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विविध मनोकामनाओं की पूर्ति तथा समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त करने हेतु सर्वोच्च मातृ शक्ति और उनके सारथी का आवाहन करने की वैदिक कार्यपद्धति

आषाढ़ नवरात्रि (देवी वाराही से संबंधित 9 रात्रियाँ) के शुभावसर पर विविध मनोकामनाओं की पूर्ति हेतु नववर्ण पूजा (श्री चक्र पूजा)

13 जुलाई 2018 से 21 जुलाई 2018 तक (भारतीय मानक समयानुसार)

आषाढ़ नवरात्रि उत्कृष्ट पैकेज पर 15% की छूट प्राप्त करें|

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“स्त्री शक्ति सबसे शक्तिशाली ऊर्जा है। यह केवल खगोलीय समय के कुछ विशेष योगों के दौरान उपलब्ध होती है। इस समय योगी उत्सुकता से देवी माँ की शक्ति के साथ सामंजस्य स्थापित करने का प्रयास करते हैं| ”

– डॉ. पिल्लै

देवी ललिता व वाराही के निमित 9 रात्रियों से संबंधित मनोकामना पूर्ति अनुष्ठान

आषाढ़ नवरात्रि वैदिक चंद्र माह आषाढ़ (जून-जुलाई) के दौरान आने वाली देवी की नौ शक्तिशाली रात्रियों की प्रतीक है। विविध इच्छाओं की पूर्ति करने और समृद्धि का आशीर्वाद पाने हेतु सर्वोच्च देवी ललिता त्रिपुरा सुंदरी का आवाहन करने के लिए यह एक आदर्श समय है। इन नौ रातों को वाराही नवरात्रि के नाम से जाना जाता है तथा देवी ललिता की सारथि देवी वाराही की पूजा-अर्चना करने के लिए यह अवधि बहुत शुभ है। देवी वाराही संतुष्ट होकर आपकी प्रार्थना देवी ललिता तक पहुँचा सकती हैं ताकि वह आपकी इच्छाओं को पूर्ण कर सके और आपको एक समृद्ध जीवन की प्राप्ति हो सके|

देवी ललिता: सर्वोच्च प्रारंभिक दिव्य स्त्री शक्ति

Goddess Lalita

ब्रह्मांड पुराण में वर्णित पवित्र स्तोत्र ललिता सहस्रनाम (देवी ललिता के 1000 नाम) के अनुसार देवी ललिता सृजन, संरक्षण और विनाश की शक्तियों का मूर्त रूप हैं| आषाढ़ नवरात्रि के दौरान सर्वोच्च प्रारंभिक दिव्य स्त्री शक्ति देवी ललिता की पूजा-अर्चना करने से आपकी इच्छाओं की पूर्ति हो सकती है, धन-संपति की प्राप्ति हो सकती है, आप रोगों से मुक्त होकर प्रसन्न व समृद्ध जीवन जी सकते हैं| देवी ललिता त्रिपुरा सुंदरी का रूप निराकारी है तथा वे सदाशिव की ऊर्जा (सक्रिय रूप) मानी जाती हैं जो सर्वोच्च चेतना के निष्क्रिय रूप का प्रतिनिधित्व करते हैं| श्री चक्र पूजा के माध्यम से देवी का आवाहन करना श्री विद्या प्रणाली में पूजा का सर्वोच्च रूप माना जाता है।

वाराही: दिव्य माँ ललिता की सारथी

आषाढ़ नवरात्रि के दौरान दिव्य मां के साथ उनकी रथ सारथी देवी वाराही का आवाहन उनकी सुरक्षात्मक कृपा प्राप्त करने हेतु किया जाता है| देवी वाराही का शूकर मुख है तथा वे दंडनाथ देवी (न्याय की प्रतीक) के रूप में भी सम्मानित हैं| वे जीवन में आपकी प्रगति में बाधक समस्त बुरी शक्तियों का शमन कर सकती हैं तथा आपके बाहरी व आंतरिक शत्रुओं को नष्ट कर सकती हैं और अंततः आपको उच्चतम ज्ञान व दिव्यता प्रदान करती हैं| पवित्र ग्रंथ ब्रह्मांड पुराण के अनुसार देवी वाराही के आह्वान द्वारा आपके दुखों का शमन हो सकता है, आपको धन-संपति व सद्गुणों की प्राप्ति हो सकती है तथा आपको अपने सही कार्यों का प्रतिफल मिल सकता है|

