संस्कृत शब्द ‘आपदुद्धारण’ का अर्थ है जो सभी खतरों, भय, दर्द, दुख और बाधाओं को दूर करता है। यह शक्तिशाली आपदुद्धारण स्तोत्र सृष्टि के सर्वोच्च रक्षक भगवान विष्णु से संबंधित है, जो विभिन्न रूपों को धारण करके अपनी अनोखी कृपा द्वारा आपको समृद्धशाली जीवन प्रदान कर सकते हैं| आपदुद्धारण स्तोत्र के उच्चारण द्वारा भगवान विष्णु के अनोखे आशीर्वाद से आप अपने जीवन से विघ्न, बाधाएँ, भय, रोग, असफलताएं, आदि को दूर करके भयमुक्त समृद्धिशाली जीवन जी सकते हैं|
संस्कृत शब्द “मृत्यु” का अर्थ मौत और ‘जया’ का मतलब विजय है। इस रूप में भगवान शिव मृत्यु पर विजय प्राप्त करते हैं। शक्तिशाली आपदुद्धारण स्तोत्र के उच्चारण के बाद भगवान शिव का मृत्युंजय रूप में पवित्र यज्ञ अनुष्ठान के द्वारा आवाहन किया जाता है| बीजाक्षर संपुटित अमृत मृत्युंजय यज्ञ अनुष्ठान में भगवान शिव के आवाहन के दौरान 7 अनोखी वस्तुएं अर्पित की जाती हैं| इस अनुष्ठान के दौरान भगवान शिव को मृत्युंजय रूप में जो 7 पवित्र औषिधियाँ अर्पित की जाती हैं, उससे स्वास्थ्यप्रद उर्जा प्राप्त होती है जोकि शरीर, मन व आत्मा को पुनः यौवन प्रदान करती है| इसके साथ ही यह गंभीर रोग, लंबी बीमारी, परिवार में अकाल मृत्यु व मृत्यु भय आदि को दूर करके समृद्धशाली जीवन देती है|
आपदुद्धारण स्तोत्र महान ऋषियों द्वारा अनुशंसित एक ऐसा शक्तिशाली स्तोत्र है, जिसका नित्य कर्म में पाठ करने से हमें भगवान विष्णु की सुरक्षात्मक शक्ति प्राप्त होती है, ताकि हम अनजाने खतरों से निकलकर सफलता की तरफ अग्रसर हो सकें| शक्तिशाली मंत्रों का उच्चारण करते हुए हमारे अनुभवी पुजारी बीजाक्षर मंत्र तथा यज्ञ में पवित्र औषधियां अर्पित करके भगवान मृत्युंजय का आवाहन करेंगे| आहुति के दौरान हमारे पुजारी व्यक्तिगत रूप से आपके नाम व जन्मनक्षत्र का उच्चारण करेंगे| शक्तिशाली मंत्रोचारण व यज्ञ इन दो संयुक्त अनुष्ठानों के माध्यम से भगवान विष्णु व भगवान शिव की सुरक्षात्मक तथा संहार उर्जाओं के द्वारा आपके जीवन से भय, रोग, अकाल मृत्यु आदि का नाश होता है और आपको दीर्घायु प्राप्त होती है|
आपदुद्धारण स्तोत्र इस प्रार्थना को रोजाना पढने से मिलने वाले लाभों के बारे में बताता है| भगवान मृत्युंजय का बीजाक्षर मंत्र जिसका वर्णन यजुर्वेद में है, भगवान शिव के मृत्युंजय स्वरुप का आवाहन करके उनसे प्राप्त होने वाले लाभों के बारे में बताता है| पवित्र धर्मग्रंथों के अनुसार आपदुद्धारण स्तोत्र तथा बीजाक्षर संपुटित अमृत मृत्युंजय यज्ञ का संयुक्त अनुष्ठान आपको निम्नलिखित लाभ दे सकता है-
इस दिन चंद्रमा मिथुन राशि में आर्द्रा नक्षत्र से गोचर करेगा| आर्द्रा नक्षत्र का स्वामी राहु है| इस नक्षत्र के देव रूद्र हैं, उन्हें भगवान शिव का उग्र रूप माना गया है| इस नक्षत्र में “यत्न शक्ति” निहित है, जो लक्ष्यों को प्राप्त करने में आपकी मदद करती है| इन दिन चंद्रमा मंगल की युति में होगा, जो कि स्वास्थ्य का प्रतीक है| गुरु, शनि तथा शुक्र जैसे मुख्य ग्रह इस दिन चंद्रमा पर अपना केंद्रीय प्रभाव डाल रहे होंगे, जिसके