिए एस्ट्रोवेद के शक्तिशाली उपचारात्मक अनुष्ठानों में अवश्य भाग लें|
आप क्या प्राप्त करेंगे?
आपको पवित्र विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।
डॉ. पिल्लै के अनुसार-
“यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।””
कृपया ध्यान दें: इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिया जाने वाला प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिया जाएगा। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।
अपने व्यक्तिगत रुद्र यज्ञ और बिल्वपत्र अर्चना का पंजीकरण करवाएं| रुद्र यज्ञ करने से रुद्र (भगवान शिव) के ग्यारह शक्तिशाली रूपों को प्रसन्न किया जा सकता है तथा पापों के शमन और इच्छाओं की पूर्ति हेतु सर्वोच्च देव से निष्कपट प्रार्थना की जा सकती है। वैदिक ग्रंथों के अनुसार इस यज्ञ के दौरान श्री रुद्रम का मंत्रोच्चारण करने से नकारात्मक प्रभाव दूर हो सकते हैं तथा आपको सुरक्षा, शुभता, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और ज्ञान की प्राप्ति हेतु आशीर्वाद प्राप्त हो सकता है|
आप क्या प्राप्त करेंगे?
आपको पवित्र विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।
डॉ. पिल्लै के अनुसार-
“यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।”
कृपया ध्यान दें: इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिया जाने वाला प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिया जाएगा। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।