श्री चक्र: देवी ललिता का निवास स्थल

इस आषाढ़ नवरात्रि के दौरान सर्वोच्च माँ देवी ललिता त्रिपुरा सुंदरी की कृपा का आह्वान करने के लिए एस्ट्रोवेद नववर्ण पूजा (श्री चक्र पूजा) जैसे शक्तिशाली अनुष्ठान का आयोजन करेगा| श्री चक्र को जब दो आयामी रूप दिया जाता है तब यह श्री चक्र यंत्र के नाम से जाना जाता है तथा जब इसे त्रिआयामी रूप (पिरामिड रूप) दिया जाता है तब यह महा मेरु कहलाता है| जाता है। श्री चक्र में एक दूसरे से मिले हुए नौ त्रिकोण (5 त्रिकोण नीचे की ओर तथा 4 त्रिकोण ऊपर की ओर) होते हैं| श्री चक्र की अधिपति देवी ललिता हैं तथा वह इस त्रिआयामी रूप के केंद्र बिंदु में निवास करती हैं|

नववर्ण पूजा: विविध इच्छाओं की पूर्ति करने वाला देवी से संबंधित अनुष्ठान

नववर्ण पूजा एक शुभ अनुष्ठान है जो सर्वोच्च देवी ललिता के हृदय के निकट है| ‘नव’ शब्द का अर्थ नौ तथा आवरण का अर्थ है परत या पर्दा| श्री चक्र के 9 परतों को पार करने के बाद, आप देवी की दिव्य सर्वोच्च ऊर्जा तक पहुंच सकते हैं। पवित्र पाठ ललिथोपाख्यानम के अनुसार इस अनुष्ठान में भाग लेने से आपकी इच्छाओं की पूर्ति हो सकती है तथा जीवन से नकारात्मकताओं का शमन होकर समृद्धि व प्रसन्नता प्राप्त हो सकती है|

आषाढ़ नवरात्रि अनुष्ठानों की व्याख्या

इस आषाढ़ नवरात्रि के शुभावसर पर देवी ललिता व वाराही की कृपा द्वारा आपके जीवन को समृद्ध बनाने के लिए एस्ट्रोवेद ने अनुष्ठानों के एक समूह का चयन किया है|

 Kum-Kum Archana

सभी नौ दिवसों (13 जुलाई – 21 जुलाई 2018) तक देवी वाराही के शक्तिस्थल पर कुंकुम अर्चना

पवित्र ग्रंथों के अनुसार कुंकुम अर्चना संपन्न करने से आपके शत्रुओं का शमन हो सकता है तथा आपको जीवन में समृद्धि की प्राप्ति हो सकती है|

Durga Suktam Homa

13 जुलाई 2018 को दुर्गा सूक्तम यज्ञ

शास्त्रों के अनुसार पवित्र यज्ञ अनुष्ठान के दौरान दुर्गा सूक्तम स्तोत्र का पाठ करने से आपके जीवन से बाधाओं का शमन हो सकता है, बुरी शक्तियों से आपकी सुरक्षा हो सकती है तथा आपको वित्तीय स्थिरता, समृद्धि, शांति व सफलता की प्राप्ति हो सकती है|

Navavarana Pooja

21 जुलाई 2018 को नववरण पूजा (श्री चक्र पूजा)

पवित्र पाठ ललिथोपाख्यानम के अनुसार इस अनुष्ठान में भाग लेकर तथा देवी के आवाहन द्वारा आशीर्वाद प्राप्त करके आप शत्रुओं का शमन कर सकते हैं तथा अपने जीवन में समृद्धि और खुशी पा सकते हैं|

Goddess Varahi Homa

21 जुलाई 2018 को देवी वाराही यज्ञ

पवित्र ग्रंथ ब्रह्मांड पुराण के अनुसार देवी वाराही के आह्वान द्वारा आपके दुखों का शमन हो सकता है, आपको धन-संपति, यश व सद्गुणों की प्राप्ति हो सकती है तथा अपने सही कार्यों का प्रतिफल मिल सकता है|

