संस्कृत में अश्व का अर्थ “घोडा” तथा मेधा का अर्थ “देना” है। वैदिक संस्कृति में अश्वमेध मंत्रों को सबसे से प्राचीन तथा वैदिक मंत्रों का महान मंत्र समूह माना जाता है। जब इन मंत्रों का उच्चारण सुयोग्य पुजारियों द्वारा किया जाता है। तब यह मंत्र शक्ति, राजस्व, शुद्धता, समृद्धि व कृपा प्रदान करते हैं। इन समस्त विशेषताओं का प्रतिनिधित्व अश्व करता है। एक राजा को परम शक्ति, प्रतिष्ठा, धन तथा उच्च राजा के रूप में अधिकार प्राप्त करने के लिए वेद अश्वमेध यज्ञ अनुष्ठान करने का निर्देश देते थे। परंतु अब आधुनिक काल में इस विस्तृत तथा जटिल प्रक्रिया का अभ्यास अश्वमेध मंत्रोउच्चार के रूप में किया जाता है।
अश्वमेध यज्ञ भगवान विष्णु से संबंधित हैं क्योंकि ऐसी मान्यता है कि इस यज्ञ का अनुष्ठान भगवान विष्णु ने रामावतार रूप में किया था। वैदिक साहित्य में वर्णित इन अश्वमेध मन्त्रों को तीन भागों में बांटा गया है। पहला भाग इस अनुष्ठान को प्रारंभ करने से पूर्व उन नियमों तथा विनियमों की जानकारी देता है, जिनका पालन करना एक व्यक्ति के लिए आवश्यक है। दूसरा भाग यज्ञ में प्रयोग की जाने वाली पवित्र सामग्री की जानकारी देता है। अंतिम भाग जिन मंत्रों का उच्चारण किया जाना है उनकी जानकारी देता है।
भाग्य सूक्तम यज्ञ एक वैदिक यज्ञ अनुष्ठान है जिसके द्वारा भग देवता का आवाहन किया जाता है। भग देव को संपति तथा भाग्य प्रदान करने वाला माना जाता है। यजुर्वेद के एक श्लोक में भग देव की प्रार्थना की गई है जिन्हें भगवान सूर्य का रूप माना जाता है। संस्कृत में “भाग्य” का अर्थ किस्मत/समृद्धि/संपति से है। ऐसी मान्यता है कि निपुण पुजारियों द्वारा यज्ञ अनुष्ठान के माध्यम से भग देवता का आवाहन आपको प्रयासों में सफलता तथा खुशियाँ प्रदान कर सकता है।
एस्ट्रोवेद ने अश्वमेध मंत्रोउच्चार से संबंधित एक विशेष प्रकार के अनुष्ठान को तैयार किया है। जिसके बाद हमारे सुदक्ष वैदिक पुजारियों द्वारा भाग्य सूक्तम यज्ञ किया जाता है। हमारे इन अनुभवी पुजारियों को वैदिक मंत्रों के उच्चारण तथा पवित्र अनुष्ठानों को संपादित करने में कई वर्षों का अनुभव है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हमारे पुजारियों द्वारा किया गया यह अनुष्ठान वेदों के निर्देशानुसार किया जाता है। इन अनुष्ठानों से आपको निम्नलिखित लाभ मिलते हैं-
अश्वमेध मंत्रों को सबसे से प्राचीन तथा वैदिक मंत्रों का महान मंत्र समूह माना जाता है। जब इन मंत्रों का उच्चारण सुयोग्य पुजारियों द्वारा किया जाता है। तब यह मंत्र शक्ति, राजस्व, शुद्धता, समृद्धि व कृपा प्रदान करते हैं। इन समस्त विशेषताओं का प्रतिनिधित्व अश्व करता है। भाग्य सूक्तम यज्ञ एक वैदिक यज्ञ अनुष्ठान है जिसके द्वारा भग देवता का आवाहन किया जाता है। भग देव को संपति तथा भाग्य प्रदान करने वाला माना जाता है। भगवान विष्णु तथा भग देव के आह्वान द्वारा उच्च पद, भाग्य तथा समृद्धि हेतु आशीर्वाद प्राप्त करें।
आप क्या प्राप्त करेंगे?
आपको अभिमंत्रित उत्पाद के अतिरिक्त पवित्र यज्ञ से प्राप्त विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।
डॉ. पिल्लै इसे इस प्रकार समझाते हैं:
यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।”
कृपया ध्यान दें: इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिए जाने वाले उत्पाद तथा प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिए जाएंगे। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।
व्यक्तिगत अश्वमेध मंत्रोउच्चार अनुष्ठान तथा भाग्य सूक्तम यज्ञ में अवश्य भाग लें। जब इन अश्वमेध मंत्रों का उच्चारण सुयोग्य पुजारियों द्वारा किया जाता है। तब यह मंत्र शक्ति, राजस्व, शुद्धता, समृद्धि व कृपा प्रदान करते हैं। इन समस्त विशेषताओं का प्रतिनिधित्व अश्व करता है। भाग्य सूक्तम यज्ञ एक वैदिक यज्ञ अनुष्ठान है जिसके द्वारा भग देवता का आवाहन किया जाता है। भग देव को संपति तथा भाग्य प्रदान करने वाला माना जाता है। यजुर्वेद के एक श्लोक में भग देव की प्रार्थना की गई है जिन्हें भगवान सूर्य का रूप माना जाता है। निपुण पुजारियों द्वारा यज्ञ अनुष्ठान के माध्यम से भग देवता का आवाहन आपको प्रयासों में सफलता तथा खुशियाँ प्रदान कर सकता है।
आप क्या प्राप्त करेंगे?
आपको पवित्र यज्ञ से प्राप्त विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।
डॉ. पिल्लै इसे इस प्रकार समझाते हैं
यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।”
कृपया ध्यान दें: इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिया जाने वाला प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिया जाएगा। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।