फलस्वरूप यह दिन अच्छा स्वास्थ्य व दीर्घायु प्राप्त करने के लिए और भी शक्तिशाली बन जाएगा| शुक्र, जोकि संबंध, धन और स्वास्थ्य को दर्शाता है, अपनी उच्च राशि मीन में होगा| यह स्वास्थ्य और धन का पुनरुत्थान करने के लिए आपके प्रयासों को सफल बनाएगा| इसी दिन गुरु(देवगुरु) तथा शुक्र(दैत्यगुरु) परस्पर एक-दूसरे पर सप्तम दृष्टि डालेंगे, ऐसा 12 वर्षों में सिर्फ एक बार होता है| इसके अतिरिक्त गुरु प्राकृतिक राशि चक्र के छठे भाव से गोचर करेगा जोकि स्वास्थ्य और पुनर्योवन से संबंधित भाव है| इस प्रकार यह ग्रह स्थिति शरीर, मन व आत्मा में उत्तम संतुलन स्थापित करने के लिए इसे एक आदर्श दिन बनाती है|
इस पवित्र अनुष्ठान में अवश्य भाग लीजिए जिसमें शक्तिशाली मंत्रोचारण व यज्ञ इन दो संयुक्त अनुष्ठानों के माध्यम से भगवान विष्णु व भगवान शिव की सुरक्षात्मक तथा संहार उर्जाओं के द्वारा आपके जीवन से भय, रोग, अकाल मृत्यु आदि का नाश होता है और आपको दीर्घायु प्राप्त होती है| इस अनुष्ठान के दौरान भगवान शिव को मृत्युंजय रूप में जो 7 पवित्र औषिधियाँ अर्पित की जाती हैं, उससे स्वास्थ्यप्रद उर्जा प्राप्त होती है जोकि शरीर, मन व आत्मा को पुनः यौवन प्रदान करती है| इसके साथ ही यह गंभीर रोग, लंबी बीमारी, परिवार में अकाल मृत्यु व मृत्यु भय आदि को दूर करके समृद्धशाली जीवन देती करती है| यह आपके लिए भगवान विष्णु और भगवान शिव के मृत्युंजय रूप से जुड़कर परम समृद्धि, स्वास्थ्य व भयमुक्त जीवन जीने का अनोखा आशीर्वाद प्राप्त करने हेतु एक दुर्लभ अवसर है।
आप क्या प्राप्त करेंगे?
आपको अभिमंत्रित उत्पादों के साथ-साथ पवित्र यज्ञ से प्राप्त विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।
डॉ. पिल्लै के अनुसार-
“ यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।”
कृपया ध्यान दें-इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिए जाने वाले उत्पाद तथा प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिए जाएंगे। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।
अपने व्यक्तिगत अमृत मृत्युंजय यज्ञ अनुष्ठान को अभी बुक करें जिसमें भगवान शिव के मृत्युंजय स्वरुप का आवाहन करके आपको दीर्घायु की प्राप्ति होती है तथा मृत्यु के भय व असामयिक मृत्यु से आपका बचाव होता है| संस्कृत शब्द “मृत्यु” का अर्थ मौत और ‘जया’ का मतलब विजय है। इस रूप में भगवान शिव मृत्यु पर विजय प्राप्त करते हैं। इस शक्तिशाली आपदुद्धारण स्तोत्र के उच्चारण के बाद भगवान शिव का मृत्युंजय रूप में पवित्र यज्ञ अनुष्ठान के द्वारा आवाहन किया जाता है|
आप क्या प्राप्त करेंगे?
आपको पवित्र विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।
डॉ. पिल्लै के अनुसार-
“ यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।”
कृपया ध्यान दें-: इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिया जाने वाला प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिया जाएगा। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।