Varahi Statue

2.5 इंच आकार की देवी वाराही की अभिमंत्रित प्रतिमा

इस अभिमंत्रित प्रतिमा को अपने प्रार्थना या ध्यान कक्ष में स्थापित करने से आपका वातावरण देवी की सकारात्मक उर्जाओं से परिपूर्ण हो सकता है तथा आपको उनका कृपापूर्ण आशीर्वाद प्राप्त हो सकता है|

आषाढ़ नवरात्रि आवश्यक पैकेज

Ashada Navaratri Essential Package
  • आपकी तरफ से देवी वाराही के शक्तिस्थल पर सभी 9 दिनों तक कुमकुम द्वारा पूजा-अर्चना की जाएगी| जिसकी शुरुआत 13 जुलाई 2018 से होगी|
  • आपकी तरफ से 21 जुलाई 2018 को नववरण पूजा (श्री चक्र पूजा) की जाएगी|

“आषाढ़ नवरात्रि” का संबंध आषाढ़ (जून-जुलाई) नामक वैदिक चंद्र माह के 9 दिनों से है, जो कि तमिल माह आदि से भी मेल खाता है। इस आषाढ़ नवरात्रि के दौरान एस्ट्रोवेद नववर्ण पूजा संपन्न करेगा जिसमें सर्वोच्च देवी माँ ललिता त्रिपुरा सुंदरी की कृपा का आह्वान किया जाएगा जो श्री चक्र के बिंदु के केंद्र में निवास करती हैं। देवी की सर्वोच्च दिव्य ऊर्जा प्राप्त करने हेतु इस आषाढ़ नवरात्रि आवश्यक पैकेज अनुष्ठानों में अवश्य भाग लें।

आप क्या प्राप्त करेंगे?

आपको पवित्र विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।

डॉ. पिल्लै के अनुसार

यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।

कृपया ध्यान दें-  इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिया जाने वाला प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिया जाएगा। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।

आषाढ़ नवरात्रि वर्धित पैकेज

Ashada Navaratri Elite Package
  • आपकी तरफ से देवी वाराही के शक्तिस्थल पर सभी 9 दिनों तक कुमकुम द्वारा पूजा-अर्चना की जाएगी| जिसकी शुरुआत 13 जुलाई 2018 से होगी|
  • आपकी तरफ से 21 जुलाई 2018 को नववरण पूजा (श्री चक्र पूजा) की जाएगी|
  • आपकी तरफ से 21 जुलाई 2018 को देवी वाराही के शक्तिस्थल पर सामूहिक यज्ञ किया जाएगा|

“आषाढ़ नवरात्रि” का संबंध आषाढ़ (जून-जुलाई) नामक वैदिक चंद्र माह के 9 दिनों से है, जो कि तमिल माह आदि से भी मेल खाता है। इस आषाढ़ नवरात्रि के दौरान एस्ट्रोवेद नववर्ण पूजा संपन्न करेगा जिसमें सर्वोच्च देवी माँ ललिता त्रिपुरा सुंदरी की कृपा का आह्वान किया जाएगा जो श्री चक्र के बिंदु के केंद्र में निवास करती हैं। देवी की सर्वोच्च दिव्य ऊर्जा प्राप्त करने हेतु इस आषाढ़ नवरात्रि वर्धित पैकेज अनुष्ठानों में अवश्य भाग लें।

आप क्या प्राप्त करेंगे?

आपको पवित्र विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।

डॉ. पिल्लै के अनुसार-

“यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।”

कृपया ध्यान दें-  इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिया जाने वाला प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिया जाएगा। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।

