5 पुजारियों द्वारा भगवान अघोर वीरभद्र से संबंधित भव्य यज्ञ
(नकारात्मकता निवारक व दैवीय सुरक्षा प्रदाता यज्ञ)
अघोर वीरभद्र जोकि भगवान शिव के उग्र रूप हैं, परम रक्षक तथा नकारात्मकता व अज्ञानता के विनाशकारी देवता माने गए हैं| अघोर वीरभद्र क्रियात्मक नायक हैं तथा श्रद्धा, सम्मान व पूर्ण समर्पण के प्रतीक हैं| वे अपने निर्माता भगवान शिव के आदेशों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं| पवित्र यज्ञ अनुष्ठान में उनका आवाहन करने से आपको बुरी शक्तियों, बाधाओं व नकारात्मकता को खत्म करने तथा अपने जीवन में पूर्ण शुभता स्थापित करने की हिम्मत मिल सकती है।
पवित्र ग्रंथ वायु पुराण के अनुसार अघोर वीरभद्र स्वयं भगवान शिव के उग्र रूप में उनके क्रोध से उत्पन्न हुए थे तथा उन्होंने दक्ष यज्ञ(देवी पार्वती के पिता) का विनाश किया| दक्ष ने एक यज्ञ (भव्य यज्ञ अनुष्ठान) का आयोजन किया था और उसमें उन्होंने भगवान शिव को छोड़कर सभी देवताओं को आमंत्रित किया क्योंकि उनकी पुत्री देवी पार्वती ने उनकी सहमति के बिना भगवान शिव से विवाह किया था। हालांकि उनकी पुत्री देवी पार्वती ने इस यज्ञ अनुष्ठान में भाग लिया| परंतु राजा दक्ष ने भगवान शिव को अपमानित करने हेतु उन्हें निमंत्रित नहीं दिया इससे क्रुद्ध होकर देवी पार्वती ने स्वयं को इस यज्ञ अग्नि में भस्म कर दिया|
देवी पार्वती की मृत्यु की खबर सुनकर क्रोधित भगवान शिव ने अघोर वीरभद्र को उत्पन्न किया और उसे दक्ष यज्ञ को नष्ट करने के लिए अपनी सेना सहित भेज दिया। वीरभद्र ने दक्ष का शीश काट डाला| राजा दक्ष की पत्नी द्वारा याचना करने पर भगवान शिव ने दक्ष के धड़ पर बकरे का शीश आरोपित कर दिया
पहली बार एस्ट्रोवेद भगवान अघोर वीरभद्र की कृपा प्राप्त करने हेतु पवित्र यज्ञ का आयोजन करेगा| इस अनुष्ठान के माध्यम से आपके जीवन की समस्त नकारात्मता दूर होकर सकरात्मता बढ़ेगी| इस यज्ञ अनुष्ठान में भाग लेकर आप भगवान वीरभद्र का आशीर्वाद प्राप्त करके निम्नलिखित लाभ ले सकते हैं-
नकारात्मकता विनाशक व दिव्य संरक्षण प्रदाता पैकेज
संरक्षण प्रदाता देव भगवान वीरभद्र के अनुष्ठान में अवश्य भाग लें| यह अनुष्ठान आपको शत्रुओं पर विजय व नकारात्मकता का शमन करके सुरक्षा व साहस प्रदान करता है| इस अनुष्ठान में पवित्र यज्ञ के अतिरिक्त भगवान अघोर वीरभद्र से संबंधित 2 शक्तिशाली अनुष्ठान शामिल हैं|
आप क्या प्राप्त करेंगे?
आपको पवित्र विभूति व लाल सिंदूर प्रदान किए जाएंगे। जो कि इस पवित्र अनुष्ठान द्वारा सिद्ध होंगे। इस पवित्र विभूति व सिंदूर को अपने मंदिर अथवा ध्यान कक्ष में रखें तथा अपनी दैनिक पूजा व ध्यान करने के समय इन्हें अपने मस्तक पर धारण करके दैवीय कृपा प्राप्त करें।
डॉ. पिल्लै के अनुसार-
“ यह अनुष्ठान हमारे विचारों का कार्बनीकरण कर देता है। कार्बन हमारी सूचनाओं से सम्बंधित सूक्ष्म अनु कण होते हैं। इस कार्बनीकरण प्रक्रिया से प्राप्त पवित्र राख को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। इस प्रसाद स्वरूप पवित्र राख को मस्तक पर धारण करने से आपको दैवीय कृपा प्राप्त होती है।”
कृपया ध्यान दें- इस पूरी अनुष्ठान प्रक्रिया के उपरांत आपको दिया जाने वाला प्रसाद एक सप्ताह के बाद चेन्नई (तमिलनाडु) से भेज दिया जाएगा। विदेशों में पहुँचाने हेतु कृपया हमें दो से चार हफ़्तों का समय दें।