आषाढ़ नवरात्रि उत्कृष्ट पैकेज

Ashada Navaratri Elite Package
  • आपकी तरफ से देवी वाराही के शक्तिस्थल पर सभी 9 दिनों तक कुमकुम द्वारा पूजा-अर्चना की जाएगी| जिसकी शुरुआत 13 जुलाई 2018 से होगी|
  • आपकी तरफ से 21 जुलाई 2018 को नववरण पूजा (श्री चक्र पूजा) की जाएगी|
  • आपकी तरफ से 21 जुलाई 2018 को देवी वाराही के शक्तिस्थल पर सामूहिक यज्ञ किया जाएगा|
  • आपकी तरफ से 13 जुलाई 2018 को एस्ट्रोवेद के उपचारात्मक केंद्र में आषाढ़ नवरात्रि के प्रथम दिवस पर व्यक्तिगत दुर्गा सूक्तम यज्ञ किया जाएगा|
  • आपकी तरफ से 21 जुलाई 2018 को एस्ट्रोवेद के उपचारात्मक केंद्र में आषाढ़ नवरात्रि के अंतिम दिवस पर व्यक्तिगत वाराही यज्ञ किया जाएगा|
  • आपको 2.5 इंच आकार की देवी वाराही की अभिमंत्रित प्रतिमा प्रदान की जाएगी|

“आषाढ़ नवरात्रि” का संबंध आषाढ़ (जून-जुलाई) नामक वैदिक चंद्र माह के 9 दिनों से है, जो कि तमिल माह आदि से भी मेल खाता है। इस आषाढ़ नवरात्रि के दौरान एस्ट्रोवेद नववर्ण पूजा संपन्न करेगा जिसमें सर्वोच्च देवी माँ ललिता त्रिपुरा सुंदरी की कृपा का आह्वान किया जाएगा जो श्री चक्र के बिंदु के केंद्र में निवास करती हैं। देवी की सर्वोच्च दिव्य ऊर्जा प्राप्त करने हेतु इस आषाढ़ नवरात्रि उत्कृष्ट पैकेज अनुष्ठानों में अवश्य भाग लें।

आप क्या प्राप्त करेंगे?

आपको अभिमंत्रित उत्पादों के साथ-साथ पवित्र यज्ञ से प्राप्त विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।

डॉ. पिल्लै के अनुसार-

” यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।”

कृपया ध्यान दें-   इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिए जाने वाले उत्पाद तथा प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिए जाएंगे। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय

अन्य अनुशंसित सेवाएं

ललिता सहस्रनाम सहित व्यक्तिगत दुर्गा सूक्तम यज्ञ (दैवीय सुरक्षा हेतु यज्ञ)

Lalita Sahasranama Chanting and Durga Suktam Homa

आषाढ़ नवरात्रि के शुभावसर पर होने वाले इस व्यक्तिगत अनुष्ठान हेतु अपना पंजीकरण अवश्य करवाएं| इस अनुष्ठान में भाग लेकर आप अपने जीवन में सफलता प्राप्ति में बाधक समस्त समस्याओं का शमन कर सकते हैं तथा एक आनंदायक व समस्यामुक्त जीवन की प्राप्ति कर सकते हैं| इस यज्ञ को संपन्न करने से देवी की दिव्य सुरक्षा सुनिश्चित हो सकती है और जबरदस्त सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न हो सकती है जो आपके जीवन में समस्त प्रकार के दुष्प्रभावों व दुर्भाग्य के विरुद्ध एक शक्तिशाली सर्वव्यापी सुरक्षा कवच बना सकती है।

आप क्या प्राप्त करेंगे?

आपको पवित्र विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।

डॉ. पिल्लै के अनुसार-

“यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।”

कृपया ध्यान दें-  इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिया जाने वाला प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिया जाएगा। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।

व्यक्तिगत वाराही यज्ञ

Individual Varahi Homa

आषाढ़ नवरात्रि के शुभावसर पर होने वाले इस व्यक्तिगत अनुष्ठान हेतु अपना पंजीकरण अवश्य करवाएं| पवित्र ग्रंथ ब्रह्मांड पुराण के अनुसार देवी वाराही के आह्वान द्वारा आपके दुखों का शमन हो सकता है, आपको धन-संपति व सद्गुणों की प्राप्ति हो सकती है तथा आपको अपने सही कार्यों का प्रतिफल मिल सकता है|

आप क्या प्राप्त करेंगे?

आपको पवित्र विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।

डॉ. पिल्लै के अनुसार-

यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।

कृपया ध्यान दें  इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिया जाने वाला प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिया जाएगा। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।